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Rohtak News: वट सावित्री व्रत आज, वट वृक्ष के नीचे पूजा का विधान
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रोहतक। वट सावित्री व्रत आज वीरवार को रखा जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करने के साथ पति की लंबी आयु के लिए उपवास करती हैं। इस व्रत की मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के जीवन के लिए यमराज की पूजा बरगद पेड़ के नीचे की थी। यही कारण है कि इस व्रत में वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
ज्येष्ठ माह में बेहद तीव्र गर्मी पड़ती है। इसमें सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, जो बहुत कठिन होता है। वट सावित्री व्रत रखने से गृहस्थ और विवाहित जीवन के संघर्ष की समाप्ति होती है। पति के तरक्की के योग बनते हैं। खुशहाल गृहस्थ जीवन के लिए महिलाएं बरगद की परिक्रमा करती हैं, उसके चारों ओर सात बार कलावा बांधती हैं।
महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए रखती हैं व्रत
हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री ने यमराज को भ्रमित कर उन्हें अपने पति सत्यवान के प्राण को लौटने पर विवश किया था। इसी के कारण हर साल सुहागिन महिलाएं अपने पति की कुशलता वह दीर्घायु की कामना कर वट सावित्री उपवास रखती हैं।
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पूजन सामग्री
पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि वट सावित्री व्रत की पूजा में सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा, भीगा हुआ काला चना, कलावा, सफेद कच्चा सूत, रक्षा सूत्र, बांस का पंखा, सवा मीटर लाल कपड़ा, पीले फूल, मिठाई, फल, धूप, दीपक, मिट्टी का दिया, सिंदूर, अक्षत रोली, मीठा पान, लौंग-इलायची और सुपारी चढ़ाई जाती है।
शुभ मुहूर्त
-पूजा का शुभ मुहूर्त 6 जून को सुबह 11:52 बजे से लेकर दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा।
-वट सावित्री उपवास 6 जून को सुबह से शाम 5:34 बजे तक रखा जाएगा।
-धृति नाम का योग पूरे दिन प्राप्त होगा।
शनि जयंती पर सरसों के तेल से करें अभिषेक
पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि 6 जून को शनि जयंती भी मनाई जाएगी। इस दिन सुबह अपने घर के आसपास स्थित किसी भी शनि मंदिर में जाकर भगवान शनिदेव की प्रतिमा को प्रणाम कर सरसों के तेल से अभिषेक करें। शनिदेव को काले तिल, उड़द की दाल, नीले फूल और नीले वस्त्र अर्पित कर तेल का दीपक जलाएं। ओम शनिश्चराय नमः मंत्र का भ्प भी करें।
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ज्येष्ठ माह में बेहद तीव्र गर्मी पड़ती है। इसमें सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, जो बहुत कठिन होता है। वट सावित्री व्रत रखने से गृहस्थ और विवाहित जीवन के संघर्ष की समाप्ति होती है। पति के तरक्की के योग बनते हैं। खुशहाल गृहस्थ जीवन के लिए महिलाएं बरगद की परिक्रमा करती हैं, उसके चारों ओर सात बार कलावा बांधती हैं।
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महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए रखती हैं व्रत
हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री ने यमराज को भ्रमित कर उन्हें अपने पति सत्यवान के प्राण को लौटने पर विवश किया था। इसी के कारण हर साल सुहागिन महिलाएं अपने पति की कुशलता वह दीर्घायु की कामना कर वट सावित्री उपवास रखती हैं।
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पूजन सामग्री
पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि वट सावित्री व्रत की पूजा में सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा, भीगा हुआ काला चना, कलावा, सफेद कच्चा सूत, रक्षा सूत्र, बांस का पंखा, सवा मीटर लाल कपड़ा, पीले फूल, मिठाई, फल, धूप, दीपक, मिट्टी का दिया, सिंदूर, अक्षत रोली, मीठा पान, लौंग-इलायची और सुपारी चढ़ाई जाती है।
शुभ मुहूर्त
-पूजा का शुभ मुहूर्त 6 जून को सुबह 11:52 बजे से लेकर दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा।
-वट सावित्री उपवास 6 जून को सुबह से शाम 5:34 बजे तक रखा जाएगा।
-धृति नाम का योग पूरे दिन प्राप्त होगा।
शनि जयंती पर सरसों के तेल से करें अभिषेक
पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि 6 जून को शनि जयंती भी मनाई जाएगी। इस दिन सुबह अपने घर के आसपास स्थित किसी भी शनि मंदिर में जाकर भगवान शनिदेव की प्रतिमा को प्रणाम कर सरसों के तेल से अभिषेक करें। शनिदेव को काले तिल, उड़द की दाल, नीले फूल और नीले वस्त्र अर्पित कर तेल का दीपक जलाएं। ओम शनिश्चराय नमः मंत्र का भ्प भी करें।