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गांवों ने लांघी लक्ष्मण रेखा, बढ़ने लगे मरीज
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जिले में कोरोना के दस्तक देते ही गांवों ने खुद को कड़े अनुशासन में बांध लिया था। लेकिन बाद में सामान्य गतिविधियां फिर लौट आईं। इसके साथ ही गांवों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दातौर जैसे गांव में अब तक पांच कोरोना पॉजिटिव केस आ चुके हैं। बहुत से गांव ऐसे हैं जहां एक से ज्यादा मरीज हैं।
कोरोना की दस्तक के साथ गांवों में सख्त अनुशासन लागू कर दिया गया। प्रशासन ने तो ठीकरी पहरे लगाने के आदेश दिए थे। लेकिन बहुत से गांवों ने खुद ही सामूहिक हुक्का और ताश बंद कर दी। गांव किलोई के किसान राज कुमार (60) ने अपने जीवन में यह पहली बार देखा था कि कोरोना के डर से सामूहिक हुक्के बंद हो गए थे। बहुत से गांवों में बच्चों और बुजुर्गों को घरों में रखा गया। गांव से बाहर आवश्यक कार्य के लिए जाने की इजाजत दी गई। गांव में से होकर किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। किसी के घर बाहर से आने वाले की सूचना तुरंत पंचायतों तक पहुंचती थी। दो-तीन बार पंचायतों ने गांवों के युवाओं के जरिये सैनिटाइजर स्प्रे करवाया था। लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद सामान्य दिनचर्या लौट आई। प्रशासन आवाजाही से रोक हटा ली। सरकार की ओर से दोबारा सैनिटाइजर स्प्रे तक नहीं करवाया गया। उधर, गांव के लोग भी पुराने ढर्रे पर लौट आए। सामूहिक हुक्के और ताश दोबारा शुरू हो गए। आवाजाही और बाहर से आने वालों पर भी कोई नजर नहीं रखी जा रही। हालांकि कुछ गांवों में कोरोना मरीज मिलने के बाद दहशत के चलते एहतियात फिर बरतनी शुरू हुई है। ककराना के सरपंच हरि भगवान ने बताया कि पहले एक केस मिलने के बाद पूरे गांवों को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया था। वह खुलने के बाद लोगों ने एहतियात बरता। अब बवाना में रहने वाले गांव के युवक को कोरोना की पुष्टि हुई है। तो फिर कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। किलोई दोपाना में एक मरीज मिलने के बाद फिर सख्ती शुरू हो गई है। गांव के किसान राजकुमार ने कहा कि सभी एक-दूसरे को समझा रहे हैं कि हिदायतों का पालन करो।
इन गांवों में ज्यादा केस
अब तक सबसे ज्यादा पांच केस दातौर में निकल चुके हैं। इनके अलावा गांधरा में चार, रिठाल नरवाल, कबूलपुर, इमलीगढ़ और ककराना में दो-दो मरीज मिले हैं। इनके अलावा सैंपाल, किलोई दोपाना, नसीरपुर, बहुअकबरपुर, बोहर, संघेड़ा, गिरावर, आसन, भैणी चंद्रपाल, भैंसरू कलां, खरावड़, गढ़ी सांपला, रुड़की आदि गांवों में कोविड पॉजिटिव केस मिल चुके हैं।
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शुरू में लोगों ने एहतियात बरती। सामूहिक हुक्के, ताश बंद किए, ठीकरी पहरे लगाए, बाहरी लोगों की एंट्री बंद की। लेकिन अब गांवों में लोग लापरवाही कर रहे हैं, बीमारी की गंभीरता को नहीं समझ रहे। आवाजाही खुल गई है, सामूहिक बैठकें शुरू हो गई हैं। पचास से कहीं ज्यादा लोगों वाली शादियां हो रही हैं। प्रशासन ने भी गांवों में दोबारा सैनिटाइजर स्प्रे नहीं करवाया।
प्रीत सिंह, प्रधान, किसान सभा।
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कोरोना की दस्तक के साथ गांवों में सख्त अनुशासन लागू कर दिया गया। प्रशासन ने तो ठीकरी पहरे लगाने के आदेश दिए थे। लेकिन बहुत से गांवों ने खुद ही सामूहिक हुक्का और ताश बंद कर दी। गांव किलोई के किसान राज कुमार (60) ने अपने जीवन में यह पहली बार देखा था कि कोरोना के डर से सामूहिक हुक्के बंद हो गए थे। बहुत से गांवों में बच्चों और बुजुर्गों को घरों में रखा गया। गांव से बाहर आवश्यक कार्य के लिए जाने की इजाजत दी गई। गांव में से होकर किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। किसी के घर बाहर से आने वाले की सूचना तुरंत पंचायतों तक पहुंचती थी। दो-तीन बार पंचायतों ने गांवों के युवाओं के जरिये सैनिटाइजर स्प्रे करवाया था। लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद सामान्य दिनचर्या लौट आई। प्रशासन आवाजाही से रोक हटा ली। सरकार की ओर से दोबारा सैनिटाइजर स्प्रे तक नहीं करवाया गया। उधर, गांव के लोग भी पुराने ढर्रे पर लौट आए। सामूहिक हुक्के और ताश दोबारा शुरू हो गए। आवाजाही और बाहर से आने वालों पर भी कोई नजर नहीं रखी जा रही। हालांकि कुछ गांवों में कोरोना मरीज मिलने के बाद दहशत के चलते एहतियात फिर बरतनी शुरू हुई है। ककराना के सरपंच हरि भगवान ने बताया कि पहले एक केस मिलने के बाद पूरे गांवों को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया था। वह खुलने के बाद लोगों ने एहतियात बरता। अब बवाना में रहने वाले गांव के युवक को कोरोना की पुष्टि हुई है। तो फिर कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। किलोई दोपाना में एक मरीज मिलने के बाद फिर सख्ती शुरू हो गई है। गांव के किसान राजकुमार ने कहा कि सभी एक-दूसरे को समझा रहे हैं कि हिदायतों का पालन करो।
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इन गांवों में ज्यादा केस
अब तक सबसे ज्यादा पांच केस दातौर में निकल चुके हैं। इनके अलावा गांधरा में चार, रिठाल नरवाल, कबूलपुर, इमलीगढ़ और ककराना में दो-दो मरीज मिले हैं। इनके अलावा सैंपाल, किलोई दोपाना, नसीरपुर, बहुअकबरपुर, बोहर, संघेड़ा, गिरावर, आसन, भैणी चंद्रपाल, भैंसरू कलां, खरावड़, गढ़ी सांपला, रुड़की आदि गांवों में कोविड पॉजिटिव केस मिल चुके हैं।
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शुरू में लोगों ने एहतियात बरती। सामूहिक हुक्के, ताश बंद किए, ठीकरी पहरे लगाए, बाहरी लोगों की एंट्री बंद की। लेकिन अब गांवों में लोग लापरवाही कर रहे हैं, बीमारी की गंभीरता को नहीं समझ रहे। आवाजाही खुल गई है, सामूहिक बैठकें शुरू हो गई हैं। पचास से कहीं ज्यादा लोगों वाली शादियां हो रही हैं। प्रशासन ने भी गांवों में दोबारा सैनिटाइजर स्प्रे नहीं करवाया।
प्रीत सिंह, प्रधान, किसान सभा।