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बीस दिन में सब्जियों के दाम आधे होने की उम्मीद
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बिक्री के लिए रखीं सब्जियां। अमर उजाला
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उपभोक्ताओं को महंगी सब्जियों से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। सब्जी कारोबारियों का दावा है कि जल्द ही नजदीकी राज्यों से कुछ चीजों की आवक शुरू हो जाएगी। इससे करीब बीस दिन में सब्जियों के रेट आधे तक होने के आसार हैं।
फिलहाल टमाटर बेंगलुरु और नासिक से आ रहा है, जिसके होलसेल रेट 40 से 60 रुपये प्रति किलो हैं। प्याज भी नासिक से आ रहा है, उसके होलसेल दाम 20-30 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं। नागपुर से आ रहे संतरे के रेट 30-40 रुपये के बीच हैं और कश्मीर से आ रहा सेब 50-80 रुपये के बीच चल रहा है। मटर हिमाचल प्रदेश से आ रही है। उसके होलसेल रेट 80-100 रुपये प्रति किलो हैं। उत्तर प्रदेश से आ रहा आलू 16 से 20 रुपये के बीच है। राजस्थान से आ रही गाजर 20-30 रुपये के बीच है, जबकि मध्यप्रदेश से आ रहे खीरे का होलसेल रेट 10 से 15 रुपये प्रति किलो है। लेकिन जल्द ही दूसरे राज्यों से सब्जियों की आमद शुरू हो जाएगी।
सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सोनू छाबड़ा ने बताया कि जल्द पंजाब से आलू और मटर आनी शुरू हो जाएगी, इससे मटर के रेट काफी कम हो जाएगा। इसी तरह प्याज अलवर से आना शुरू हो जाएगा, उसके भी रेट कम होंगे। सबसे ज्यादा असर पालक के आने से होगा। हर साल ऐसा ही होता है। पालक काफी मात्रा में मंडी में आने के बाद सभी सब्जियों के रेट कम हो जाते हैं। लगभग बीस दिन में ही सभी सब्जियों के रेट करीब आधे तक होने के आसार हैं।
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डीजल रेट घटने से पड़ा फर्क
सोनू छाबड़ा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डीजल, पेट्रोल के रेट घटाने का असर दिखा है। चार दिन पहले सब्जी का जो ट्रक 50 हजार रुपये में आ रहा था, अब 45 हजार में आ रहा है। हालांकि, इसका असर उपभोक्ता तक बहुत ज्यादा नहीं पहुंचेगा पर सब्जी के रेट में 50 पैसे प्रति किलो की गिरावट आई है। हरियाणा सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल पर वैट घटाने से और फर्क पड़ेगा, लेकिन इसका असर करीब एक सप्ताह बाद नजर आएगा।
बारिश से महंगी हुईं सब्जियां
उन्होंने बताया कि सब्जियां महंगी होने का सबसे बड़ा कारण बारिश रही। बारिश ने फसलें काफी बर्बाद कर दीं, जिससे रेट बढ़ गए। बारिश से ही नासिक और बेंगलुरु में टमाटर की फसल खराब हुई। हिमाचल में मटर की पहली फसल खराब हो गई। इसी तरह अलवर में प्याज की पहली फसल बर्बाद हो गई, किसानों ने दूसरी फसल लगाई, उसके आने में कुछ समय लगेगा। इतनी ज्यादा बारिश न होती तो सब्जियों के दाम न बढ़ते।
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फिलहाल टमाटर बेंगलुरु और नासिक से आ रहा है, जिसके होलसेल रेट 40 से 60 रुपये प्रति किलो हैं। प्याज भी नासिक से आ रहा है, उसके होलसेल दाम 20-30 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं। नागपुर से आ रहे संतरे के रेट 30-40 रुपये के बीच हैं और कश्मीर से आ रहा सेब 50-80 रुपये के बीच चल रहा है। मटर हिमाचल प्रदेश से आ रही है। उसके होलसेल रेट 80-100 रुपये प्रति किलो हैं। उत्तर प्रदेश से आ रहा आलू 16 से 20 रुपये के बीच है। राजस्थान से आ रही गाजर 20-30 रुपये के बीच है, जबकि मध्यप्रदेश से आ रहे खीरे का होलसेल रेट 10 से 15 रुपये प्रति किलो है। लेकिन जल्द ही दूसरे राज्यों से सब्जियों की आमद शुरू हो जाएगी।
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सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सोनू छाबड़ा ने बताया कि जल्द पंजाब से आलू और मटर आनी शुरू हो जाएगी, इससे मटर के रेट काफी कम हो जाएगा। इसी तरह प्याज अलवर से आना शुरू हो जाएगा, उसके भी रेट कम होंगे। सबसे ज्यादा असर पालक के आने से होगा। हर साल ऐसा ही होता है। पालक काफी मात्रा में मंडी में आने के बाद सभी सब्जियों के रेट कम हो जाते हैं। लगभग बीस दिन में ही सभी सब्जियों के रेट करीब आधे तक होने के आसार हैं।
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डीजल रेट घटने से पड़ा फर्क
सोनू छाबड़ा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डीजल, पेट्रोल के रेट घटाने का असर दिखा है। चार दिन पहले सब्जी का जो ट्रक 50 हजार रुपये में आ रहा था, अब 45 हजार में आ रहा है। हालांकि, इसका असर उपभोक्ता तक बहुत ज्यादा नहीं पहुंचेगा पर सब्जी के रेट में 50 पैसे प्रति किलो की गिरावट आई है। हरियाणा सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल पर वैट घटाने से और फर्क पड़ेगा, लेकिन इसका असर करीब एक सप्ताह बाद नजर आएगा।
बारिश से महंगी हुईं सब्जियां
उन्होंने बताया कि सब्जियां महंगी होने का सबसे बड़ा कारण बारिश रही। बारिश ने फसलें काफी बर्बाद कर दीं, जिससे रेट बढ़ गए। बारिश से ही नासिक और बेंगलुरु में टमाटर की फसल खराब हुई। हिमाचल में मटर की पहली फसल खराब हो गई। इसी तरह अलवर में प्याज की पहली फसल बर्बाद हो गई, किसानों ने दूसरी फसल लगाई, उसके आने में कुछ समय लगेगा। इतनी ज्यादा बारिश न होती तो सब्जियों के दाम न बढ़ते।