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रूट्स एंड रीचार्ज संगोष्ठी का आयोजन: भूजल सुधार पर हुई चर्चा, 424 कुओं का किया गया सर्वे
Tue, 09 Dec 2025 08:00 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क गुरुग्राम
अमर उजाला नेटवर्क गुरुग्राम
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 09 Dec 2025 08:00 PM IST
सार
संगोष्ठी में दो पुनर्जीवन परियोजनाएँ दौलताबाद और खंडेवला गाँवों के कुएँ भी प्रस्तुत की गईं। दोनों का पुनर्निर्माण समुदाय के सहयोग से किया गया तथा उन्हें वर्षा जल पुनर्भरण मॉडल के रूप में विकसित किया गया।
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रूट्स एंड रीचार्ज संगोष्ठी का आयोजन
- फोटो : संवाद
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विस्तार
इंडिया हैबिटैट सेंटर में मंगलवार को रूट्स एंड रीचार्ज संगोष्ठी का आयोजन गुरूजल, वी प्रो फ़ाउंडेशन और अभीप्सा फ़ाउंडेशन की पहल के तहत संयुक्त रूप से किया गया। इस संगोष्ठी में सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों, क्षेत्रीय प्रैक्टिशनरों, सामाजिक संस्थाओं, शोधकर्ताओं, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) संगठनों, समुदाय प्रतिनिधियों और छात्रों ने भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य गुरुग्राम ज़िले में परंपरागत जल संरचनाओं, विशेषकर कुओं के पुनर्जीवन को गति देना था।
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संगोष्ठी के केंद्र में गुरूजल का महत्त्वपूर्ण अध्ययन “गुरुग्राम ज़िले में कुओं की समग्र सूची और भूजल सुरक्षा हेतु पुनर्जीवन” रहा, जिसमें पारंपरिक कुओं को स्थानीय भूजल सहनशीलता के एक महत्त्वपूर्ण भाग के रूप में सक्रिय करने का मॉडल प्रस्तुत किया गया।
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ज़िलेभर में किए गए इस सर्वेक्षण में 200+ गांवों में 424 कुएँ दर्ज किए गए, जिनमें से 330+ कुएं निष्क्रिय पाए गए। केवल 3% कुएं वर्षा जल संचयन प्रणालियों से जुड़े हैं, जबकि कई कुएँ आसपास के अपशिष्ट जल तालाबों के कारण प्रदूषण के जोखिम में हैं। 282 कुएँ कचरे से भरे मिले, जबकि 13 कुओं में अभी भी मीठा पानी पाया गया। यह स्थिति एक ओर उपेक्षा को उजागर करती है, तो दूसरी ओर यह संकेत भी देती है कि ये कुएँ दोबारा समुदाय-केंद्रित भूजल संचयन संरचनाओं के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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संगोष्ठी में दो पुनर्जीवन परियोजनाएँ दौलताबाद और खंडेवला गाँवों के कुएँ भी प्रस्तुत की गईं। दोनों का पुनर्निर्माण समुदाय के सहयोग से किया गया तथा उन्हें वर्षा जल पुनर्भरण मॉडल के रूप में विकसित किया गया, जहाँ आसपास के घरों की छतों से आने वाला वर्षा जल कुएँ में प्रवाहित होता है।
खंडेवला परियोजना का सबसे उल्लेखनीय क्षण “कुआं पूजन” (28 नवंबर 2025) रहा, जिसने इस पारंपरिक जल संरचना को पुनः एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया। इस अनुष्ठान ने समुदाय में स्वामित्व की भावना को मजबूत किया, बुज़ुर्गों और युवाओं को एक साथ लाया और कुएँ को फिर से सामुदायिक पहचान का स्थल बना दिया। कार्यक्रम के दौरान, गुरूजल ने “वेल्स ऑफ गुरुग्राम” नामक एक कॉफी-टेबल बुक भी जारी की, जिसमें ज़िले के कुओं का ऐतिहासिक व सांस्कृतिक लेखा-जोखा तथा तस्वीरें प्रस्तुत की गई हैं। इस आयोजन में जल जीवन मिशन, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जिला विकास एवं पंचायत कार्यालय सहित विभिन्न सरकारी वि भागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।