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Rohtak News: मात्राएं गायब, अक्षर मिटे... सरकारी बोर्डों पर लड़खड़ाती हिंदी
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19 रोहतक के जिला विकास भवन के बाहर साइन बोर्ड के मिटे शब्द। संवाद
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रोहतक। हिंदी पर हर साल बड़े-बड़े दावे होते हैं लेकिन हकीकत में सरकारी साइन बोर्ड ही हिंदी लड़खड़ाती दिखाई दे रही है। प्रशासन हिंदी को कितना बढ़ावा दे रहा है। इस बात की गवाही शहर में जगह-जगह लगे बोर्ड दे रहे हैं।
लघु सचिवालय की इमारत पर लगे बोर्ड पर हिंदी के अक्षरों की मात्राएं तक गायब हैं। जिला विकास भवन के बाहर लगे कई साइन बोर्डों की हालत इतनी खराब है कि आधे अक्षर मिट चुके हैं और उन्हें पढ़ना मुश्किल है। सोनीपत स्टैंड पर हिंदी में लिखा नाम बेल और पत्तों के बीच गायब हो चुका है जिसे साफ करने की भी किसी ने जहमत नहीं उठाई। आंबेडकर चौक पर लगे भारतीय संविधान की प्रस्तावना के बोर्ड की प्लाई उखड़ी हुई है। शब्द भी सही ढंग से दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सिर्फ बोर्ड ही नहीं, जगह-जगह लगे दिशासूचक और सूचना बोर्डों पर हिंदी की वर्तनी भी गलत लिखी हुई है। सबसे बड़ा सवाल अदालतों पर है। हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिले दशकों बीत चुके हैं लेकिन आज भी अदालतों में फैसले अंग्रेजी में ही आ रहे हैं। आम आदमी, जिसे अंग्रेजी समझने में परेशानी होती है, वह अंग्रेजी में दिए गए फैसले को कैसे समझेगा।
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वर्जन :
संबंधित कार्यालय या विभाग अपने स्तर पर भी साइन बोर्ड में सुधार कर सकता है। भवन की शाखा में जब किसी विभाग का कार्य प्रस्ताव हमारे पास पहुंचता है, तो उसे पूरा किया जाता है।
- सुरेंद्र कुमार, उपमंडल अधिकारी, पीडब्ल्यूडी।
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फैसले अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी हो
फोटो : 31
आज भी अधिकांश अदालतों के फैसले अंग्रेजी में आते हैं। इन्हें समझने में आम आदमी को परेशानी होती है। जरूरी है कि अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी फैसले की प्रति उपलब्ध कराई जाए। इससे न्याय सुलभ होगा। हालांकि हिंदी में दिए जाने वाले फैसलों में उर्दू के शब्दों का अधिक प्रयोग होता है जिन्हें सरल हिंदी में लिखा जाना चाहिए। कुछ राज्यों में हिंदी में फैसले शुरू हो गए हैं। कई राज्य अपनी राजभाषा में फैसले दे रहे हैं। यह अच्छी पहल है। इससे न्याय व्यवस्था आमजन से जुड़ेगी और लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
- डॉ. दीपक भारद्वाज, वरिष्ठ अधिवक्ता
लघु सचिवालय की इमारत पर लगे बोर्ड पर हिंदी के अक्षरों की मात्राएं तक गायब हैं। जिला विकास भवन के बाहर लगे कई साइन बोर्डों की हालत इतनी खराब है कि आधे अक्षर मिट चुके हैं और उन्हें पढ़ना मुश्किल है। सोनीपत स्टैंड पर हिंदी में लिखा नाम बेल और पत्तों के बीच गायब हो चुका है जिसे साफ करने की भी किसी ने जहमत नहीं उठाई। आंबेडकर चौक पर लगे भारतीय संविधान की प्रस्तावना के बोर्ड की प्लाई उखड़ी हुई है। शब्द भी सही ढंग से दिखाई नहीं दे रहे हैं।
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सिर्फ बोर्ड ही नहीं, जगह-जगह लगे दिशासूचक और सूचना बोर्डों पर हिंदी की वर्तनी भी गलत लिखी हुई है। सबसे बड़ा सवाल अदालतों पर है। हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिले दशकों बीत चुके हैं लेकिन आज भी अदालतों में फैसले अंग्रेजी में ही आ रहे हैं। आम आदमी, जिसे अंग्रेजी समझने में परेशानी होती है, वह अंग्रेजी में दिए गए फैसले को कैसे समझेगा।
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वर्जन :
संबंधित कार्यालय या विभाग अपने स्तर पर भी साइन बोर्ड में सुधार कर सकता है। भवन की शाखा में जब किसी विभाग का कार्य प्रस्ताव हमारे पास पहुंचता है, तो उसे पूरा किया जाता है।
- सुरेंद्र कुमार, उपमंडल अधिकारी, पीडब्ल्यूडी।
फैसले अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी हो
फोटो : 31
आज भी अधिकांश अदालतों के फैसले अंग्रेजी में आते हैं। इन्हें समझने में आम आदमी को परेशानी होती है। जरूरी है कि अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी फैसले की प्रति उपलब्ध कराई जाए। इससे न्याय सुलभ होगा। हालांकि हिंदी में दिए जाने वाले फैसलों में उर्दू के शब्दों का अधिक प्रयोग होता है जिन्हें सरल हिंदी में लिखा जाना चाहिए। कुछ राज्यों में हिंदी में फैसले शुरू हो गए हैं। कई राज्य अपनी राजभाषा में फैसले दे रहे हैं। यह अच्छी पहल है। इससे न्याय व्यवस्था आमजन से जुड़ेगी और लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
- डॉ. दीपक भारद्वाज, वरिष्ठ अधिवक्ता

19 रोहतक के जिला विकास भवन के बाहर साइन बोर्ड के मिटे शब्द। संवाद

19 रोहतक के जिला विकास भवन के बाहर साइन बोर्ड के मिटे शब्द। संवाद

19 रोहतक के जिला विकास भवन के बाहर साइन बोर्ड के मिटे शब्द। संवाद

19 रोहतक के जिला विकास भवन के बाहर साइन बोर्ड के मिटे शब्द। संवाद