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तीन बार टेंडर कॉल करने के बावजूद भी नहीं सिरे चढ़ रहा ड्रेन की सफाई व तटबंधों को मजबूत करने का काम
Updated Mon, 16 Jul 2018 02:16 AM IST
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सिंचाई विभाग को खुद करवानी होगी नहरों की सफाई, टेंडर मांगे
सिरसा। जिले की 200 नहरों के तटबंधों और सफाई अबकी बार समय पर सफाई नहीं हो पाएगी। प्रशासन ने मनरेगा के मजदूरों की कमी बताकर ड्रेन की सफाई और तटबंधों को मजबूत कराने का काम करवाने से मना कर दिया। अब सिंचाई विभाग खुद ही यह काम करवाएगा, लेकिन इसके लिए वह बार बार टेंडर कॉल कर रहा है, लेकिन तीसरे टेंडर काल में भी सभी नहरों के लिए आवेदन नहीं आए हैं। सिंचाई विभाग के अधीन रोडी डिवीजन, नहराना डिवीजन, घग्घर डिवीजन और सिरसा डिवीजन है। इन डिवीजन के तहत करीब 200 नहरें और माइनर है।
हर साल सिंचाई विभाग हर साल इन नहरों के तटबंधों को मजबूत करने व नहरों की सफाई का काम के लिए एस्टिमेट एडीसी कार्यालय के पास भेजता था। एडीसी कार्यालय मनरेगा के तहत यह काम करवाता था। अबकी बार सिंचाई विभाग ने करीब दस करोड़ से ज्यादा का एस्टिमेट बनाकर विभाग के पास भेजा था, लेकिन विभाग ने मनरेगा के लिए मजदूर उपलब्ध न होने की बात कहकर यह कार्य करवाने से मना कर दिया। एडीसी विभाग ने सिंचाई विभाग को अपने स्तर पर टेंडर कॉल करके कार्य करवाने के लिए कहा। सिंचाई विभाग की घग्घर डिवीजन ने तो 29 मई को पहला टेंडर जारी किया। दूसरी बार 6 जून को किया गया। पहले टेंडर में 42 नहरें और दूसरे में 40 नहरों की सफाई काम अलॉट हो पाया। अभी भी इस ब्रांच के 18 नहरों के काम बचे हुए है। अब तीसरा टेंडर कॉल किया गया है। अकेले इस डिवीजन का करीब पौने तीन करोड़ का एस्टिमेट था।
रोडी डिवीजन के करीब पांच करोड़ का था एस्टिमेट
सिंचाई विभाग की ओर से रोडी डिवीजन में करीब पांच करोड़ का एस्टिमेट से ड्रेन की सफाई व तटबंध मजबूत करने थे। लेकिन मनरेगा के तहत लेबर न मिलने पर ड्रेन की सफाई नहीं हुई। इस डिवीजन की भी तीसरे टेंडर कॉल में करीब चार नहरें बाकी है। ऐसी ही स्थिति सिरसा और नहराना माइनकर की भी है। चारों डिवीजन में करीब 200 ड्रेन है।
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टैंपरेरी राइस शूट (आरजी मोगी ) के लिए आवेदन आज से, अबकी बार देने होंगे एक एकड़ के तीन सौ रुपये
सिंचाई विभाग ने दक्षिण घग्घर कैनाल व उत्तरी घग्घर कैनाल पर लगने वाली टेंपरेरी राइस शूट मोगियों के आवेदन की अनुमति मुख्यालय से मिल गई है। सोमवार से किसानों से आवेदन लिए जाएंगे। लेकिन सिंचाई विभाग ने अबकी बार किसानों से प्रति एकड़ 200 रुपये वसूल करेंगी। पहले यह राशि प्रति एकड़ 200 रुपये थी। सरकार ने 100 रुपये की वृद्धि कर दी। 20 एकड़ पर एक आरजी मोगी की परमिशन मिलती है। ऐसे में अब एक किसान को 6000 रुपये आरजी मोगी से धान की फसल की सिंचाई के लिए अदा करने होंगे। जबकि पहले एक किसान को चार हजार रुपये अदा करने पड़ते थे। घग्घर नदी से निकलने वाली उत्तरी घग्घर कैनाल और दक्षिण घग्घर कैनाल से करीब 500 से ज्यादा किसान अपनी हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई करते हैं। ऐसे में इन किसानों को आरजी मोगियां लगाने के लिए अबकी बार ज्यादा पैसे अदा करने पड़ेंगे। सिंचाई विभाग ने आरजी मोगियों की अनुमति देने में देरी की है। पहले जून माह में आवेदन मांगे जाते थे। प्रगतिशील किसान जीएस मान का कहना है कि कभी आरजी मोगी लगाने के लिए 1980 में किसान 20 रुपये प्रोसिंग फीस दिया करता था। तब सादे कागज पर ही आवेदन किया जाता था। आज यह फीस प्रति एकड़ 300 हो गई। इसके अतिरिक्त आवेदन के लिए तहसीलदार से एनओसी और अन्य कागजात जरूरी कर दिए। घग्घर नदी का पानी धान उत्पादक खेतों के लिए फर्टिलाइजर है।
कोट्स
आरजी मोगी लगाने की अनुमति का पत्र मुख्यालय से आ गया है। वहीं इस बार मनरेगा के मजदूर न मिलने पर ड्रेन की सफाई में देरी
हुई है। फिर भी हमने टेंडर कॉल कर दी है। जल्द ही सभी टेंडर सिरे चढ़ जाएंगे।
राजेश कुमार, एसई, सिंचाई विभाग, सिरसा।
फोटो 24
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सिरसा। जिले की 200 नहरों के तटबंधों और सफाई अबकी बार समय पर सफाई नहीं हो पाएगी। प्रशासन ने मनरेगा के मजदूरों की कमी बताकर ड्रेन की सफाई और तटबंधों को मजबूत कराने का काम करवाने से मना कर दिया। अब सिंचाई विभाग खुद ही यह काम करवाएगा, लेकिन इसके लिए वह बार बार टेंडर कॉल कर रहा है, लेकिन तीसरे टेंडर काल में भी सभी नहरों के लिए आवेदन नहीं आए हैं। सिंचाई विभाग के अधीन रोडी डिवीजन, नहराना डिवीजन, घग्घर डिवीजन और सिरसा डिवीजन है। इन डिवीजन के तहत करीब 200 नहरें और माइनर है।
हर साल सिंचाई विभाग हर साल इन नहरों के तटबंधों को मजबूत करने व नहरों की सफाई का काम के लिए एस्टिमेट एडीसी कार्यालय के पास भेजता था। एडीसी कार्यालय मनरेगा के तहत यह काम करवाता था। अबकी बार सिंचाई विभाग ने करीब दस करोड़ से ज्यादा का एस्टिमेट बनाकर विभाग के पास भेजा था, लेकिन विभाग ने मनरेगा के लिए मजदूर उपलब्ध न होने की बात कहकर यह कार्य करवाने से मना कर दिया। एडीसी विभाग ने सिंचाई विभाग को अपने स्तर पर टेंडर कॉल करके कार्य करवाने के लिए कहा। सिंचाई विभाग की घग्घर डिवीजन ने तो 29 मई को पहला टेंडर जारी किया। दूसरी बार 6 जून को किया गया। पहले टेंडर में 42 नहरें और दूसरे में 40 नहरों की सफाई काम अलॉट हो पाया। अभी भी इस ब्रांच के 18 नहरों के काम बचे हुए है। अब तीसरा टेंडर कॉल किया गया है। अकेले इस डिवीजन का करीब पौने तीन करोड़ का एस्टिमेट था।
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रोडी डिवीजन के करीब पांच करोड़ का था एस्टिमेट
सिंचाई विभाग की ओर से रोडी डिवीजन में करीब पांच करोड़ का एस्टिमेट से ड्रेन की सफाई व तटबंध मजबूत करने थे। लेकिन मनरेगा के तहत लेबर न मिलने पर ड्रेन की सफाई नहीं हुई। इस डिवीजन की भी तीसरे टेंडर कॉल में करीब चार नहरें बाकी है। ऐसी ही स्थिति सिरसा और नहराना माइनकर की भी है। चारों डिवीजन में करीब 200 ड्रेन है।
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टैंपरेरी राइस शूट (आरजी मोगी ) के लिए आवेदन आज से, अबकी बार देने होंगे एक एकड़ के तीन सौ रुपये
सिंचाई विभाग ने दक्षिण घग्घर कैनाल व उत्तरी घग्घर कैनाल पर लगने वाली टेंपरेरी राइस शूट मोगियों के आवेदन की अनुमति मुख्यालय से मिल गई है। सोमवार से किसानों से आवेदन लिए जाएंगे। लेकिन सिंचाई विभाग ने अबकी बार किसानों से प्रति एकड़ 200 रुपये वसूल करेंगी। पहले यह राशि प्रति एकड़ 200 रुपये थी। सरकार ने 100 रुपये की वृद्धि कर दी। 20 एकड़ पर एक आरजी मोगी की परमिशन मिलती है। ऐसे में अब एक किसान को 6000 रुपये आरजी मोगी से धान की फसल की सिंचाई के लिए अदा करने होंगे। जबकि पहले एक किसान को चार हजार रुपये अदा करने पड़ते थे। घग्घर नदी से निकलने वाली उत्तरी घग्घर कैनाल और दक्षिण घग्घर कैनाल से करीब 500 से ज्यादा किसान अपनी हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई करते हैं। ऐसे में इन किसानों को आरजी मोगियां लगाने के लिए अबकी बार ज्यादा पैसे अदा करने पड़ेंगे। सिंचाई विभाग ने आरजी मोगियों की अनुमति देने में देरी की है। पहले जून माह में आवेदन मांगे जाते थे। प्रगतिशील किसान जीएस मान का कहना है कि कभी आरजी मोगी लगाने के लिए 1980 में किसान 20 रुपये प्रोसिंग फीस दिया करता था। तब सादे कागज पर ही आवेदन किया जाता था। आज यह फीस प्रति एकड़ 300 हो गई। इसके अतिरिक्त आवेदन के लिए तहसीलदार से एनओसी और अन्य कागजात जरूरी कर दिए। घग्घर नदी का पानी धान उत्पादक खेतों के लिए फर्टिलाइजर है।
कोट्स
आरजी मोगी लगाने की अनुमति का पत्र मुख्यालय से आ गया है। वहीं इस बार मनरेगा के मजदूर न मिलने पर ड्रेन की सफाई में देरी
हुई है। फिर भी हमने टेंडर कॉल कर दी है। जल्द ही सभी टेंडर सिरे चढ़ जाएंगे।
राजेश कुमार, एसई, सिंचाई विभाग, सिरसा।
फोटो 24