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Rohtak News: आईटीआई कैंपस में योग शिविर, बताए त्रिकोणासन के फायदे
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फोटो : सोनीपत के आईटीआई कैंपस में शिविर के दौरान योगाभ्यास करते लोग। स्रोत: समिति
सोनीपत। लक्ष्य स्वस्थ सोनीपत समिति की ओर से आईटीआई कैंपस में योग शिविर का आयोजन किया गया। मिशन फिट इंडिया के तहत बुधवार सुबह साधकों को त्रिकोणासन का विशेष अभ्यास करवाया गया।
समिति के प्रधान लक्ष्मीनारायण ने बताया कि त्रिकोणासन मेरुदंड को लचीला बनाता है। जांघों और कटि भाग की मांसपेशियों को मजबूत करता है तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक है।
समिति के प्रधान ने आसन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी देते हुए कहा कि स्लिप डिस्क, साइटिका और पेट की सर्जरी के बाद कम से कम तीन माह तक इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। अभ्यास के दौरान यदि हाथ जमीन तक न पहुंचे तो घुटनों तक ले जाने का प्रयास किया जा सकता है।
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त्रिकोणासन की विधि बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों पैरों के बीच लगभग तीन फीट की दूरी रखकर दोनों हाथों को कंधों के स्तर तक फैलाया जाता है। दाएं पैर को दाईं ओर मोड़कर श्वास छोड़ते हुए शरीर को दाईं ओर झुकाया जाता है और दाएं हाथ से टखने को छूने का प्रयास किया जाता है। बाएं हाथ को ऊपर की ओर सीध में रखते हुए दृष्टि को अंगुलियों पर केंद्रित किया जाता है। लगभग 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहने के बाद यही अभ्यास दूसरी दिशा में दोहराया जाता है।
इस अवसर पर नकुल, कृष्णा, रीना, रुक्मणि, विनीता, संतोष, दीपिका, नीरा, सुनीता, जगदीश, बलवान, रविंद्र, त्रिलोक और डालचंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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समिति के प्रधान लक्ष्मीनारायण ने बताया कि त्रिकोणासन मेरुदंड को लचीला बनाता है। जांघों और कटि भाग की मांसपेशियों को मजबूत करता है तथा फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक है।
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समिति के प्रधान ने आसन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी देते हुए कहा कि स्लिप डिस्क, साइटिका और पेट की सर्जरी के बाद कम से कम तीन माह तक इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। अभ्यास के दौरान यदि हाथ जमीन तक न पहुंचे तो घुटनों तक ले जाने का प्रयास किया जा सकता है।
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त्रिकोणासन की विधि बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों पैरों के बीच लगभग तीन फीट की दूरी रखकर दोनों हाथों को कंधों के स्तर तक फैलाया जाता है। दाएं पैर को दाईं ओर मोड़कर श्वास छोड़ते हुए शरीर को दाईं ओर झुकाया जाता है और दाएं हाथ से टखने को छूने का प्रयास किया जाता है। बाएं हाथ को ऊपर की ओर सीध में रखते हुए दृष्टि को अंगुलियों पर केंद्रित किया जाता है। लगभग 30 सेकंड तक इसी स्थिति में रहने के बाद यही अभ्यास दूसरी दिशा में दोहराया जाता है।
इस अवसर पर नकुल, कृष्णा, रीना, रुक्मणि, विनीता, संतोष, दीपिका, नीरा, सुनीता, जगदीश, बलवान, रविंद्र, त्रिलोक और डालचंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।