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सिरसा हिंसा मामला: प्रोडक्शन वारंट की अर्जी से पुलिस ने पीछे खींचे हाथ
Updated Sat, 20 Jan 2018 01:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
साध्वी यौन शोषण मामले डेरा प्रमुख को दोषी करार देने के बाद सिरसा में हुई हिंसा मामले में सिरसा पुलिस की हनीप्रीत इंसा और डेरा मुखी के प्रोेडक्शन वारंट की अर्जी पर शुक्रवार कोर्ट फैसला सुनाती इससे पहले ही पुलिस ने अपनी अर्जी वापस ले ली। पुलिस ने अदालत से कहा कि ‘वो अपनी अर्जी वापस लेते हैं जरूरत पड़ी तो फिर दोबारा से अर्जी लगाई जाएगी’। एकदम से बदले इस घटनाक्रम के पीछे पुलिस अधिकारियों में आपसी तालमेल की कमी और हर कार्रवाई गुप्त रखने के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस की ओर से अदालत में दायर की गई अर्जी की खबर समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को पुलिस अधिकारी आपस में ही जवाब तलबी करते रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार सीनियर अधिकारी शहर थाना पुलिस की प्रोडक्शन अर्जी से खुद को अजान बताते रहे। जांच अधिकारी ने अपने तौर पर सीजेएम कोर्ट में प्रोडक्शन की अर्जी दायर की। आपसी तालमेल की कमी के बाद शहर थाना पुलिस ने सीजेएम कोर्ट से अपनी अर्जी यह करते हुए वापस ले ली कि ‘जरूरत पड़ी तो दोबारा दायर करेंगे’। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच टीम के सीनियर ऑफिसर ये चाहते हैं कि हिंसा मामले में डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम और हनीप्रीत इंसां को जांच में शामिल करते हुए जेल में ही पूछताछ की जाए। प्रोडक्शन अर्जी वापस लेने के सवाल पर कोई पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
गौरतलब है कि 25 अगस्त 2017 की दोपहर पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने जैसे ही साध्वी रेप मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया तो सिरसा में हिंसा भड़क गई। हजारों डेरा अनुयायी हाथों में हथियार व पेट्रोल बम लेकर सिरसा शहर की ओर बढ़ने लगे। डेरा अनुयायियों ने गांव बेगू में बिजली घर को आग लगाने के बाद सिरसा के वीटा मिल्क प्लांट में पेट्रोल बम फेंककर आग के हवाले कर दिया। इसके बाद जगदम्बे पेपर मील के पास डेरा अनुयायियों ने सुरक्षा बलों पर हमला करते हुए उनपर फायरिंग की। जवाब में दंगा विरोधी कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने फायरिंग की। दंगा विरोधी कार्रवाई में छह उपद्रवियों की गोली लगने से मौत हो गई। हिंसा मामले में सिरसा पुलिस 100 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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वीसी के जरिए होगी पेशी
हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों की पेशी अब वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से अदालत में होगी। सुरक्षा कारणों और विभिन्न जेलों में कैद आरोपियों को अदालत में लाने और वापस जेल ले जाने का झंझट काफी होता है। 15 जनवरी को अदालत में 13 आरोपियों की पेशी वीसी के माध्यम से अदालत में हुई थी। अब 25 जनवरी को कुछ मुख्य आरोपियों की वीडियो कॉफ्रेसिंग के जरिए होगी।
पीए राकेश और सिपाही कर्मजीत पहुंचे जेल
हनीप्रीत के पीए राकेश और पंजाब पुलिस के सिपाही कर्मजीत की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को शुक्रवार दोपहर अदालत में पेश किया। पुलिस ने दोनों को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया है। हिंसा मामले में सिरसा पुलिस दोनों आरोपियों को अंबाला जेल से प्रोडक्शन वारंट पर तीन दिन पहले सिरसा लाई थी। अदालत ने राकेश और कर्मजीत सिंह को तीन दिन के पुलिस रिमांड में भेज दिया। रिमांड अवधि के दौरान पुलिस दोनों को डेरा सच्चा सौदा लेकर गई और निशानदेही करवाई।
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सिरसा।
साध्वी यौन शोषण मामले डेरा प्रमुख को दोषी करार देने के बाद सिरसा में हुई हिंसा मामले में सिरसा पुलिस की हनीप्रीत इंसा और डेरा मुखी के प्रोेडक्शन वारंट की अर्जी पर शुक्रवार कोर्ट फैसला सुनाती इससे पहले ही पुलिस ने अपनी अर्जी वापस ले ली। पुलिस ने अदालत से कहा कि ‘वो अपनी अर्जी वापस लेते हैं जरूरत पड़ी तो फिर दोबारा से अर्जी लगाई जाएगी’। एकदम से बदले इस घटनाक्रम के पीछे पुलिस अधिकारियों में आपसी तालमेल की कमी और हर कार्रवाई गुप्त रखने के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस की ओर से अदालत में दायर की गई अर्जी की खबर समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को पुलिस अधिकारी आपस में ही जवाब तलबी करते रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार सीनियर अधिकारी शहर थाना पुलिस की प्रोडक्शन अर्जी से खुद को अजान बताते रहे। जांच अधिकारी ने अपने तौर पर सीजेएम कोर्ट में प्रोडक्शन की अर्जी दायर की। आपसी तालमेल की कमी के बाद शहर थाना पुलिस ने सीजेएम कोर्ट से अपनी अर्जी यह करते हुए वापस ले ली कि ‘जरूरत पड़ी तो दोबारा दायर करेंगे’। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच टीम के सीनियर ऑफिसर ये चाहते हैं कि हिंसा मामले में डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम और हनीप्रीत इंसां को जांच में शामिल करते हुए जेल में ही पूछताछ की जाए। प्रोडक्शन अर्जी वापस लेने के सवाल पर कोई पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
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गौरतलब है कि 25 अगस्त 2017 की दोपहर पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने जैसे ही साध्वी रेप मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया तो सिरसा में हिंसा भड़क गई। हजारों डेरा अनुयायी हाथों में हथियार व पेट्रोल बम लेकर सिरसा शहर की ओर बढ़ने लगे। डेरा अनुयायियों ने गांव बेगू में बिजली घर को आग लगाने के बाद सिरसा के वीटा मिल्क प्लांट में पेट्रोल बम फेंककर आग के हवाले कर दिया। इसके बाद जगदम्बे पेपर मील के पास डेरा अनुयायियों ने सुरक्षा बलों पर हमला करते हुए उनपर फायरिंग की। जवाब में दंगा विरोधी कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने फायरिंग की। दंगा विरोधी कार्रवाई में छह उपद्रवियों की गोली लगने से मौत हो गई। हिंसा मामले में सिरसा पुलिस 100 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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वीसी के जरिए होगी पेशी
हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों की पेशी अब वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से अदालत में होगी। सुरक्षा कारणों और विभिन्न जेलों में कैद आरोपियों को अदालत में लाने और वापस जेल ले जाने का झंझट काफी होता है। 15 जनवरी को अदालत में 13 आरोपियों की पेशी वीसी के माध्यम से अदालत में हुई थी। अब 25 जनवरी को कुछ मुख्य आरोपियों की वीडियो कॉफ्रेसिंग के जरिए होगी।
पीए राकेश और सिपाही कर्मजीत पहुंचे जेल
हनीप्रीत के पीए राकेश और पंजाब पुलिस के सिपाही कर्मजीत की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को शुक्रवार दोपहर अदालत में पेश किया। पुलिस ने दोनों को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया है। हिंसा मामले में सिरसा पुलिस दोनों आरोपियों को अंबाला जेल से प्रोडक्शन वारंट पर तीन दिन पहले सिरसा लाई थी। अदालत ने राकेश और कर्मजीत सिंह को तीन दिन के पुलिस रिमांड में भेज दिया। रिमांड अवधि के दौरान पुलिस दोनों को डेरा सच्चा सौदा लेकर गई और निशानदेही करवाई।