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नामधारी संगत का ऐलान, अयोध्या में राममंदिर बनाएंगे
Updated Thu, 05 Apr 2018 01:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
विश्व नामधारी संगत ने सतगुरु दलीप सिंह की रहनुमाई में बुधवार को आयोजित हिंदू-सिख एकता को समर्पित राम-नवम पर्व में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ संचालक डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में नामधारी संगत ने फै सला किया कि अयोध्या में वे ही राममंदिर बनाएंगे जो उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। पूरे पंडाल मौजूद साध संगत और देश भर से आए संतों ने जय श्रीराम का उद्घोष किया।
हिंदू-सिख, एकता को समर्पित रामनवमी पर्व बुधवार को नई अनाजमंडी परिसर में विश्व नामधारी संगत ने सतगुरु दलीप सिंह की रहनुमाई में हिंदू-सिख भाइयों के साथ मिल कर मनाया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई। पहली बार हिंदू-सिख का आपसी प्रेम हिंदू-सिख एकता का अलौकिक नजारा पेश कर रहा था। इस मौके महंत रमेश्वर दास, स्वामी अदित्यात्मानंद पुरी, स्वामी अतुल कृष्ण, बाबा यादविंद्र जीत सिंह, बाबा हरचरणदा, बाबा ब्रह्मदास, महंत राजेंद्र गिरी सहित अनेक साधु संत मंच पर मौजूद थे। सतगुरु दलीप सिंह की रहनुमाई में नामधारी समाज इस तरह के प्रकाश उत्सव हिंदू-सिख एकता के लिए लगातार करवा रहा है। इस मौके सतगुरु दलीप सिंह ने कहा गुरबाणी में ‘‘श्री रामचंद जिस रूप न रेखिया। मारू मुहल्ला 5’’ भगवान श्री राम चंद्र को प्रभु अवतार और त्रेते के सतगुरु लिखा है, जिसके कारण वह हमारे पूजनीय हैं। वाणी में प्रभु अवतार लिखे होने के कारण हम रामनवमी मनाते हैं। रामनवमी भूमि अयोध्या में राम मंदिर बनाना हमारा अधिकार है, हम नामधारी अग्रणी होकर मंदिर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हर केसधारी सिख नहीं और हर मौना हिंदू नहीं। केस के बिना ही सिख हो सकता है। अमृतधारी खालसा होने के लिए केस रखने जरूरी है। अपनी इस बात को सिद्ध करने के लिए उन्होंने एक पिता पुत्र को खडे़ कराकर संगत को दिखाया। इस मौके नामधारी सतगुरु दलीप सिंह के विशेष आमंत्रण पर सिरसा पहुंचे।
आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि इस तरह राम-नवमी मनाना सबको जोड़ने वाली बात है, जिसके कारण यहां पर शांति और सुख है। यह आज के समय की जरूरत है। उन्होंने इस एकता का पूरक रामनवमी के मौके उन्हें निमंत्रण देने के लिए सतगुरु का धन्यवाद किया। हमें सभी को मिलकर रहना और चलना चाहिए, यह ही हमारा धर्म है। हमारा धर्म हमें जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। इसके साथ ही हमें अपनी आत्म सुरक्षा और अन्याय को खत्म करने के लिए बलशाली होना चाहिए। हमें अपना बल जोड़ने के लिए लगाना चाहिए, न कि तोड़ने के लिए। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है, क्योंकि सुख शांति और हर समस्या का समाधान भारत में ही मौजूद है। उन्होेंने कहा कि विश्व में नई सुख, शांति देने का रास्ता भारत ही दे सकता है। उन्होंने कहा कि हमें एक दूसरे के अच्छे का सम्मान करना चाहिए सभी के रास्ते अलग-अलग हो सकते है पर मंजिल एक हैै। उन्होंने कहा कि अतिवादी हमारे लोग नहीं हो सकते। धर्म को कैसे धारण किया जाता है यह सब कुछ राम ने बताया।
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इस मौके पर विशेष तौर पर पंजाबी सूूफी गायक हंस राज हंस ने भी हाजिरी भरते हुए बहुत ही सुरीली आवाज में भजन गाकर सभी संगताें मंत्रमुग्ध किया। इससे पूर्व हवन का आयोजन किया गया। एक ओर साधु संतों ने हवन में आहुतिया डाली तो दूसरी ओर महिला श्रद्धालुओं। समापन अवसर पर सतगुरु दलीप सिंह ने डॉ. मोहन भागवत को श्री दरबार का चित्र और तुलसी का पौैधा भेंट किया। बाद में साधु संतों से बातचीत की। इस मौके पर सीडीएलयू के कुलपति प्रो विजय कायत, चेेयरमैन जगदीश चेापड़ा, गुरुदेव सिंह राही, रेणु शर्मा, डॉ. वेद बेनीवाल, प्रेम रातुसरिया बजरंग लाल, देवी प्रसाद, हेमराज, विवेका नंद, रमेश गुप्ता, पवन कौशिक, सुरेंद्र मल्होत्रा, अविनाश राय आदि मौजूद रहे। अंत में देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया और समाज की उन्नति के लिए अरदास की गई।
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सिरसा।
विश्व नामधारी संगत ने सतगुरु दलीप सिंह की रहनुमाई में बुधवार को आयोजित हिंदू-सिख एकता को समर्पित राम-नवम पर्व में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ संचालक डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में नामधारी संगत ने फै सला किया कि अयोध्या में वे ही राममंदिर बनाएंगे जो उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। पूरे पंडाल मौजूद साध संगत और देश भर से आए संतों ने जय श्रीराम का उद्घोष किया।
हिंदू-सिख, एकता को समर्पित रामनवमी पर्व बुधवार को नई अनाजमंडी परिसर में विश्व नामधारी संगत ने सतगुरु दलीप सिंह की रहनुमाई में हिंदू-सिख भाइयों के साथ मिल कर मनाया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई। पहली बार हिंदू-सिख का आपसी प्रेम हिंदू-सिख एकता का अलौकिक नजारा पेश कर रहा था। इस मौके महंत रमेश्वर दास, स्वामी अदित्यात्मानंद पुरी, स्वामी अतुल कृष्ण, बाबा यादविंद्र जीत सिंह, बाबा हरचरणदा, बाबा ब्रह्मदास, महंत राजेंद्र गिरी सहित अनेक साधु संत मंच पर मौजूद थे। सतगुरु दलीप सिंह की रहनुमाई में नामधारी समाज इस तरह के प्रकाश उत्सव हिंदू-सिख एकता के लिए लगातार करवा रहा है। इस मौके सतगुरु दलीप सिंह ने कहा गुरबाणी में ‘‘श्री रामचंद जिस रूप न रेखिया। मारू मुहल्ला 5’’ भगवान श्री राम चंद्र को प्रभु अवतार और त्रेते के सतगुरु लिखा है, जिसके कारण वह हमारे पूजनीय हैं। वाणी में प्रभु अवतार लिखे होने के कारण हम रामनवमी मनाते हैं। रामनवमी भूमि अयोध्या में राम मंदिर बनाना हमारा अधिकार है, हम नामधारी अग्रणी होकर मंदिर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हर केसधारी सिख नहीं और हर मौना हिंदू नहीं। केस के बिना ही सिख हो सकता है। अमृतधारी खालसा होने के लिए केस रखने जरूरी है। अपनी इस बात को सिद्ध करने के लिए उन्होंने एक पिता पुत्र को खडे़ कराकर संगत को दिखाया। इस मौके नामधारी सतगुरु दलीप सिंह के विशेष आमंत्रण पर सिरसा पहुंचे।
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आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि इस तरह राम-नवमी मनाना सबको जोड़ने वाली बात है, जिसके कारण यहां पर शांति और सुख है। यह आज के समय की जरूरत है। उन्होंने इस एकता का पूरक रामनवमी के मौके उन्हें निमंत्रण देने के लिए सतगुरु का धन्यवाद किया। हमें सभी को मिलकर रहना और चलना चाहिए, यह ही हमारा धर्म है। हमारा धर्म हमें जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। इसके साथ ही हमें अपनी आत्म सुरक्षा और अन्याय को खत्म करने के लिए बलशाली होना चाहिए। हमें अपना बल जोड़ने के लिए लगाना चाहिए, न कि तोड़ने के लिए। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है, क्योंकि सुख शांति और हर समस्या का समाधान भारत में ही मौजूद है। उन्होेंने कहा कि विश्व में नई सुख, शांति देने का रास्ता भारत ही दे सकता है। उन्होंने कहा कि हमें एक दूसरे के अच्छे का सम्मान करना चाहिए सभी के रास्ते अलग-अलग हो सकते है पर मंजिल एक हैै। उन्होंने कहा कि अतिवादी हमारे लोग नहीं हो सकते। धर्म को कैसे धारण किया जाता है यह सब कुछ राम ने बताया।
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इस मौके पर विशेष तौर पर पंजाबी सूूफी गायक हंस राज हंस ने भी हाजिरी भरते हुए बहुत ही सुरीली आवाज में भजन गाकर सभी संगताें मंत्रमुग्ध किया। इससे पूर्व हवन का आयोजन किया गया। एक ओर साधु संतों ने हवन में आहुतिया डाली तो दूसरी ओर महिला श्रद्धालुओं। समापन अवसर पर सतगुरु दलीप सिंह ने डॉ. मोहन भागवत को श्री दरबार का चित्र और तुलसी का पौैधा भेंट किया। बाद में साधु संतों से बातचीत की। इस मौके पर सीडीएलयू के कुलपति प्रो विजय कायत, चेेयरमैन जगदीश चेापड़ा, गुरुदेव सिंह राही, रेणु शर्मा, डॉ. वेद बेनीवाल, प्रेम रातुसरिया बजरंग लाल, देवी प्रसाद, हेमराज, विवेका नंद, रमेश गुप्ता, पवन कौशिक, सुरेंद्र मल्होत्रा, अविनाश राय आदि मौजूद रहे। अंत में देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया और समाज की उन्नति के लिए अरदास की गई।