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सब्जी मंडी केस : झाड़ू की पिटाई से नहीं, धूम्रपान से हुई थी बीमार चालक की मौत
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रोहतक। चार साल पहले नई सब्जी मंडी में सोनीपत जिले के खरखौदा निवासी मुकेश की मौत आढ़ती के पीटने से नहीं, बल्कि बीमारी के बावजूद धूम्रपान करने से हुई थी। अदालत में बचाव पक्ष यह साबित करने में कामयाब रहा। सबूतों के अभाव में एडीजे रजनी यादव की अदालत ने हत्या के आरोपी आढ़ती उदय, उसके साथ धर्मपाल व गौतम को बरी कर दिया। केस में सात आरोपियों को पुलिस ने जांच में ही निकाल दिया था।
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक, झज्जर जिले के बहादुरगढ़ निवासी नन्हो देवी ने 2020 में शिवाजी कॉलोनी थाने में शिकायत दी थी कि उसका मायका खरखौदा में है। उसका भाई मुकेश पिकअप चलाता था। मई 2020 में उसके भतीजे सुनील का फोन आया और बोला कि चाचा मुकेश की मौत हो गई है। जब वह मायके पहुंची तो शव को श्मशान ले जाने की तैयारी चल रही थी। कुछ समय बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसे तेरहवीं के बाद कुछ ऐसी बात पता चली। रोहतक की सब्जी मंडी में जाकर दुकान की सीसीटीवी फुटेज देखी, जहां उसके भाई की तबीयत बिगड़ी थी। पता चला कि आढ़ती उदय व मुकेश के बीच सब्जी की गठरी की संख्या को लेकर कहासुनी हो गई थी। मारपीट के कारण ही मुकेश की जान गई है। पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ हत्या व हत्या ही साजिश का मामला दर्ज किया था। केस की जांच करते हुए पुलिस ने सात आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी। आरोपी आढ़ती उदय निवासी खरखौदा व उसके दो साथी गौतम व धर्मपाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। तभी से जिला अदालत में केस चल रहा था।
बीमारी का रिकाॅर्ड, डॉक्टर की गवाही साबित हुई अहम
बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ का कहना है कि उसने अदालत के सामने सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के 12 केस रखे। मुकेश की बीमारियों का रिकाॅर्ड निकलवाया। पता चला कि मुकेश का पहले से उपचार चल रहा था। उसके लिए शराब व धूम्रपान करना हानिकारक था। इसके लिए अदालत में उपचार करने वाले डॉक्टर की भी गवाही करवाई। साबित हुआ कि मुकेश की मौत मारपीट से नहीं, बल्कि बीमारी के कारण हुई है। इतना ही नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं है, जिससे पता लग सके कि उसकी मौत मारपीट से हुई है।
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पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक, झज्जर जिले के बहादुरगढ़ निवासी नन्हो देवी ने 2020 में शिवाजी कॉलोनी थाने में शिकायत दी थी कि उसका मायका खरखौदा में है। उसका भाई मुकेश पिकअप चलाता था। मई 2020 में उसके भतीजे सुनील का फोन आया और बोला कि चाचा मुकेश की मौत हो गई है। जब वह मायके पहुंची तो शव को श्मशान ले जाने की तैयारी चल रही थी। कुछ समय बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसे तेरहवीं के बाद कुछ ऐसी बात पता चली। रोहतक की सब्जी मंडी में जाकर दुकान की सीसीटीवी फुटेज देखी, जहां उसके भाई की तबीयत बिगड़ी थी। पता चला कि आढ़ती उदय व मुकेश के बीच सब्जी की गठरी की संख्या को लेकर कहासुनी हो गई थी। मारपीट के कारण ही मुकेश की जान गई है। पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ हत्या व हत्या ही साजिश का मामला दर्ज किया था। केस की जांच करते हुए पुलिस ने सात आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी। आरोपी आढ़ती उदय निवासी खरखौदा व उसके दो साथी गौतम व धर्मपाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। तभी से जिला अदालत में केस चल रहा था।
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बीमारी का रिकाॅर्ड, डॉक्टर की गवाही साबित हुई अहम
बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ का कहना है कि उसने अदालत के सामने सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के 12 केस रखे। मुकेश की बीमारियों का रिकाॅर्ड निकलवाया। पता चला कि मुकेश का पहले से उपचार चल रहा था। उसके लिए शराब व धूम्रपान करना हानिकारक था। इसके लिए अदालत में उपचार करने वाले डॉक्टर की भी गवाही करवाई। साबित हुआ कि मुकेश की मौत मारपीट से नहीं, बल्कि बीमारी के कारण हुई है। इतना ही नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं है, जिससे पता लग सके कि उसकी मौत मारपीट से हुई है।
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