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रेट कम मिलने पर कपास उत्पादक किसान मायूस
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:43 PM IST
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रेट कम मिलने पर कपास उत्पादक किसान मायूस
धान उत्पादकों के चेहरों पर रौनक
जिले में दो लाख सात हजार 382 क्विंटल कपास की हुई आवक
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
हर बार की भांति इस बार जिले में प्रदेश के मुकाबले रिकॉर्ड तोड़ कॉटन के उत्पादन की संभावना है। जिले की विभिन्न मंडियों में कॉटन की आवक की जिस तरह से हो रही है उससे लगता है कि पिछले वर्ष का रिकार्ड टूट सकता है। हालांकि गत वर्ष से इस बार कपास के रेट 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल कम हैं। बावजूद इसके किसान स्टाक करने की बजाय मंडियों में ला रहे हैं। दूसरी और धान के रेट इस बार अधिक होने के कारण धान उत्पादकों के चेहरों पर रौनक है। गत वर्ष से इस बार धान के रेट 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल अधिक हैं। मार्केटिंग बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में दो लाख सात हजार 382 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है। जिले में करीब 1.92 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती की गई है।
सिरसा जिला कॉटन के उत्पादन में पूरे हरियाणा में पिछले तीन दशकों से पहले स्थान पर है। प्रदेश का 40 प्रतिशत और देश का पांच प्रतिशत कपास का उत्पादन जिले में होता है। इस बार पूरे हरियाणा में 6.55 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती की गई है, जिसमें करीब 32 प्रतिशत रकबा सिरसा जिले से है। इसी प्रकार इस बार जिले में धान की भी आवक जोरों पर है। अब तक करीब 70 हजार क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। इस बार सिरसा में 82 हजार हेक्टेयर में धान की काश्त की गई है। हालांकि कॉटन की तुलना में धान के दाम अच्छे होने के चलते इस बार नरमे की काश्त करने वाले किसान निराश भी हैं। इस बार कपास के रेट साढे़ चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है, जबकि गत वर्ष रेट 5800 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा था।
दरअसल सिरसा जिला देश में कपास उत्पादन में खास स्थान पिछले तीन दशकों से बनाए हुए है। इस बार जिला में कॉटन का अच्छा रकबा है। पिछले पांच सात से कॉटन का रकबा पौने दो लाख हेक्टेयर को पार नहीं कर रहा था। पिछले दो-तीन वर्ष से कॉटन के दाम छह हजार से 7500 रुपये था। ऐसे में इस खरीफ सीजन में किसानों ने कॉटन की ओर रुख किया। यही नतीजा रहा कि इस बार 1.92 लाख हेक्टेयर में कॉटन की काश्त की गई। पर नरमे के भाव ने किसानों के मनोबल को तोड़ दिया है। कॉटन के रेट इस समय करीब 4200 रुपये प्रति क्विंटल है। इस वजह से प्रति एकड़ किसानों को हजारों रुपये का घाटा झेलना पड़ रहा है। हालांकि कॉटन का उत्पादन भी इस बार अच्छा रहने की उम्मीद है। सिरसा मार्केट कमेटी के अंतर्गत आने वाली मंडियों और खरीद केंद्रों में शनिवार तक तक 89 हजार 958 क्विंटल, डबवाली में 23 हजार 412 क्विंटल, कालांवाली में 47 हजार 50 क्विंटल, ऐलनाबाद में 45 हजार 234 क्विंटल, रानियां में 1215 क्विंटल जबकि डिंग में 513 क्विंटल नरमे की आवक हो चुकी है। वहीं, इस बार जिला में धान की भी आवक ने जोर पकड़ लिया है। सिरसा में 29 हजार 886 क्विंटल, डबवाली में 16 हजार क्विंटल, कालांवाली में 5075 क्विंटल, ऐलनाबाद में 1430 क्विंटल और रानियां में 8185 क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। किसान बंशी लाल, सुभाष चंद्र, जगदीश व विनोद का कहना है कि हालांकि इस बार नरमे का उत्पादन अच्छा है, पर रेट कम है इस वजह से उन्हें काफी नुकसान हो रहा हैै।
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नहीं आने दी जाएगी किसी प्रकार की समस्या : नांदल
मार्केट कमेटी के सचिव परमजीत नांदल ने कहा कि कपास और धान की खरीद को लेकर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। कपास की खरीद लगभग प्राइवेट व्यापारी कर रहे हैं, क्योंकि कपास की बोली पर रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक लग रहा है। इसी प्रकार परमल धान की खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। विभाग द्वारा बोली करवाने और मंडी सुविधाएं देने के लिए पूरे प्रबंध किए गए हैं। डीएमई धर्मवीर भांभू ने कहा कि सभी मंडियों में कपास और धान की आवक जोर पक ड़ चुकी है उम्मीद है दिसंबर अंत तक आवक में तेजी रहेगी और इस बार भी सिरसा का कपास की आवक में पहला स्थान रहने की प्रबल संभावनाएं हैं।
रानियां में धान की आवक ने जोर पकड़ा
रानियां। मंडी में धान की आवक ने जोर पकड़ लिया है। सरकारी खरीद एजेंसियां भी धान की खरीद में पुरी तरह जुटी हुई है। खरीद एजेंसी हैफेड ने सोमवार को मार्केट कमेटी के चेयरमैन शीशपाल कंबोज, वाइस चेयरमैन संजय सिंगला और नपा वाइस चेयरमैन गोबिंद पोपली की मौजूदगी परमल धान की खरीद की। अब तक हैफेड 4000 क्विंटल धान की खरीद कर चुकी है।
मार्केट कमेटी के चेयरमैन शीशपाल व वाइस चेयरमैन संजय सिंगला ने कहा कि किसानों द्वारा मंडी में लाया जाने वाला धान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को धान बेचने के लिए किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान मंडी में धान साफ सुथरा व सुखा कर लाएं ताकि उन्हें धान बेचने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसान हितैषी सरकार है। उन्होंने कहा कि अगर मंडी में फसल बेचने संबंधी उन्होंने कोई परेशानी हो रही है तो वे उन्हें बताएं ताकि उनका समय पर समाधान किया जा सके। सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड के प्रबंधक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हैफेड अब तक रानियां मंडी में 4000 क्विंटल धान खरीद चुकी है। उन्होंने कहा कि किसान सरकार द्वारा निर्धारित नमी की मात्रा 17 प्रतिशत तक के अनुसार ही अपनी फसल मंडी में सुखाकर लेकर आएं। मार्केट कमेटी के सचिव निहाल सिंह कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष आज तक 20 प्रतिशत धान की आवक ज्यादा हुई है।
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धान उत्पादकों के चेहरों पर रौनक
जिले में दो लाख सात हजार 382 क्विंटल कपास की हुई आवक
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
हर बार की भांति इस बार जिले में प्रदेश के मुकाबले रिकॉर्ड तोड़ कॉटन के उत्पादन की संभावना है। जिले की विभिन्न मंडियों में कॉटन की आवक की जिस तरह से हो रही है उससे लगता है कि पिछले वर्ष का रिकार्ड टूट सकता है। हालांकि गत वर्ष से इस बार कपास के रेट 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल कम हैं। बावजूद इसके किसान स्टाक करने की बजाय मंडियों में ला रहे हैं। दूसरी और धान के रेट इस बार अधिक होने के कारण धान उत्पादकों के चेहरों पर रौनक है। गत वर्ष से इस बार धान के रेट 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल अधिक हैं। मार्केटिंग बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में दो लाख सात हजार 382 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है। जिले में करीब 1.92 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती की गई है।
सिरसा जिला कॉटन के उत्पादन में पूरे हरियाणा में पिछले तीन दशकों से पहले स्थान पर है। प्रदेश का 40 प्रतिशत और देश का पांच प्रतिशत कपास का उत्पादन जिले में होता है। इस बार पूरे हरियाणा में 6.55 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती की गई है, जिसमें करीब 32 प्रतिशत रकबा सिरसा जिले से है। इसी प्रकार इस बार जिले में धान की भी आवक जोरों पर है। अब तक करीब 70 हजार क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। इस बार सिरसा में 82 हजार हेक्टेयर में धान की काश्त की गई है। हालांकि कॉटन की तुलना में धान के दाम अच्छे होने के चलते इस बार नरमे की काश्त करने वाले किसान निराश भी हैं। इस बार कपास के रेट साढे़ चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है, जबकि गत वर्ष रेट 5800 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा था।
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दरअसल सिरसा जिला देश में कपास उत्पादन में खास स्थान पिछले तीन दशकों से बनाए हुए है। इस बार जिला में कॉटन का अच्छा रकबा है। पिछले पांच सात से कॉटन का रकबा पौने दो लाख हेक्टेयर को पार नहीं कर रहा था। पिछले दो-तीन वर्ष से कॉटन के दाम छह हजार से 7500 रुपये था। ऐसे में इस खरीफ सीजन में किसानों ने कॉटन की ओर रुख किया। यही नतीजा रहा कि इस बार 1.92 लाख हेक्टेयर में कॉटन की काश्त की गई। पर नरमे के भाव ने किसानों के मनोबल को तोड़ दिया है। कॉटन के रेट इस समय करीब 4200 रुपये प्रति क्विंटल है। इस वजह से प्रति एकड़ किसानों को हजारों रुपये का घाटा झेलना पड़ रहा है। हालांकि कॉटन का उत्पादन भी इस बार अच्छा रहने की उम्मीद है। सिरसा मार्केट कमेटी के अंतर्गत आने वाली मंडियों और खरीद केंद्रों में शनिवार तक तक 89 हजार 958 क्विंटल, डबवाली में 23 हजार 412 क्विंटल, कालांवाली में 47 हजार 50 क्विंटल, ऐलनाबाद में 45 हजार 234 क्विंटल, रानियां में 1215 क्विंटल जबकि डिंग में 513 क्विंटल नरमे की आवक हो चुकी है। वहीं, इस बार जिला में धान की भी आवक ने जोर पकड़ लिया है। सिरसा में 29 हजार 886 क्विंटल, डबवाली में 16 हजार क्विंटल, कालांवाली में 5075 क्विंटल, ऐलनाबाद में 1430 क्विंटल और रानियां में 8185 क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। किसान बंशी लाल, सुभाष चंद्र, जगदीश व विनोद का कहना है कि हालांकि इस बार नरमे का उत्पादन अच्छा है, पर रेट कम है इस वजह से उन्हें काफी नुकसान हो रहा हैै।
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मार्केट कमेटी के सचिव परमजीत नांदल ने कहा कि कपास और धान की खरीद को लेकर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। कपास की खरीद लगभग प्राइवेट व्यापारी कर रहे हैं, क्योंकि कपास की बोली पर रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक लग रहा है। इसी प्रकार परमल धान की खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। विभाग द्वारा बोली करवाने और मंडी सुविधाएं देने के लिए पूरे प्रबंध किए गए हैं। डीएमई धर्मवीर भांभू ने कहा कि सभी मंडियों में कपास और धान की आवक जोर पक ड़ चुकी है उम्मीद है दिसंबर अंत तक आवक में तेजी रहेगी और इस बार भी सिरसा का कपास की आवक में पहला स्थान रहने की प्रबल संभावनाएं हैं।
रानियां में धान की आवक ने जोर पकड़ा
रानियां। मंडी में धान की आवक ने जोर पकड़ लिया है। सरकारी खरीद एजेंसियां भी धान की खरीद में पुरी तरह जुटी हुई है। खरीद एजेंसी हैफेड ने सोमवार को मार्केट कमेटी के चेयरमैन शीशपाल कंबोज, वाइस चेयरमैन संजय सिंगला और नपा वाइस चेयरमैन गोबिंद पोपली की मौजूदगी परमल धान की खरीद की। अब तक हैफेड 4000 क्विंटल धान की खरीद कर चुकी है।
मार्केट कमेटी के चेयरमैन शीशपाल व वाइस चेयरमैन संजय सिंगला ने कहा कि किसानों द्वारा मंडी में लाया जाने वाला धान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को धान बेचने के लिए किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान मंडी में धान साफ सुथरा व सुखा कर लाएं ताकि उन्हें धान बेचने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसान हितैषी सरकार है। उन्होंने कहा कि अगर मंडी में फसल बेचने संबंधी उन्होंने कोई परेशानी हो रही है तो वे उन्हें बताएं ताकि उनका समय पर समाधान किया जा सके। सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड के प्रबंधक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हैफेड अब तक रानियां मंडी में 4000 क्विंटल धान खरीद चुकी है। उन्होंने कहा कि किसान सरकार द्वारा निर्धारित नमी की मात्रा 17 प्रतिशत तक के अनुसार ही अपनी फसल मंडी में सुखाकर लेकर आएं। मार्केट कमेटी के सचिव निहाल सिंह कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष आज तक 20 प्रतिशत धान की आवक ज्यादा हुई है।