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मारूति की नौकरी छोड़ रहे बेटे को मां ने कहा कि आईएएस न बना तो क्या करेगा। सचिन बोला मां खेती कर लूंगा, पर तैयारी जरूर करूंगा
Updated Sun, 29 Apr 2018 12:29 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
शहर के भादरा बाजार के रहने वाले सचिन गुप्ता (26) ने आईएएस की परीक्षा में पूरे देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। हालांकि उसकी इस सफलता पर पहले परिवार को विश्वास नहीं हुआ। सचिन ने सिलेक्शन होते ही पहला फोन शुक्रवार शाम 6 बजे अपने पिता सुदर्शन गुप्ता को किया और कहा पापा रिजल्ट आ गया। पापा ने पूछा अच्छा कितना रैंक आया। सचिन ने कहा तीसरा। यह सुन सुदर्शन गुप्ता आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास था कि बेटा आईएएस बन जाएगा और 40 से 50 के बीच रैंक प्राप्त करेगा। लेकिन यह नहीं सोचा था कि तीसरा रैंक लेकर आएगा।
बेटे की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए मां सुषमा गुप्ता ने बताया कि सचिन जब आईएएस की परीक्षा के लिए मारुति कंपनी की नौकरी छोड़ रहा था तो मैंने कहा कि बेटा साढे़ 6 लाख रुपए का पैकेज है। यदि आईएएस नहीं बना तो क्या करेगा। तब सचिन ने जवाब दिया कि मां आईएएस न बना तो खेती कर किसान बन जाऊंगा। दो साल तक नौकरी करने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी। सुदर्शन गुप्ता और सुषमा गुप्ता ने बताया कि सचिन आर्मी ज्वाइन करना चाहता था। इसलिए उसने दो बार एसएससी का भी पेपर दिया। लेकि न दोनों बार फिजिकल में वह रह गया। तब उसने आईएएस की तैयारी शुरू की। हालांकि 2017 में उसका 575वां रैंक आया था और वह गुड़गांव में कॉर्पोरेट मंत्रालय में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर है।
परिजनों ने बताया कि वह दिल्ली में परीक्षा की तैयारी कर रहा था तो हम उसके पास गए। तब वह एक छोटे से कमरे में रहता था। हमने कहा कि एसी या कूलर लगवा देते हैं, तो उसने मना कर दिया। कहा कि नींद आया करेगी। मां ने कहा कि बेटा मैं तेरे पास ही रूक जाती हूं। लेकिन सचिन ने मना कर दिया कि फिर मुझे आपकी चिंता ही लगी रहेगी। सचिन ने तीन महीने छुट्टी लेकर बैंगलोर में तैयारी की। उसके कोचिंग देने वाले अध्यापक को विश्वास था कि वह टॉप टेन में आएगा।
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परिजनों से बोला-लड़की आपकी पसंद की होगी और समय मेरी पसंद का
परिजन जब भी उसकी शादी की बात करते तो वह कहता कि लड़की आपकी पसंद की होगी, लेकिन समय मेरी पसंद का होगा। परिजनों ने बताया कि महीने में जब भी वह घर आता तो मंगाला स्थित फॉर्म हाऊस पर खेती करवाने के लिए चला जाता।
बड़ी बहन है प्रेरणास्रोत
परिजनों का कहना है कि आईएएस बनने की प्रेरणा उसे अपनी बड़ी बहन नीतू गुप्ता से मिली। नीतू गुप्ता ने विश्वविद्यालय में बीए प्रथम और द्वितीय वर्ष में टॉप किया था। वह अपनी बहन से 12 साल छोटा है। परिवार में सचिन के दो बड़े भाई रविंद्र और जतिंद्र गुप्ता है जबकि तीन बहनें हैं। सचिन सबसे छोटा है। सचिन के पिता सुदर्शन गुप्ता मूल रूप से बठिंडा के रहने वाले हैं। लेकिन पंजाब में आतंकवाद के दौरान 1992 में वे सिरसा के मंगाला गांव में आकर रहने लगे। तब सचिन कुछ ही महीनाें का था। मौजूदा समय में उनके पिता शहर के भादरा बाजार में ट्रेडिंग का काम करते हैं। सचिन गुप्ता ने प्रारंभिक शिक्षा शहर के डीएवी स्कूल और बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग थापर विश्वविद्यालय पटियाला से 2013 में की। 13 जुलाई 2013 से 2015 तक मारुति कंपनी गुड़गांव में नौकरी की।
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सिरसा।
शहर के भादरा बाजार के रहने वाले सचिन गुप्ता (26) ने आईएएस की परीक्षा में पूरे देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। हालांकि उसकी इस सफलता पर पहले परिवार को विश्वास नहीं हुआ। सचिन ने सिलेक्शन होते ही पहला फोन शुक्रवार शाम 6 बजे अपने पिता सुदर्शन गुप्ता को किया और कहा पापा रिजल्ट आ गया। पापा ने पूछा अच्छा कितना रैंक आया। सचिन ने कहा तीसरा। यह सुन सुदर्शन गुप्ता आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास था कि बेटा आईएएस बन जाएगा और 40 से 50 के बीच रैंक प्राप्त करेगा। लेकिन यह नहीं सोचा था कि तीसरा रैंक लेकर आएगा।
बेटे की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए मां सुषमा गुप्ता ने बताया कि सचिन जब आईएएस की परीक्षा के लिए मारुति कंपनी की नौकरी छोड़ रहा था तो मैंने कहा कि बेटा साढे़ 6 लाख रुपए का पैकेज है। यदि आईएएस नहीं बना तो क्या करेगा। तब सचिन ने जवाब दिया कि मां आईएएस न बना तो खेती कर किसान बन जाऊंगा। दो साल तक नौकरी करने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी। सुदर्शन गुप्ता और सुषमा गुप्ता ने बताया कि सचिन आर्मी ज्वाइन करना चाहता था। इसलिए उसने दो बार एसएससी का भी पेपर दिया। लेकि न दोनों बार फिजिकल में वह रह गया। तब उसने आईएएस की तैयारी शुरू की। हालांकि 2017 में उसका 575वां रैंक आया था और वह गुड़गांव में कॉर्पोरेट मंत्रालय में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर है।
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परिजनों ने बताया कि वह दिल्ली में परीक्षा की तैयारी कर रहा था तो हम उसके पास गए। तब वह एक छोटे से कमरे में रहता था। हमने कहा कि एसी या कूलर लगवा देते हैं, तो उसने मना कर दिया। कहा कि नींद आया करेगी। मां ने कहा कि बेटा मैं तेरे पास ही रूक जाती हूं। लेकिन सचिन ने मना कर दिया कि फिर मुझे आपकी चिंता ही लगी रहेगी। सचिन ने तीन महीने छुट्टी लेकर बैंगलोर में तैयारी की। उसके कोचिंग देने वाले अध्यापक को विश्वास था कि वह टॉप टेन में आएगा।
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परिजनों से बोला-लड़की आपकी पसंद की होगी और समय मेरी पसंद का
परिजन जब भी उसकी शादी की बात करते तो वह कहता कि लड़की आपकी पसंद की होगी, लेकिन समय मेरी पसंद का होगा। परिजनों ने बताया कि महीने में जब भी वह घर आता तो मंगाला स्थित फॉर्म हाऊस पर खेती करवाने के लिए चला जाता।
बड़ी बहन है प्रेरणास्रोत
परिजनों का कहना है कि आईएएस बनने की प्रेरणा उसे अपनी बड़ी बहन नीतू गुप्ता से मिली। नीतू गुप्ता ने विश्वविद्यालय में बीए प्रथम और द्वितीय वर्ष में टॉप किया था। वह अपनी बहन से 12 साल छोटा है। परिवार में सचिन के दो बड़े भाई रविंद्र और जतिंद्र गुप्ता है जबकि तीन बहनें हैं। सचिन सबसे छोटा है। सचिन के पिता सुदर्शन गुप्ता मूल रूप से बठिंडा के रहने वाले हैं। लेकिन पंजाब में आतंकवाद के दौरान 1992 में वे सिरसा के मंगाला गांव में आकर रहने लगे। तब सचिन कुछ ही महीनाें का था। मौजूदा समय में उनके पिता शहर के भादरा बाजार में ट्रेडिंग का काम करते हैं। सचिन गुप्ता ने प्रारंभिक शिक्षा शहर के डीएवी स्कूल और बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग थापर विश्वविद्यालय पटियाला से 2013 में की। 13 जुलाई 2013 से 2015 तक मारुति कंपनी गुड़गांव में नौकरी की।