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पराली जलाने पर 223 किसानों पर लगा 5.75 लाख का जुर्माना, एक्यूआई 227
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पराली के अवशेषों को लगी हुई आग
- फोटो : Sirsa
सिरसा। जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की समस्या बढ़ने लगी हैं। भविष्य धुएं में नजर आ रहा है। किसानों की ओर से लगातार धान के अवशेषों को आग के हवाले किया जा रहा है, लेकिन कृषि विभाग पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने में कारगर साबित नहीं हो पा रहे। हरसैक के माध्यम से विभाग जिले पर नजर रख रहा है, लेकिन नाम मात्र ही लोकेशन विभाग के पास पहुंच रही है। इसके बाद अधिकारियों की ओर से उस स्थान पर निरीक्षण कर जगह का चयन किया जाता है। विभाग की ओर से अब तक 223 किसानों के चालान किए गए हैं और 5 लाख 75 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
धान के अवशेषों को आग के हवाले किए जाने के कारण सुबह के समय स्मॉग के कारण दृश्यता 10 मीटर तक रह जाती है। वहीं, अस्पतालों में सांस के मरीजों की तादाद बढ़ने लगी हैं। नागरिक अस्पताल में पहले के मुकाबले 30 फीसदी मरीज अधिक जांच करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के साथ लगते क्षेत्रों में भी किसान धान के अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं।
हरसैक से मिली 12 लोकेशन, जांच करेंगे अधिकारी
बुधवार को भी सिरसा में अलग-अलग स्थानों पर आगजनी होने की 12 लोकेशन हरसैक से विभाग के पास पहुंची है। इसके बाद विभाग की टीमों की ओर से उन स्थानों का निरीक्षण किया जाएगा और सही जगह पाए जाने पर संबंधित किसान का चालान काटा जाएगा। गांव के पटवारी, नंबरदार और कृषि विभाग की टीमों को भी तैनात किया गया है, जोकि अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेती है और धान के अवशेषों को आग के हवाले करने वाले किसानों का मौके पर ही चालान काटा जा रहा है।
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अब तक मिली 337 लोकेशन, 223 के काटे गए चालान
विभाग के पास इस सीजन में आगजनी की घटनाएं होने की 337 लोकेशन हरसेक से पहुंची है। जिसके बाद विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंच जांच की तो 337 में से 223 लोकेशन सही पाई गई है। इसके बाद विभाग की ओर से संबंधित किसानों के पांच लाख 75 हजार का जुर्माना लगाया गया है। टीमों की ओर से मौके पर पहुंचकर एकड़ अनुसार चालान काटा जाता है। इसके बाद नियम अनुसार उन किसानों का चालान भरवाया जाता है।
सांस, खांसी और जुकाम के मरीजों की बढ़ रही ओपीडी
धान की पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। वायु में उपस्थित धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है। प्रदूषित कणों के कारण खांसी, अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। प्रदूषित वायु के कारण फेफड़ों में सूजन, संक्रमण, निमोनिया और दिल की बीमारियों सहित अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सांस और दिल के मरीजों को इससे बचाव करना चाहिए। जरूरी होने पर ही लोग घर से बाहर निकले और मास्क व अन्य कपड़े से नाक को ढक कर रखें। - डॉ. बुधराम, उप सिविल सर्जन, सिरसा
धान के अवशेषों को आग के हवाले करने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हरसैक की मदद से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है और टीमें लगातार गांवों में निरीक्षण कर रही है। अब तक 223 किसानों के चालान काटे गए हैं और 5 लाख 57 हजार का जुर्माना लगाया गया है। - डॉ. बाबूलाल, कृषि उपनिदेशक, सिरसा
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धान के अवशेषों को आग के हवाले किए जाने के कारण सुबह के समय स्मॉग के कारण दृश्यता 10 मीटर तक रह जाती है। वहीं, अस्पतालों में सांस के मरीजों की तादाद बढ़ने लगी हैं। नागरिक अस्पताल में पहले के मुकाबले 30 फीसदी मरीज अधिक जांच करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के साथ लगते क्षेत्रों में भी किसान धान के अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं।
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हरसैक से मिली 12 लोकेशन, जांच करेंगे अधिकारी
बुधवार को भी सिरसा में अलग-अलग स्थानों पर आगजनी होने की 12 लोकेशन हरसैक से विभाग के पास पहुंची है। इसके बाद विभाग की टीमों की ओर से उन स्थानों का निरीक्षण किया जाएगा और सही जगह पाए जाने पर संबंधित किसान का चालान काटा जाएगा। गांव के पटवारी, नंबरदार और कृषि विभाग की टीमों को भी तैनात किया गया है, जोकि अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेती है और धान के अवशेषों को आग के हवाले करने वाले किसानों का मौके पर ही चालान काटा जा रहा है।
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अब तक मिली 337 लोकेशन, 223 के काटे गए चालान
विभाग के पास इस सीजन में आगजनी की घटनाएं होने की 337 लोकेशन हरसेक से पहुंची है। जिसके बाद विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंच जांच की तो 337 में से 223 लोकेशन सही पाई गई है। इसके बाद विभाग की ओर से संबंधित किसानों के पांच लाख 75 हजार का जुर्माना लगाया गया है। टीमों की ओर से मौके पर पहुंचकर एकड़ अनुसार चालान काटा जाता है। इसके बाद नियम अनुसार उन किसानों का चालान भरवाया जाता है।
सांस, खांसी और जुकाम के मरीजों की बढ़ रही ओपीडी
धान की पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। वायु में उपस्थित धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होती है। प्रदूषित कणों के कारण खांसी, अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। प्रदूषित वायु के कारण फेफड़ों में सूजन, संक्रमण, निमोनिया और दिल की बीमारियों सहित अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सांस और दिल के मरीजों को इससे बचाव करना चाहिए। जरूरी होने पर ही लोग घर से बाहर निकले और मास्क व अन्य कपड़े से नाक को ढक कर रखें। - डॉ. बुधराम, उप सिविल सर्जन, सिरसा
धान के अवशेषों को आग के हवाले करने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हरसैक की मदद से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है और टीमें लगातार गांवों में निरीक्षण कर रही है। अब तक 223 किसानों के चालान काटे गए हैं और 5 लाख 57 हजार का जुर्माना लगाया गया है। - डॉ. बाबूलाल, कृषि उपनिदेशक, सिरसा