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सिंचाई विभाग ने कुताना माइनर से उखाड़ी मोगियां
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सिरसा। कुताना माइनर में सिंचाई के लिए बिछाई गई पाइप लाइन को सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने रविवार को उखाड़ दिया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट आरके फुलिया की अध्यक्षता और पुलिस की उपस्थिति में ये अभियान चलाया। इस दौरान करीब 39 मोगियां उखाड़ दी गई। बता दे कि इससे पहले भी कुताना माइनर से करीब 6 महीने पहले मोगियों को उखाड़ा गया था। लेकिन तब किसानों ने मोगियों का साइज 6 इंच करने का आश्वासन दिया था।
जानकारी के अनुसार किसानों ने मोगियों पर दस से 12 इंच के साइज लगाए हुए थे। जबकि पहले सिंचाई विभाग ने उन्हें 6 इंच साइज लगाने के निर्देश दिए थे। सिंचाई विभाग ने शाम तक जेसीबी की सहायता से करीब 39 मोगियों को उखाड़ दिया। गांव चक्का के पास से शुरू होने वाली कुताना माइनर करीब दस गांवों की हजारों एकड़ भूमि से होकर निकलती हैं। इसमें घग्गर नदी से फ्लड़ी पानी आता है। पानी आने के बाद कुताना गांव से पहले यह माइनर जमाल में से होकर गुजरती है। इस माइनर से लगभग दस गांवों के किसान अपनी फसलों को सिंचाई करते हैं। गांव माधोसिंघाना में बनी कमेटी के प्रधान रमेश कुमार बिरड़ा ने बताया कि केवल माधोसिंघाना गांव के ही किसानों की पाइपें क्यों उखाड़ी जा रही है। सभी किसानों के खेतों में पाइपों का आकार छह इंच किया हुआ है। इसके बावजूद भी प्रशासन ने उनकी पाइपें उखाड़ दी। इसमें अगर कोई किसान अगर सरकार द्वारा बनाई गई पाइप की दूरी पर लगाएगा तो उसे कोई दूसरा किसान अपने खेत से पानी क्यों उठाने देगा। प्रधान रमेश ने बताया कि प्रशासन तो पहुंच जाता है पुलिस फोर्स लेकर बस किसान की पाइपें उखाड़ दो। यह कोई नहीं देखता की उस किसान को क्या परेशानी होगी तथा कैसे वह पानी अपने खेतों में लगाएगा। जब धान लगाने का समय है और अब किसानों की पाइपें उखाड़ दी।
ये हैं मामला
जमाल गांव के किसानों ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उनके गांव तक पानी नहीं पहुंच रहा। कोर्ट ने सिंचाई विभाग को माइनर के अंतिम छोर पर बसे गांवों तक पानी पहुंचने के निर्देश दिए थे। इसी को लेकर सिंचाई विभाग ने फरवरी में माइनर में डाली गई पाइप लाइन को उखाड़ फेंका था। सिंचाई विभाग ने किसानों को बताया कि वह एक निर्धारित क्षेत्र जो सरकार के नक्शे के द्वारा तय है, वहीं पर पाइप लाइन डाली जाएगी। इसका आकार छह इंच का होना अनिवार्य है। फरवरी में गांव की पाइपें उखाड़ने के बाद करीब 6 गांवों की पंचायतों ने फैसला किया था कि कोई भी गांव बोरवेल में पानी नहीं डालेगा तथा अपनी पाइप का आकर भी छह इंच तक रखेगा। अगर कोई भी किसान ऐसा करता है तो उसके खेत से पाइप को जब्त कर लिया जाएगा तथा उसको वहां से पानी नहीं दिया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार किसानों ने मोगियों पर दस से 12 इंच के साइज लगाए हुए थे। जबकि पहले सिंचाई विभाग ने उन्हें 6 इंच साइज लगाने के निर्देश दिए थे। सिंचाई विभाग ने शाम तक जेसीबी की सहायता से करीब 39 मोगियों को उखाड़ दिया। गांव चक्का के पास से शुरू होने वाली कुताना माइनर करीब दस गांवों की हजारों एकड़ भूमि से होकर निकलती हैं। इसमें घग्गर नदी से फ्लड़ी पानी आता है। पानी आने के बाद कुताना गांव से पहले यह माइनर जमाल में से होकर गुजरती है। इस माइनर से लगभग दस गांवों के किसान अपनी फसलों को सिंचाई करते हैं। गांव माधोसिंघाना में बनी कमेटी के प्रधान रमेश कुमार बिरड़ा ने बताया कि केवल माधोसिंघाना गांव के ही किसानों की पाइपें क्यों उखाड़ी जा रही है। सभी किसानों के खेतों में पाइपों का आकार छह इंच किया हुआ है। इसके बावजूद भी प्रशासन ने उनकी पाइपें उखाड़ दी। इसमें अगर कोई किसान अगर सरकार द्वारा बनाई गई पाइप की दूरी पर लगाएगा तो उसे कोई दूसरा किसान अपने खेत से पानी क्यों उठाने देगा। प्रधान रमेश ने बताया कि प्रशासन तो पहुंच जाता है पुलिस फोर्स लेकर बस किसान की पाइपें उखाड़ दो। यह कोई नहीं देखता की उस किसान को क्या परेशानी होगी तथा कैसे वह पानी अपने खेतों में लगाएगा। जब धान लगाने का समय है और अब किसानों की पाइपें उखाड़ दी।
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ये हैं मामला
जमाल गांव के किसानों ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उनके गांव तक पानी नहीं पहुंच रहा। कोर्ट ने सिंचाई विभाग को माइनर के अंतिम छोर पर बसे गांवों तक पानी पहुंचने के निर्देश दिए थे। इसी को लेकर सिंचाई विभाग ने फरवरी में माइनर में डाली गई पाइप लाइन को उखाड़ फेंका था। सिंचाई विभाग ने किसानों को बताया कि वह एक निर्धारित क्षेत्र जो सरकार के नक्शे के द्वारा तय है, वहीं पर पाइप लाइन डाली जाएगी। इसका आकार छह इंच का होना अनिवार्य है। फरवरी में गांव की पाइपें उखाड़ने के बाद करीब 6 गांवों की पंचायतों ने फैसला किया था कि कोई भी गांव बोरवेल में पानी नहीं डालेगा तथा अपनी पाइप का आकर भी छह इंच तक रखेगा। अगर कोई भी किसान ऐसा करता है तो उसके खेत से पाइप को जब्त कर लिया जाएगा तथा उसको वहां से पानी नहीं दिया जाएगा।
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