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Rohtak News: बीवी पूछती है, बीसियों बार सम्मानित हो चुके पर घर में शॉल केवल एक ही है

Sun, 20 Jul 2025 02:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jul 2025 02:06 AM IST
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Wife asks, I have been honoured many times but there is only one shawl in the house
विश्वदीपक त्रिखा, रंगकर्मी। - फोटो : विश्वदीपक त्रिखा, रंगकर्मी।
सम्मान कितना लुभाने वाला शब्द है। जब कोई कहता है कि हमारी कमेटी ने सर्वसम्मति से इस वर्ष आपको फलां अवॉर्ड से सम्मानित करने का निर्णय लिया है तो आदमी बाग-बाग हो जाता है। यह किस्सा भी दशक भर पहले के उतार-चढ़ाव का है।
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2014 में जब मैं मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर, कुरुक्षेत्र का इंचार्ज था, हर हफ्ते किसी कलाकार या ठेकेदार का फोन आ जाता कि हम आपको सम्मानित करना चाहते हैं। कृपया आकर कृतार्थ करें। मैं सोचता, यार मैं अपमानित कब था जो मुझे सम्मानित करके रुतबा बढ़ा रहे हैं। खैर कहीं-कहीं जाता, कहीं असमर्थता जता देता। यार-दोस्त कहते-तू सच में संस्कृति के संवर्धन के लिए बहुत काम कर रहा है, लोग इसलिए बुला रहे हैं। मैं जानता था कि यह मेरा नहीं, कुर्सी का सम्मान कर रहे हैं।
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जल्द ही सच से सामना हो गया। मेरी शिकायत हुई और संस्थान से छुट्टी। मैं सब कुछ छोड़कर वापस घर रोहतक आ गया। नौकरी जाने के कुछ दिन बाद तक कुछ कलाकारों के फोन आए लेकिन फिर ठनठन गोपाल। सारा दिन बजने वाला फोन चुप। मैं बार-बार देखता कि बैटरी खत्म तो नहीं हो गई। फिर ढीठ बनकर फोन करने लगा। उठाने वाला पूछता-अरे सर कैसे हो, कहां हो। कुछ और कहूं कि आवाज आती... सर मैं बच्चों के स्कूल आया हूं। थोड़ी देर में फोन करूं आपको। फिर कैसा फोन, किसका फोन?
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फिर उनकी याद आई जो रोज-रोज मुझे सम्मानित करते थे। मैं सोचता कहां गए वो सारे लोग। झेंप मिटाने के लिए दूसरी योजना बनाई और कार में एक शॉल रख ली। जहां फंक्शन होता, अपनी शॉल लेकर पहुंच जाता। आयोजक से कहता, यह शॉल मुख्य अतिथि के हाथ से दिलवा देना। भूतकाल में ओब्लाइज हो चुके इन लोगों में मना करने की हिम्मत न थी। सो, जैसे-तैसे सम्मानित करा देते। बीसों बार यही हुआ। एक रोज बीवी ने पूछा, आप बीसियों बार सम्मानित हो चुके हो पर शॉल केवल एक ही है। बाकी किसको दे आए। उन्हें क्या बताता यह कुर्सी का खेल है। इसके जाते ही लोग भी खिसक जाते हैं।



-विश्वदीपक त्रिखा, रंगकर्मी। हरियाणा कला परिषद के निदेशक रह चुके हैं।
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