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सीआर पद भी गंवाना पड़ा, सीडीएलयू के ऑफिस बीरअर के पदों के लिए नामांकन पत्र भरा तो स्क्रूटिंग कमेटी ने गड़बड़ी पकड़ी
Updated Fri, 19 Oct 2018 01:49 AM IST
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उम्र थी 25 साल नौ महीने, सीआर बनने के लिए एक साल छिपाई
सिरसा। उम्र थी 25 साल नौ महीने, लेकिन छात्रा ने सीआर बनने के लिए एक साल कम लिख दी। सीआर भी बन गई। लेकिन इच्छा वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ने की थी। स्क्रूटिंग कमेटी की जांच में मामला पकड़ में आने पर सीआर का पद भी गंवाना पड़ा। सीडीएलयू के बीते दिन हुए चुनावों में एमबीए विभाग की एक सीआर को चुनाव स्क्रूटिंग कमेटी ने डिस्क्वालीफाई कर दिया। एमबीए विभाग द्वारा नामित सीआर छात्रा ने अपनी उम्र एक साल कम बताई हुई थी, लेकिन स्क्रूटिंग के दौरान जब नोमिनेशन फार्म की जांच की गई तो उसकी उम्र 25 साल नौ महीने निकली। जबकि उसने सेल्फ डेक्लेरशन के तहत नामांकन पत्र में अपनी उम्र 24 साल नौ महीने बताई थी।
एमबीए पांच वर्षीय कोर्स के नौवें सेमेस्टर में विभाग की अेार से नामित सीआर छात्रा ने ऑफिस बीरअर के पदों के लिए सीआर से नामांकन पत्र भरा। छात्रा ने चार पदों में से एक पद के लिए नोमिनेशन भरा। लेकिन जब शाम को स्क्रूटिंग कमेटी ने नॉमिनेशन की स्क्रूटिंग की तो कमेटी ने जन्म तिथि चैक की। सीआर ने जन्म तिथि तो सही भरी, लेकिन कुल आयु 24 साल नौ महीने नामांकन पत्र में भरी। जबकि उसकी आयु 25 साल नं महीने बनती थी। कमेटी ने यह गड़बड़ी पकड़ी और उसका नामांकन रद्द कर दिया। साथ ही कमेटी ने इस बात पर सवालिया निशान लगाए कि जब एमबीए विभाग ने सीआर के लिए उसे नामित किया तो विभागीय चुनाव कमेटी ने इस गड़बड़ को क्यों नहीं पकड़ा। सीआर छात्रा यदि केवल वोटिंग के लिए आती तो गड़बड़ी पकड़ में नहीं आनी थी। लेकिन ऑफिस बिरअर के पद के लिए आवेदन करने के कारण ही उसकी गड़बड़ी पकड़ी गई।
शाम साढ़े पांच बजे एमबीए विभाग में सीआर छात्रा एप्लीकेशन लिखने पहुंची
नामांकन रद्द होने के बाद शाम को वह एमबीए विभाग में गई। वहां पर क्लर्क एप्लीकेशन लिखवा रहा था, लेकिन मीडिया के पहुंचने पर सीआर छात्रा और क्लर्क और गेस्ट फैकल्टी के दो लेक्चरर ऑफिशियल वर्क की बात कहकर मामले को छिपाते रहे। लेकिन मामले की पोल खुलने पर चारों क्लर्क रूम को आनन फानन में बंद करके बाहर आ गए। सीडीएलयू प्रशासन ने दोपहर को वोटिंग करने वाले 58 सीआर की लिस्ट जारी की थी। लेकिन उसे डिस क्वालीफाई कर दिया गया। इसलिए 57 सीआर ने वोटिंग में हिस्सा लिया। इसी प्रकार से एक अन्य सीआर छात्रा ने नोमिनेशन में एक की बजाए दो का नाम प्रपोज किया हुआ था। उसका भी मत रद्द हो गया।
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स्क्रूटिंग में यह मामला सामने आया। काम के दबाव के चलते विभाग से यह गलती हुई है। अब किसी अन्य छात्र को सीआर घोषित करने का कोई नियम नहीं है। छात्रा के भविष्य को देखकर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे। छात्रा ने लिखकर अपनी गलती मानी है।
राजकुमार सिवाच, रजिस्ट्रार,सीडीएलयू।
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सिरसा। उम्र थी 25 साल नौ महीने, लेकिन छात्रा ने सीआर बनने के लिए एक साल कम लिख दी। सीआर भी बन गई। लेकिन इच्छा वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ने की थी। स्क्रूटिंग कमेटी की जांच में मामला पकड़ में आने पर सीआर का पद भी गंवाना पड़ा। सीडीएलयू के बीते दिन हुए चुनावों में एमबीए विभाग की एक सीआर को चुनाव स्क्रूटिंग कमेटी ने डिस्क्वालीफाई कर दिया। एमबीए विभाग द्वारा नामित सीआर छात्रा ने अपनी उम्र एक साल कम बताई हुई थी, लेकिन स्क्रूटिंग के दौरान जब नोमिनेशन फार्म की जांच की गई तो उसकी उम्र 25 साल नौ महीने निकली। जबकि उसने सेल्फ डेक्लेरशन के तहत नामांकन पत्र में अपनी उम्र 24 साल नौ महीने बताई थी।
एमबीए पांच वर्षीय कोर्स के नौवें सेमेस्टर में विभाग की अेार से नामित सीआर छात्रा ने ऑफिस बीरअर के पदों के लिए सीआर से नामांकन पत्र भरा। छात्रा ने चार पदों में से एक पद के लिए नोमिनेशन भरा। लेकिन जब शाम को स्क्रूटिंग कमेटी ने नॉमिनेशन की स्क्रूटिंग की तो कमेटी ने जन्म तिथि चैक की। सीआर ने जन्म तिथि तो सही भरी, लेकिन कुल आयु 24 साल नौ महीने नामांकन पत्र में भरी। जबकि उसकी आयु 25 साल नं महीने बनती थी। कमेटी ने यह गड़बड़ी पकड़ी और उसका नामांकन रद्द कर दिया। साथ ही कमेटी ने इस बात पर सवालिया निशान लगाए कि जब एमबीए विभाग ने सीआर के लिए उसे नामित किया तो विभागीय चुनाव कमेटी ने इस गड़बड़ को क्यों नहीं पकड़ा। सीआर छात्रा यदि केवल वोटिंग के लिए आती तो गड़बड़ी पकड़ में नहीं आनी थी। लेकिन ऑफिस बिरअर के पद के लिए आवेदन करने के कारण ही उसकी गड़बड़ी पकड़ी गई।
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शाम साढ़े पांच बजे एमबीए विभाग में सीआर छात्रा एप्लीकेशन लिखने पहुंची
नामांकन रद्द होने के बाद शाम को वह एमबीए विभाग में गई। वहां पर क्लर्क एप्लीकेशन लिखवा रहा था, लेकिन मीडिया के पहुंचने पर सीआर छात्रा और क्लर्क और गेस्ट फैकल्टी के दो लेक्चरर ऑफिशियल वर्क की बात कहकर मामले को छिपाते रहे। लेकिन मामले की पोल खुलने पर चारों क्लर्क रूम को आनन फानन में बंद करके बाहर आ गए। सीडीएलयू प्रशासन ने दोपहर को वोटिंग करने वाले 58 सीआर की लिस्ट जारी की थी। लेकिन उसे डिस क्वालीफाई कर दिया गया। इसलिए 57 सीआर ने वोटिंग में हिस्सा लिया। इसी प्रकार से एक अन्य सीआर छात्रा ने नोमिनेशन में एक की बजाए दो का नाम प्रपोज किया हुआ था। उसका भी मत रद्द हो गया।
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स्क्रूटिंग में यह मामला सामने आया। काम के दबाव के चलते विभाग से यह गलती हुई है। अब किसी अन्य छात्र को सीआर घोषित करने का कोई नियम नहीं है। छात्रा के भविष्य को देखकर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे। छात्रा ने लिखकर अपनी गलती मानी है।
राजकुमार सिवाच, रजिस्ट्रार,सीडीएलयू।