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रोहतक के रण का राजा कौन, फैसला आज

Thu, 24 Oct 2019 12:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2019 12:54 AM IST
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Who is the king of the battle of Rohtak, decision today
प्रदेश की सियासी राजधानी रोहतक की विस सीटों की चौधर किसके हाथ में रहेगी, इसका फैसला वीरवार सुबह 8 से 12 बजे के बीच में हो जाएगा। रोहतक विधानसभा क्षेत्र की चार सीटों रोहतक शहर, गढ़ी सांपला - किलोई, महम व कलानौर के मतों की गणना जाट शिक्षण संस्था में होगी। रोहतक जिले के चुनाव परिणामों का सीधा असर प्रदेश की सियासत खासकर कांग्रेस की राजनीति पर पड़ेगा। वैसे तो जिले की चारों सीट हॉट हैं, लेकिन गढ़ी सांपला - किलोई व रोहतक शहर पर प्रदेश भर की निगाहें लगी हुई हैं। प्रदेश की सियासी राजधानी में चार हलके आते हैं। इस बार 58 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। वीरवार को सुबह 8 बजे मतगणना शुरू हो जाएगी।
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रोहतक शहर : डॉक्टर मंगलसेन की कर्मभूमि का चौधरी ग्रोवर या बतरा
भाजपा के पितामह डॉक्टर मंगलसेन और कांग्रेस के बतरा बंधुओं का गढ़ रहे रोहतक में कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। आजादी के बाद 1947 में बंटवारे के बाद आए पंजाबी समुदाय के लोगों का अब तक दबदबा रहा है। अब तक केवल बनिया समुदाय से सेठ श्रीकिशन दास गैर पंजाबी विधायक बने। 1952 से लेकर 2014 तक हर बार पंजाबी समुदाय से ही विधायक बनता आ रहा है। चाहे वह भाजपा से है या कांग्रेस पार्टी की तरफ से है। सीट पर भाजपा के डॉक्टर मंगलसेन का दबदबा रहा है। उन्होंने 1957 से 1987 तक नौ चुनाव लड़े और सात में जीत हासिल की। उनके देहांत के बाद कांग्रेस के बतरा बंधुओं ने जीत हासिल की। 1990 से लेकर 2014 तक केवल 1996 व 2014 में कांग्रेस के बतरा बंधु हारे। 10 साल कांग्रेस ने रोहतक की चौधर का नारा देकर राज किया, लेकिन 2014 में कांग्रेस के भारत भूषण बतरा भाजपा के मनीष ग्रोवर से हार गए। सार्वजनिक तौर पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा था कि प्रदेश भर के नेता पूछते हैं कि रोहतक में इतना विकास करवाया। अब देखना है कि वीरवार के दिन पूर्व सीएम की टिस और बढ़ती है या भारत भूषण बतरा की जीत से पिछला दर्द कम होता है।
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हलका रोहतक
वर्ष विजेता पार्टी
1952 देवराज सेठी कांग्रेस
1957 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ
1962 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ
1967 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ
1968 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ
1972 सेठ किशन दास कांग्रेस
1977 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ
1982 डाक्टर मंगलसेन भाजपा
1985 उप चुनाव सेठ किशन दास कांग्रेस
1987 डाक्टर मंगलसेन भाजपा
1991 सुभाष बतरा कांग्रेस
1996 सेठ किशन दास हविपा
2000 शादीलाल बतरा कांग्रेस
2005 शादीलाल बतरा कांग्रेस
2009 भारत भूषण बतरा कांग्रेस
2014 मनीष ग्रोवर भाजपा
गढ़ी सांपला-किलोई : किलोई में 19 साल से अंगद की तरह पैर जमा कर बैठे पूर्व सीएम हुड्डा
10 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री व चार बार सांसद रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा 2000 से गढ़ी सांपला-किलोई हलके में अंगद की तरह पैर जमाकर बैठे हैं। विपक्ष अब तक उनको हराना तो दूर, कांटे की टक्कर तक नहीं दे सका है। 1982 से अब तक के राजनीतिक सफर में हुड्डा केवल चार बार 1982 और 1987 में किलोई से विधानसभा और 1999 में रोहतक व 2019 में सोनीपत लोकसभा सीट हारे हैं। 2000, 2005,2009 व 2014 से वे लगातार किलोई हलके से विधायक हैं। इससे पहले 1991, 1996, 1998 में रोहतक लोकसभा सीट से ताऊ देवीलाल को हराकर प्रदेश की राजनीति का बड़ा चेहरा बनकर उभरे थे। 24 अक्तूबर 2019 का दिन उनके लिए अग्नि परीक्षा की तरह है। अगर वे कांग्रेस की नैया पार लगा ले गए तो एक तरह से उनको राजनीतिक संजीवनी मिलेगी। अगर अप्रत्यक्ष चुनाव परिणाम आया तो उनके व कांग्रेस के लिए बड़ा सियासी आघात होगा। दूसरी तरफ कभी हलके में इनेलो का चेहरा रहे सतीश नांदल, अबकी बार भाजपा के टिकट पर हुड्डा को चुनौती दे रहे हैं। अगर वे हुड्डा को मात देते हैं उनका राजनीतिक ग्राफ शिखर पर पहुंच जाएगा।
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हलका गढ़ी सांपला-किलोई
कौन कब किस हलके से बना विजेता
वर्ष विजेता पार्टी
1952 चौधरी माड्ू सिंह जमींदार पार्टी
1957 सूरजभान निर्दलीय
1962 चौधरी रामस्वरूप हरियाणा लोक समिति पार्टी
1967 महंत श्रेयोनाथ निर्दलीय
1968 चौधरी रणबीर हुड्डा कांग्रेस
1972 महंत श्रेयोनाथ कांग्रेस (एस)
1977 हरिचंद हुड्डा जनता पार्टी
1982 हरिचंद हुड्डा लोकदल
1987 श्रीकृष्ण हुड्डा लोकदल
1991 कृष्णमूर्ति हुड्डा कांग्रेस
1996 श्रीकृष्ण हुड्डा एसएपी
2000 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
2005 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
2009 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
2014 भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस
महम : कभी नहीं जीती हलके में भाजपा, खरकड़ा, कुंडू और दांगी में त्रिकोणीय मुकाबला
1990 के महम कांड से देश व प्रदेश की राजनीति के अंदर सुर्खियों आए महम के हलके से जनसंघ के समय से लेकर आज तक भाजपा नहीं जीती है। अब शमशेर सिंह खरकड़ा से आस है कि वे हलके में पार्टी का खाता खुलवाएंगे। हालांकि उनके सामने कांग्रेस के आनंद सिंह दांगी और निर्दलीय बलराज कुंडू की कड़ी चुनौती है। कांग्रेसी होने के बावजूद दांगी ताऊ देवीलाल के राजनीतिक शिष्य रहे हैं। जबकि कुंडू का यह पहला विधानसभा चुनाव है। हलके से जीत की हैट्रिक लगाकर ताऊ देवीलाल प्रदेश के मुख्यमंत्री तक बने थे, लेकिन 1990 में हुए महम कांड ने हलके को देश व प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना दिया। क्योंकि ताऊ देवीलाल केंद्र में उप प्रधानमंत्री बन गए थे, जबकि उन्होंने प्रदेश की कमान अपने बेटे ओमप्रकाश चौटाला को सौंप दी थी। हलके के उप चुनाव में ताऊ देवीलाल के बेटे व तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला का मुकाबला उनके ही शिष्य रहे आनंद सिंह दांगी के साथ था। उप चुनाव में हिंसा हुई, जिसमें कई लोग मारे गए। दांगी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे। हिंसा के बाद खुद राजीव गांधी दांगी के आवास पर मदीना आए थे। तब से दांगी कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर हलके से चुनाव लड़ रहे हैं। वे 1991, 2004, 2009 व 2014 में विधायक बन चुके हैं। जबकि भाजपा के शमशेर खरकड़ा ने 2009 में निर्दलीय और 2014 में भाजपा के टिकट पर हलके से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। जबकि तीसरे प्रत्याशी बलराज कुंडू जिला परिषद चेयरमैन पद से त्याग पत्र देकर पहला विधानसभा चुनाव लड़े हैं। अब वीरवार को फैसला होगा कि महम चौबीसी का ताज किसके सिर सजता है।

महम हलका
वर्ष विजेता पार्टी
1962 रामधारी हरियाणा लोक समिति
1967 प्रोफेसर महासिंह निर्दलीय
1968 राजसिंह दलाल निर्दलीय
1972 उमेद सिंह निर्दलीय
1977 हरस्वरूप बूरा जनता पार्टी
1982 चौधरी देवीलाल लोकदल
1985 चौधरी देवीलाल लोकदल
1987 चौधरी देवीलाल लोकदल
1991 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
1996 बलबीर सिंह बाली इनेलो
2000 बलबीर सिंह बाली इनेलो
2005 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
2009 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
2014 आनंद सिंह दांगी कांग्रेस
कलानौर : रामअवतार क्या रोक पाएंगे एक साथ दो हैट्रिक
जिले के एकमात्र आरक्षित हलके कलानौर से भाजपा के राम अवतार वाल्मीकि क्या एक साथ दो हैट्रिक बनने से रोक पाएंगे। इस सवाल का जवाब वीरवार को दोपहर 12 बजे तक मिल जाएगा। अगर कांग्रेस की शकुंतला खटक जीत जाती हैं तो न केवल वे जीत की हैट्रिक लगाएंगी, बल्कि रामअवतार को लगातार तीसरी बार पराजित करेंगी। रामअवतार जीतते हैं तो दोनों हैट्रिक बनने से रोक देंगे। हलके से जजपा, बसपा, लोसुपा सहित 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। हलके के सियासी इतिहास पर नजर डालें तो यह अर्ध शहरी हलका 1977 से पहले सामान्य था। उस समय हलके के अंदर विस्थापित होकर आए पंजाबी समुदाय की अच्छी सियासी मौजूदगी थी। कलानौर करतारी के नाम प्रसिद्ध रहा है, हलका कभी किसी का गढ़ नहीं रहा। हलके से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा 1962 और कांग्रेस के पूर्व विधायक भारत भूषण बतरा के पिता संतराम दास बतरा 1972 में विधायक रह चुके हैं। 1977 में हलके को एसई वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसके बाद दलित समुदाय की राजनीति का गढ़ बजे हलके से कांग्रेस की करतारी देवी ने सात चुनाव लड़े, जिसमें चार बार जीती। 2009 में करतारी देवी के देहांत के बाद सीट से कांग्रेस ने शकुंतला खटक को मैदान में उतारा, जो दो बार 2009 और 2014 में चुनाव जीत चुकी हैं।
कलानौर :
वर्ष विजेता पार्टी
1952 चौधरी बदलूराम .....
1957 नान्हूराम .....
1962 चौधरी रणबीर हुड्डा कांग्रेस
1967 ठाकुर नसीब सिंह जनसंघ
1968 संतराम दास बत्रा जनसंघ
1972 संतराम दास बत्रा कांग्रेस
1977 जयनारायण खुंडिया जनता पार्टी
1982 करतार देवी कांग्रेस
1987 जयनारायण खुंडिया भाजपा
1991 करतार देवी कांग्रेस
1996 करतार देवी कांग्रेस
2000 सरिता नारायण भाजपा
2005 करतार देवी कांग्रेस
2009 शकुंतला खटक कांग्रेस
2014 शकुंतला खटक कांग्रेस
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