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विजेंदर का ‘सिंह’ कनेक्शन, इस बार भी किंग बनने की बेताबी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 10 Oct 2015 01:50 AM IST
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मैनचेस्टर में बॉक्सर विजेंदर सिंह एम्यूचर बॉक्सिंग वाली जिंदगी को छोड़कर शनिवार को नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे। विजेंदर सिंह खुद यह बात कहते हैं कि प्रोफेशनल बॉक्सिंग में मेरी यह दूसरी जिंदगी है। पहले भी सिंह इज किंग रहा और इस बार भी देश को निराश नहीं होने दूंगा।
विजेंदर कहते हैं कि मैं लंबे समय से ‘सिंह इज किंग’ गाना सुनता हूं, क्योंकि यह गाना मेरे नाम से जुड़ जाता है। मेरे नाम में भी सिंह आता है और सिंह पहले भी किंग रहा है तो आगे भी किंग ही रहेगा। अभी भी यही गाना सुनकर प्रैक्टिस कर रहा हूं।
‘अमर उजाला’ से फोन पर खास बातचीत में विजेंदर ने कहा कि मेरे लिए पहली जिंदगी उस समय शुरू हुई, जब मैं पहली बार 2001 में जर्मनी में खेलने गया था। जिंदगी में काफी कुछ मिला और कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप, ओलंपिक समेत कई जगह मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। यह जरूर था कि उस समय अपने कोच साथ रहते थे, अपने ही साथी होते थे। लेकिन अब यह एकदम नई जिंदगी की तरह है, क्योंकि नई जगह, नये कोच और नये साथी रहेंगे। प्रोफेशनल के नियम भी काफी अलग हैं, लेकिन हौसला आज भी बरकरार है। क्योंकि मेरी जीत से दूसरे बॉक्सरों का भविष्य सुधर सकता है और मैं अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी बॉक्सरों व देश के लिए ही खेलूंगा। रिंग के अंदर भारतीय ताकत दिखाएंगे।
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सोनी व्हाइटिंग से होने वाली फाइट को लेकर मेरे साथी और अन्य बॉक्सर भी काफी उत्साहित हैं। विजेंदर के कोच रहे द्रोणाचार्य अवार्डी जगदीश सिंह मानते हैं कि अगर वह पूरी ताकत व नई तकनीक के साथ खेलता है तो प्रोफेशनल में जीत दर्ज कर सकता है।
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विजेंदर कहते हैं कि मैं लंबे समय से ‘सिंह इज किंग’ गाना सुनता हूं, क्योंकि यह गाना मेरे नाम से जुड़ जाता है। मेरे नाम में भी सिंह आता है और सिंह पहले भी किंग रहा है तो आगे भी किंग ही रहेगा। अभी भी यही गाना सुनकर प्रैक्टिस कर रहा हूं।
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‘अमर उजाला’ से फोन पर खास बातचीत में विजेंदर ने कहा कि मेरे लिए पहली जिंदगी उस समय शुरू हुई, जब मैं पहली बार 2001 में जर्मनी में खेलने गया था। जिंदगी में काफी कुछ मिला और कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप, ओलंपिक समेत कई जगह मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। यह जरूर था कि उस समय अपने कोच साथ रहते थे, अपने ही साथी होते थे। लेकिन अब यह एकदम नई जिंदगी की तरह है, क्योंकि नई जगह, नये कोच और नये साथी रहेंगे। प्रोफेशनल के नियम भी काफी अलग हैं, लेकिन हौसला आज भी बरकरार है। क्योंकि मेरी जीत से दूसरे बॉक्सरों का भविष्य सुधर सकता है और मैं अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी बॉक्सरों व देश के लिए ही खेलूंगा। रिंग के अंदर भारतीय ताकत दिखाएंगे।
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सोनी व्हाइटिंग से होने वाली फाइट को लेकर मेरे साथी और अन्य बॉक्सर भी काफी उत्साहित हैं। विजेंदर के कोच रहे द्रोणाचार्य अवार्डी जगदीश सिंह मानते हैं कि अगर वह पूरी ताकत व नई तकनीक के साथ खेलता है तो प्रोफेशनल में जीत दर्ज कर सकता है।