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Rohtak News: मोबाइल फोन का कम से कम प्रयोग करें युवा
Fri, 25 Oct 2024 07:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 25 Oct 2024 07:31 PM IST
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रोहतक। जाट कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य माह के उपलक्ष्य में एनएसएस, एनसीसी और महिला सेल की ओर से शुक्रवार को मानसिक स्वास्थ्य पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के तौर पर पीजीआईएमएस रोहतक की वरिष्ठ प्रो. डॉ. सुजाता सेठी रहीं। मुख्य वक्ता का कॉलेज प्राचार्य डॉ. शबनम राठी व एनएसएस की वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुशीला डबास व एनसीसी ऑफिसर डॉ. विवेक दांगी ने स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जसमेर सिंह ने किया।
डॉ. सेठी ने कहा कि हमें भागते हुए मन को रोकना होगा तभी हम जीवन में खुशहाली को और ज्यादा बढ़ा पाएंगे। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन की गिरफ्त में हम ज्यादा आ गए हैं। एक रिसर्च के अनुसार सामान्य तौर पर हम एक दिन में 700 बार तक अपने मोबाइल फोन को चेक (जांचना) करते हैं। इससे हमारा मानसिक संतुलन खराब होता जा रहा है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वह मोबाइल फोन का कम से कम प्रयोग करते हुए मेडिटेशन के माध्यम से दिमाग को तंदुरुस्त और ताजा रख सकते हैं।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. शबनम राठी ने संत रविदास के मन चंगा तो कठौती में गंगा दोहे से अपनी बात रखते हुए कहा कि हम जिन खुशियों को बाहर ढूंढते हैं दरअसल वे हमारे अंदर ही मौजूद हैं इसलिए हमें अपनी अंदरूनी ताकत को पहचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिमाग को नदी की धारा की तरह सकारात्मक तौर पर बहते रहने की धारणा पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी समय के साथ चलना सीखें और मोबाइल फोन का जितना कम प्रयोग करेंगे उतना ही मानसिक संतुलन बेहतर होगा।
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इस दौरान डॉ. सुशीला डबास, डॉ. सरोज नारा, डॉ. सरोज बाला, डॉ. प्रकाश कौर, डॉ. मीनल मलिक, डॉ. कांता राठी, डॉ. विवेक दांगी, डॉ. सुनीता ढुल सहित एनएसएस वालिंटियर्स, एनसीसी कैडेट्स उपस्थित रहे।
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डॉ. सेठी ने कहा कि हमें भागते हुए मन को रोकना होगा तभी हम जीवन में खुशहाली को और ज्यादा बढ़ा पाएंगे। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन की गिरफ्त में हम ज्यादा आ गए हैं। एक रिसर्च के अनुसार सामान्य तौर पर हम एक दिन में 700 बार तक अपने मोबाइल फोन को चेक (जांचना) करते हैं। इससे हमारा मानसिक संतुलन खराब होता जा रहा है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वह मोबाइल फोन का कम से कम प्रयोग करते हुए मेडिटेशन के माध्यम से दिमाग को तंदुरुस्त और ताजा रख सकते हैं।
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कॉलेज प्राचार्य डॉ. शबनम राठी ने संत रविदास के मन चंगा तो कठौती में गंगा दोहे से अपनी बात रखते हुए कहा कि हम जिन खुशियों को बाहर ढूंढते हैं दरअसल वे हमारे अंदर ही मौजूद हैं इसलिए हमें अपनी अंदरूनी ताकत को पहचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिमाग को नदी की धारा की तरह सकारात्मक तौर पर बहते रहने की धारणा पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी समय के साथ चलना सीखें और मोबाइल फोन का जितना कम प्रयोग करेंगे उतना ही मानसिक संतुलन बेहतर होगा।
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इस दौरान डॉ. सुशीला डबास, डॉ. सरोज नारा, डॉ. सरोज बाला, डॉ. प्रकाश कौर, डॉ. मीनल मलिक, डॉ. कांता राठी, डॉ. विवेक दांगी, डॉ. सुनीता ढुल सहित एनएसएस वालिंटियर्स, एनसीसी कैडेट्स उपस्थित रहे।