{"_id":"5ca7a66abdec221445022bac","slug":"171554490986-sirsa-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिरसा के विजय वर्धन ने यूपीएससी में पाया 104 वां रैंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिरसा के विजय वर्धन ने यूपीएससी में पाया 104 वां रैंक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिरसा। सिरसा के माधोसिंघाना गांव के विजय वर्धन ने यूपीएससी की परीक्षा में आल इंडिया में 104 वां रैंक हासिल किया है। विजय वर्धन ने पांचवें प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की। इससे पहले वह तीसरे और चौथे प्रयास में इंटरव्यू में रह गए थे। जबकि पहले व दूसरे प्रयास में वे केवल प्राइमरी परीक्षा ही पास की थी। उन्होंने असफलता मिलने पर भी उम्मीद नहीं छोड़ी और पांचवें प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। विजव वर्धन गांव के ही सरकारी स्कूल में पांचवीं तक शिक्षा प्राप्त की।
विजय वर्धन ने बताया कि उनके पिता ओमप्रकाश गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक थे। माता इंदु शर्मा गृहिणी है। पांचवीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में की। इसके बाद पांचवीं से दसवीं तक की पढ़ाई उस स्कूल में की, जिसमें पिता अध्यापक थे। विजय वर्धन ने चौधरी देवीलाल पन्नीवाला मोटा इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग 2013,14 में की थी। विजय वर्धन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता, पिता और दोनों बड़ी बहनों व बड़े भाइयों को दिया। विजय वर्धन के बड़े भाई हर्ष वर्धन न्यूक्लियर साइंस सेंटर दिल्ली में असिस्टेंट इंजीनियर है। जबकि दूसरे बड़े भाई आईआईटी जोधुपर में नियुक्त है। विजय वर्धन ने बताया कि 104 वां रैंक आने पर भारतीय पुलिस सेवा सर्विस में मौका मिलने की पूरी उम्मीद है।
पांच साल तक कोचिंग सेंटर में नौकरी के साथ की पढ़ाई
2013,14 में इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई होने के बाद यूपीएससी की तैयारी के लिए विजय वर्धन दिल्ली चले गए। वहां पर एक कोचिंग संस्थान में अपना खर्च निकालने के लिए नौकरी की और साथ ही परीक्षा की तैयारी की। विजय वर्धन ने बताया कि पहले साल 13 से 14 घंटे तक पढ़ाई की। लेकिन बाद में सात से आठ घंटे तक ही पढ़ाई की। विजय वर्धन ने कहा कि मेरी सफलता उन लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है जो कि असफल होने के बाद उम्मीद छोड़ देते हैं। जीवन एक संघर्ष है। वे जल्द ही अपने गांव में आएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विजय वर्धन ने बताया कि उनके पिता ओमप्रकाश गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक थे। माता इंदु शर्मा गृहिणी है। पांचवीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में की। इसके बाद पांचवीं से दसवीं तक की पढ़ाई उस स्कूल में की, जिसमें पिता अध्यापक थे। विजय वर्धन ने चौधरी देवीलाल पन्नीवाला मोटा इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग 2013,14 में की थी। विजय वर्धन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता, पिता और दोनों बड़ी बहनों व बड़े भाइयों को दिया। विजय वर्धन के बड़े भाई हर्ष वर्धन न्यूक्लियर साइंस सेंटर दिल्ली में असिस्टेंट इंजीनियर है। जबकि दूसरे बड़े भाई आईआईटी जोधुपर में नियुक्त है। विजय वर्धन ने बताया कि 104 वां रैंक आने पर भारतीय पुलिस सेवा सर्विस में मौका मिलने की पूरी उम्मीद है।
विज्ञापन
पांच साल तक कोचिंग सेंटर में नौकरी के साथ की पढ़ाई
2013,14 में इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई होने के बाद यूपीएससी की तैयारी के लिए विजय वर्धन दिल्ली चले गए। वहां पर एक कोचिंग संस्थान में अपना खर्च निकालने के लिए नौकरी की और साथ ही परीक्षा की तैयारी की। विजय वर्धन ने बताया कि पहले साल 13 से 14 घंटे तक पढ़ाई की। लेकिन बाद में सात से आठ घंटे तक ही पढ़ाई की। विजय वर्धन ने कहा कि मेरी सफलता उन लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है जो कि असफल होने के बाद उम्मीद छोड़ देते हैं। जीवन एक संघर्ष है। वे जल्द ही अपने गांव में आएंगे।
विज्ञापन