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Rohtak News: गांजा तस्करी के दोषी युवक को 20 साल की सजा, दो बरी
Thu, 25 Apr 2024 01:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 25 Apr 2024 01:16 AM IST
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बहादुरगढ़। चार वर्ष पहले एक हजार किलो गांजा तस्करी के आरोप में पकड़े गए आरोपी युवक को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है। उस पर दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन साल की सजा भुगतनी होगी। दोषी सुरजीत उर्फ जीतू हिसार का रहने वाला है।इस मामले में दो अन्य सह अभियुक्तों को न्यायालय ने निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया।
झज्जर शहर थाना क्षेत्र में पुलिस ने 26 जनवरी 2020 को सुर्खपुर गांव के बस स्टैंड के पास से एक हजार किलो गांजा से भरा कैंटर पकड़ा था। यह गांजा ओडिसा से लाया गया था। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को अभियुक्त बनाया था। इनमें हिसार के बुढाखेड़ा का सुरजीत उर्फ जीतू, हिसार के मतलोढ़ा का रामेहर और हिसार के ही गांव किरोड़ी का सूबे सिंह शामिल है। कैंटर पर सूबे सिंह ड्राइवर था जबकि रामेहर कंडेक्टर। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो तीनों वहां मौजूद थे, लेकिन सुरजीत मौके पर पकड़ा गया था, पुलिस का आरोप था कि दो आरोपी खेत के रास्ते निकल गए थे। बाद में उनकी पहचान सूबे सिंह और रामेहर के तौर पर हुई थी। चार साल तक चली केस की सुनवाई के दौरान गवाहों और सुबूतों के आधार पर न्यायालय ने सुरजीत को एनडीपीएस एक्ट के तहत एक हजार किलो गांजा की तस्करी का दोषी पाया, जबकि बाकी दोनों अभियुक्तों का दोष साबित करने में पुलिस विफल रही। इस केस में रामेहर की पैरवी कर रहे एडवोकेट दीपक भारद्वाज ने बताया कि हमारी तरफ से दी गई दलीलों के आधार पर न्यायालय ने रामेहर को निर्दोष ठहराया।
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झज्जर शहर थाना क्षेत्र में पुलिस ने 26 जनवरी 2020 को सुर्खपुर गांव के बस स्टैंड के पास से एक हजार किलो गांजा से भरा कैंटर पकड़ा था। यह गांजा ओडिसा से लाया गया था। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को अभियुक्त बनाया था। इनमें हिसार के बुढाखेड़ा का सुरजीत उर्फ जीतू, हिसार के मतलोढ़ा का रामेहर और हिसार के ही गांव किरोड़ी का सूबे सिंह शामिल है। कैंटर पर सूबे सिंह ड्राइवर था जबकि रामेहर कंडेक्टर। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो तीनों वहां मौजूद थे, लेकिन सुरजीत मौके पर पकड़ा गया था, पुलिस का आरोप था कि दो आरोपी खेत के रास्ते निकल गए थे। बाद में उनकी पहचान सूबे सिंह और रामेहर के तौर पर हुई थी। चार साल तक चली केस की सुनवाई के दौरान गवाहों और सुबूतों के आधार पर न्यायालय ने सुरजीत को एनडीपीएस एक्ट के तहत एक हजार किलो गांजा की तस्करी का दोषी पाया, जबकि बाकी दोनों अभियुक्तों का दोष साबित करने में पुलिस विफल रही। इस केस में रामेहर की पैरवी कर रहे एडवोकेट दीपक भारद्वाज ने बताया कि हमारी तरफ से दी गई दलीलों के आधार पर न्यायालय ने रामेहर को निर्दोष ठहराया।
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