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टवेरा हादसा ः परिजन बोले - शाम को वापस आने की बात कहकर चले थे डेरे में सेवा करने, दो घंटे बाद हादसे की मिली सूचना
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टवेरा गाड़ी और गैस टैंकर की टक्कर की सूचना मिलने पर अस्पताल में पहुंचे पंजाब से आए लोग।
- फोटो : Sirsa
सिरसा सरदूलगढ़ मार्ग पर रविवार को सुबह साढ़े सात बजे गांव पनिहारी के निकट धुंध के कारण गैस टैंकर और टवेरा गाड़ी की टक्कर में टवेरा सवार पांच डेरा प्रेमियों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। गैस टैंकर खाली था नहीं तो हादसा और भी भयानक हो जाता। वहीं टवेरा गाड़ी में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठी थी और किसी भी व्यक्ति ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी घूमकर दूसरी दिशा में मुड़ गई। अधिकतर डेरा प्रेमी सरकारी कर्मचारी थे। जो बुढ़लाडा पंजाब से सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में सेवा के लिए आ रहे थे।
जानकारी के अनुसार पंजाब से आ रहे सभी श्रद्धालु सुबह छह बजे चले थे और अपने घर पर शाम तक वापस आने को बोले थे। लेकिन टवेरा गाड़ी का सिरसा से करीब 20 किलोमीटर दूर गांव पनिहारी के पास ही हादसा हो गया। हादसे में मृतकों में गुरचरण सिंह निवासी बछवाना (70), बंता सिंह निवासी बुढलाडा (50), हरविंद्र निवासी बुढ़लाडा (50), मुकेश बुढ़लाडा (44), चालक बब्बी सिंह निवासी धर्मगढ़ (30) शामिल हैं। वहीं घायलों में सुरजीत सिंह निवासी बुढ़लाडा (65), तरसेम निवासी बछवाना (50), शम्मी निवासी बुढ़लाडा (60), जीवन निवासी धर्मगढ़ (45) और संजीव निवासी बुढ़लाडा (45) शामिल हैं। जिन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के अनुसार सभी लोग एक साथ हर माह डेरे में आते थे। उसी प्रकार इस माह भी सभी ने प्लान बनाया था कि वह सभी डेरे में एक दिन की सेवा करने जाएंगे।
कंबाइन चालक लेकर आया था टवेरा गाड़ी
टवेरा गाड़ी चालक बब्बी सिंह धर्मगढ़ का रहने वाला है। मृतक बब्बी सिंह के पिता बुगा सिंह ने बताया कि वह कंबाइन चलाने का काम करता है, टवेेरा गाड़ी उसकी नहीं है। बुगा सिंह ने बताया कि शनिवार शाम को बब्बी के एक दोस्त का फोन आया कि वह टवेरा गाड़ी लेकर सिरसा चला जाए, क्योंकि उसने बुकिंग की हुई है। जबकि उसे किसी शादी समारोह में गाड़ी लेकर जाना है। जिस पर बब्बी सिंह तैयार हो गया और सुबह घर से चाय पीकर दोस्त के घर गाड़ी लाने चला गया। उस समय वह घर पर यह कहकर निकला था कि वह शाम तक वापस लौट आएगा। लेकिन करीब दो घंटे बाद हादसे की सूचना मिली। इससे एक साल पहले उसके दूसरे भाई की भी मौत हो गई थी। यह घर में अकेला ही था जो अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था।
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शाम को आकर सुबह जाऊंगा ड्यूटी
मृतक मुकेश के भाई हरजिंद्र पाल ने बताया कि वह मानसा मंडी में एसडीएम कार्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात है। वह हर माह डेरे में सेवा करने आता था। जब वह घर से निकला था तो यह कहकर निकला था कि वह शाम को वापस आ जाएगा। क्योंकि उसे सुबह ड्यूटी पर जाना है। हरजिंद्र ने बताया कि कुछ ही समय बाद फोन आया कि यह हादसा हो गया है।
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जानकारी के अनुसार पंजाब से आ रहे सभी श्रद्धालु सुबह छह बजे चले थे और अपने घर पर शाम तक वापस आने को बोले थे। लेकिन टवेरा गाड़ी का सिरसा से करीब 20 किलोमीटर दूर गांव पनिहारी के पास ही हादसा हो गया। हादसे में मृतकों में गुरचरण सिंह निवासी बछवाना (70), बंता सिंह निवासी बुढलाडा (50), हरविंद्र निवासी बुढ़लाडा (50), मुकेश बुढ़लाडा (44), चालक बब्बी सिंह निवासी धर्मगढ़ (30) शामिल हैं। वहीं घायलों में सुरजीत सिंह निवासी बुढ़लाडा (65), तरसेम निवासी बछवाना (50), शम्मी निवासी बुढ़लाडा (60), जीवन निवासी धर्मगढ़ (45) और संजीव निवासी बुढ़लाडा (45) शामिल हैं। जिन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के अनुसार सभी लोग एक साथ हर माह डेरे में आते थे। उसी प्रकार इस माह भी सभी ने प्लान बनाया था कि वह सभी डेरे में एक दिन की सेवा करने जाएंगे।
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कंबाइन चालक लेकर आया था टवेरा गाड़ी
टवेरा गाड़ी चालक बब्बी सिंह धर्मगढ़ का रहने वाला है। मृतक बब्बी सिंह के पिता बुगा सिंह ने बताया कि वह कंबाइन चलाने का काम करता है, टवेेरा गाड़ी उसकी नहीं है। बुगा सिंह ने बताया कि शनिवार शाम को बब्बी के एक दोस्त का फोन आया कि वह टवेरा गाड़ी लेकर सिरसा चला जाए, क्योंकि उसने बुकिंग की हुई है। जबकि उसे किसी शादी समारोह में गाड़ी लेकर जाना है। जिस पर बब्बी सिंह तैयार हो गया और सुबह घर से चाय पीकर दोस्त के घर गाड़ी लाने चला गया। उस समय वह घर पर यह कहकर निकला था कि वह शाम तक वापस लौट आएगा। लेकिन करीब दो घंटे बाद हादसे की सूचना मिली। इससे एक साल पहले उसके दूसरे भाई की भी मौत हो गई थी। यह घर में अकेला ही था जो अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था।
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शाम को आकर सुबह जाऊंगा ड्यूटी
मृतक मुकेश के भाई हरजिंद्र पाल ने बताया कि वह मानसा मंडी में एसडीएम कार्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात है। वह हर माह डेरे में सेवा करने आता था। जब वह घर से निकला था तो यह कहकर निकला था कि वह शाम को वापस आ जाएगा। क्योंकि उसे सुबह ड्यूटी पर जाना है। हरजिंद्र ने बताया कि कुछ ही समय बाद फोन आया कि यह हादसा हो गया है।