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विजय नगर हत्याकांड : कोर्ट ने माना, पुलिस जांच में घोर लापरवाही

Tue, 24 Oct 2023 02:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 24 Oct 2023 02:48 AM IST
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Vijay Nagar murder case: Court admitted, gross negligence in police investigation
रोहतक। विजय नगर में करीब दो साल पहले हुए चौहरे हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। अदालत ने 40 पेज के फैसले में पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही लिखा है कि पुलिस ने ऐसी जांच की है, जिसे डीजीपी के नोटिस में लाना जरूरी है। साथ ही पुलिस से अदालत ने 29 नवंबर तक चोरी के केस से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड मांगा है।
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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 27 अगस्त 2021 को विजय नगर के प्राॅपर्टी डीलर प्रदीप उर्फ बबलू, उसकी पत्नी, बेटी व सास की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बबलू के बेटे अभिषेक उर्फ मोनू को गिरफ्तार किया था। खुलासा किया था कि अभिषेक अपने पिता से पांच लाख रुपये मांग रहा था। न देने पर परिवार के चार लोगों की हत्या कर दी। पुलिस ने अभिषेक के मामा प्रवीण की शिकायत पर कार्रवाई की थी। इसी बीच अभिषेक के नाना ने 16 अक्तूबर 2021 को शिवाजी कॉलोनी थाने में आईपीसी की धारा 380 व 454 के तहत केस दर्ज कराया। चोरी के केस में आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की। अदालत ने उसे खारिज दिया। इसी बीच चोरी के केस में आरोपी व शिकायतकर्ता पक्ष के बीच समझौता हो गया और पुलिस ने फाइल ही बंद कर दी। इसी बीच अपने मामा-पिता, बहन व नानी की हत्या के आरोप में सुनारिया जेल में बंद अभिषेक उर्फ मोनू के वकील शिवराज मलिक ने अदालत में याचिका दायर कर पुलिस की ओर से चोरी के केस की गई जांच पर सवाल उठाए। अदालत ने पुलिस के उन अधिकारियों से शपथ पत्र मांगा, जो केस की जांच से जुड़े थे। दोनों पक्षों की बहस के बाद अब अदालत ने 40 पेज का ऑर्डर जारी किया है, जिसमें चोरी केस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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अदालत ने यूं किए सवाल
चौहरे हत्याकांड के बाद घटनास्थल की वीडियोग्राफी क्यों नहीं करवाई गई।
घर के जेवरात व प्रॉपर्टी के कागजात को हत्या के केस प्रॉपर्टी क्यों नहीं बनाया गया।
चोरी की एफआईआर दर्ज कराते समय शिकायतकर्ता ने जेवरात व प्रॉपर्टी के कागजात का जिक्र किया, लेकिन हत्या के केस में कोई जिक्र नहीं है।
अग्रिम जमानत पर बहस के दौरान अदालत के सामने आई वीडियो क्लीप, हत्या के केस के रिकॉर्ड में क्यों नहीं शामिल

अदालत ने 30 पेज का फैसला दिया है, जिसमें पुलिस से चोरी के केस से जुड़ा रिकॉर्ड 29 नवंबर तक मांगा है। साथ ही वे फैसले का अवलोकन कर रहे हैं।
सुशील पांचाल, वकील, पीड़ित पक्ष

अदालत ने फैसले में पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। डीजीपी तक फैसले की कॉपी भेजी गई है। वह मंगलवार को केस में पुलिस जांच को लेकर खुलासा करेंगे।
शिवराज मलिक, वकील बचाव पक्ष
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