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टीनएजर्स के शादी की जिद में उलझे परिजन और पुलिस
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:24 AM IST
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शादी पर अड़े नाबालिग जोड़े की प्रशासन ने रुकवाई शादी
सातवीं में पढ़ने वाले किशोर-किशोरी ने शादी न करवाने पर दी सुसाइड की धमकी
प्रशासनिक टीम ने दोनों को समझाया, परिजन बोले- बालिग होने पर करवाएंगे दोनों की शादी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सातवीं क्लास में पढ़ने वाले किशोर-किशोरी ने घर वालों की ही नहीं, बल्कि उनकी शादी रुकवाने पहुंची पुलिस की टीम को उलझा दिया। नाबालिग जोड़ा इस जिद पर अड़ा था कि अगर उनकी शादी नहीं करवाई तो वे दोनों नहर में कूदकर आत्महत्या कर लेंगे। ऐसे में बाल विवाह निषेध अधिकारी के सहायक और पुलिस टीम ने नाबालिग जोड़े को समझाया कि बालिग होने पर ही उनकी शादी हो सकती है। इसके बाद भी दोनों ने अपने परिजनों से वादा लिया कि बालिग होने पर उनकी एक-दूसरे से ही शादी करवाएंगे। ऐसे में इस बाल विवाह को रुकवाने में प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
मौजगढ़ क्षेत्र के स्कूल में कक्षा सातवीं में एक साथ पढ़ने वाले किशोर-किशोरी के बीच प्रेम संबंध हो गए। प्रेम संबंधों के चलते एक साल बाद दोनों ने शादी करने की ठान ली। दोनों ने अपने परिजनों को सारी बात बताते हुए शादी करवाने की जिद पकड़ ली। दोनों ने परिजनाें से बोल दिया कि अगर उन्होंने उनकी शादी नहीं करवाई तो वे दोनों नहर में कूदकर आत्महत्या कर लेंगे। बच्चों की जिद ने उनके परिजनों को झुकने पर मजबूर कर दिया। परिजनों ने भी सोचा कि तीन-चार साल बाद तो शादी करनी है, चलो अभी सही। घरवालों ने किशोर-किशोरी की सगाई करके 16 जून को शादी की तारीख तय कर दी। दोनों परिवारों में शुक्रवार को शहनाइयां बज रही थीं। घर में महिलाएं शादी के गीत गा रही थीं और छोटे बच्चे फिल्मी गीतों पर डांस करने में मशगूल थे।
इसी बीच दोपहर करीब 12 बजे बाल विवाह निषेध अधिकारी के सहायक तरुण कुमार के मोबाइल पर किसी शख्स ने सूचना दी कि मौजगढ़ क्षेत्र में बाल विवाह होने जा रहा है। फेरे एक बजे होने हैं। तरुण कुमार ने तुरंत डबवाली सदर पुलिस को इसकी सूचना दी। तरुण कुमार महिला पुलिस के साथ थाने में पहुंचा और यहां से टीम मौजगढ़ पहुंची। पुलिस ने शादी को रुकवा दिया। परिजनों से लड़का और लड़की का आयु प्रमाण पत्र मांगा गया। दस्तावेजों में दोनों की उम्र 15-15 साल पाई गई।
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साहब ! बच्चे शादी न करवाने पर आत्महत्या करने की देते हैं धमकी
महिला थाना इंचार्ज सीमा सोढ़ी का कहना है कि परिजनों से पूछा गया कि नाबालिगों की शादी क्यों करवाई जा रही है? परिजनों के जवाब ने हर किसी को हैरत में डाल दिया। अधिकारी तरुण कुमार से परिजनों ने कहा कि उन्हें पता है कि नाबालिग की शादी करवाना अपराध है, लेकिन उनके बच्चों ने शादी की जिद पकड़ रखी है और नहीं करवाने पर आत्महत्या की धमकी देते हैं, ऐसे में मां-बाप करे तो क्या करें? मामला पेचीदा होने के साथ किशोर और किशोरी को जागरूक करना भी जरूरी था, ताकि उन्हें सही और गलत का अहसास हो सके। लिहाजा दोनों को काफी देर तक समझाया गया कि लड़की की उम्र 18 और लड़के की उम्र 21 साल से पहले शादी लायक नहीं होती। कानून के हिसाब से ये गैरकानूनी है। इसके बाद दोनों के परिजनों ने प्रशासन को लिखित में दिया कि वे बच्चों के बालिग होने पर ही उनकी शादी करेंगे।
मम्मड़खेड़ा और नागोकी में भी रुकवाई शादी
प्रशासन की तरफ से गांव मम्मड़खेड़ा में दो नाबालिग भाइयों की शादी रुकवाई गई। दस्तावेजों में एक भाई की उम्र 17 साल और दूसरे की उम्र 18 साल मिली। वहीं, नागोकी में रुकवाई गई शादी में किशोरी की उम्र 16 साल और किशोर की उम्र 18 साल निकली। प्रशासन की तरफ से परिजनों से लिखित में आश्वासन लिया गया कि वे अपने बच्चों की शादी बालिग होने के उपरांत ही करवाएंगे। ऐसे में जागरूक लोगों के कारण तीन नाबालिग बालिका वधू बनने से बच गईं।
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सातवीं में पढ़ने वाले किशोर-किशोरी ने शादी न करवाने पर दी सुसाइड की धमकी
प्रशासनिक टीम ने दोनों को समझाया, परिजन बोले- बालिग होने पर करवाएंगे दोनों की शादी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सातवीं क्लास में पढ़ने वाले किशोर-किशोरी ने घर वालों की ही नहीं, बल्कि उनकी शादी रुकवाने पहुंची पुलिस की टीम को उलझा दिया। नाबालिग जोड़ा इस जिद पर अड़ा था कि अगर उनकी शादी नहीं करवाई तो वे दोनों नहर में कूदकर आत्महत्या कर लेंगे। ऐसे में बाल विवाह निषेध अधिकारी के सहायक और पुलिस टीम ने नाबालिग जोड़े को समझाया कि बालिग होने पर ही उनकी शादी हो सकती है। इसके बाद भी दोनों ने अपने परिजनों से वादा लिया कि बालिग होने पर उनकी एक-दूसरे से ही शादी करवाएंगे। ऐसे में इस बाल विवाह को रुकवाने में प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
मौजगढ़ क्षेत्र के स्कूल में कक्षा सातवीं में एक साथ पढ़ने वाले किशोर-किशोरी के बीच प्रेम संबंध हो गए। प्रेम संबंधों के चलते एक साल बाद दोनों ने शादी करने की ठान ली। दोनों ने अपने परिजनों को सारी बात बताते हुए शादी करवाने की जिद पकड़ ली। दोनों ने परिजनाें से बोल दिया कि अगर उन्होंने उनकी शादी नहीं करवाई तो वे दोनों नहर में कूदकर आत्महत्या कर लेंगे। बच्चों की जिद ने उनके परिजनों को झुकने पर मजबूर कर दिया। परिजनों ने भी सोचा कि तीन-चार साल बाद तो शादी करनी है, चलो अभी सही। घरवालों ने किशोर-किशोरी की सगाई करके 16 जून को शादी की तारीख तय कर दी। दोनों परिवारों में शुक्रवार को शहनाइयां बज रही थीं। घर में महिलाएं शादी के गीत गा रही थीं और छोटे बच्चे फिल्मी गीतों पर डांस करने में मशगूल थे।
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इसी बीच दोपहर करीब 12 बजे बाल विवाह निषेध अधिकारी के सहायक तरुण कुमार के मोबाइल पर किसी शख्स ने सूचना दी कि मौजगढ़ क्षेत्र में बाल विवाह होने जा रहा है। फेरे एक बजे होने हैं। तरुण कुमार ने तुरंत डबवाली सदर पुलिस को इसकी सूचना दी। तरुण कुमार महिला पुलिस के साथ थाने में पहुंचा और यहां से टीम मौजगढ़ पहुंची। पुलिस ने शादी को रुकवा दिया। परिजनों से लड़का और लड़की का आयु प्रमाण पत्र मांगा गया। दस्तावेजों में दोनों की उम्र 15-15 साल पाई गई।
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साहब ! बच्चे शादी न करवाने पर आत्महत्या करने की देते हैं धमकी
महिला थाना इंचार्ज सीमा सोढ़ी का कहना है कि परिजनों से पूछा गया कि नाबालिगों की शादी क्यों करवाई जा रही है? परिजनों के जवाब ने हर किसी को हैरत में डाल दिया। अधिकारी तरुण कुमार से परिजनों ने कहा कि उन्हें पता है कि नाबालिग की शादी करवाना अपराध है, लेकिन उनके बच्चों ने शादी की जिद पकड़ रखी है और नहीं करवाने पर आत्महत्या की धमकी देते हैं, ऐसे में मां-बाप करे तो क्या करें? मामला पेचीदा होने के साथ किशोर और किशोरी को जागरूक करना भी जरूरी था, ताकि उन्हें सही और गलत का अहसास हो सके। लिहाजा दोनों को काफी देर तक समझाया गया कि लड़की की उम्र 18 और लड़के की उम्र 21 साल से पहले शादी लायक नहीं होती। कानून के हिसाब से ये गैरकानूनी है। इसके बाद दोनों के परिजनों ने प्रशासन को लिखित में दिया कि वे बच्चों के बालिग होने पर ही उनकी शादी करेंगे।
मम्मड़खेड़ा और नागोकी में भी रुकवाई शादी
प्रशासन की तरफ से गांव मम्मड़खेड़ा में दो नाबालिग भाइयों की शादी रुकवाई गई। दस्तावेजों में एक भाई की उम्र 17 साल और दूसरे की उम्र 18 साल मिली। वहीं, नागोकी में रुकवाई गई शादी में किशोरी की उम्र 16 साल और किशोर की उम्र 18 साल निकली। प्रशासन की तरफ से परिजनों से लिखित में आश्वासन लिया गया कि वे अपने बच्चों की शादी बालिग होने के उपरांत ही करवाएंगे। ऐसे में जागरूक लोगों के कारण तीन नाबालिग बालिका वधू बनने से बच गईं।