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नियम 134ए के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला नहीं मिलने पर अभिभावक बोले , मिन्नतें की कर हार चुके,

Wed, 22 Dec 2021 02:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 22 Dec 2021 02:33 AM IST
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Under Rule 134A, the parents said that the children are not getting admission in private schools, they have lost the tax of pleading
134 ए में पास हाने के बाद भी स्कूल में दाखिला नहीं मिलने पर लघु सचिवालय में प्रदर्शन करते अभ्यार्थी?
रोहतक। नियम 134ए के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सपना बन कर रह गया है। शिक्षा नियम व अदालत के निर्देश के बावजूद निजी स्कूल बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं। बच्चों को लेकर इधर-उधर भटक रहे अभिभावक कभी स्कूल तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों की चौखट पर मिन्नतें करके हार चुके हैं। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो मंगलवार को लघु सचिवालय में उपायुक्त कार्यालय पर करीब 5 घंटे रोष प्रदर्शन किया।
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उपायुक्त से मिल कर उन्हें अपना दर्द सुनाने के लिए अभिभावक सुबह 8 बजे से ही लघु सचिवालय पहुंचना शुरू हो गए। यहां वे शाम करीब 4 बजे तक जमें रहे। इस बीच दोपहर करीब साढ़े बारह बजे उपायुक्त से बातचीत हुई। यह बातचीत करीब आधे घंटे चली। इसके बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। उपायुक्त ने कहा कि नवंबर में पत्र जारी हुआ था। इसमें लिखा है कि प्रवेश के लिए स्कूल पर कोई दबाव नहीं डाला जाएगा। इससे आहत अभिभावकों ने नारेबाजी कर सरकार व प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
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अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार बच्चों ने आवेदन किए। उनकी परीक्षा हुई है। परिणाम जारी हुआ। अब स्कूल प्रवेश देने से मना कर रहे हैं। जबकि सभी दस्तावेज पूरे हैं। एसएलसी भी ले चुके हैं। इसके बावजूद बच्चे दाखिले से वंचित हैं।
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स्कूल प्रबंधन स्टे ऑर्डर के कारण प्रवेश न देने का हवाला दे रहा है। जबकि अदालत ने अपने निर्देश में बच्चों की पढ़ाई किसी भी सूरत में बाधित न होने की बात कही है। शैक्षणिक सत्र आधा बीत चुका है। बच्चों की परीक्षा भी नजदीक है। जबकि अब तक दाखिला प्रक्रिया ही चल रही है। इस पर भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे दाखिले के लिए मारे-मारे फिरने को विवश हैं।
इस मामले को लेकर संगठन हाई कोर्ट में न्याय की अपील लगाए हुए है। नियमानुसार एसएचओ को स्कूल संचालकों के खिलाफ केस दर्ज करने का अधिकार है। इसके बावजूद विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को जिला शिक्षा अधिकारी के पास भेज दिया जाता है। शासन व प्रशासन विद्यार्थियों के साथ गलत कर रहा है। उनका हक मारा जा रहा है। इसलिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
- अधिवक्ता सत्यवीर सिंह हुड्डा, अध्यक्ष, दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन संगठन।
स्कूल ने दरवाजे से वापस भेज दी मेरी बेटी
लघु सचिवालय परिसर में अपना दर्द साझा करते हुए एक पिता भावुक हो उठा। कंपकंपाते होठों के साथ कहा कि मैं एक इलेक्ट्रीशियन हूं। मेरी एक ही बेटी है। यह दूसरी कक्षा में है। शहर के एक अच्छे स्कूल में उसे दाखिला मिलना था। नाम आने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने उसे दरवाजे से ही वापस भेज दिया। हमारी एक बात तक नहीं सुनी। अब कैसे अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा दिला पाऊंगा। कोई सुनने वाला नहीं है।
काफी समय से बीपी का मरीज हूं। मेरा 5 साल का बेटा है। कड़कड़ाती ठंड में उसे पेपर दिलाने ले गया था। पेपर में पास भी हो गया। अब भी उसे प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। पहले पता होता तो पुराने स्कूल से एसएलसी नहीं लाता। अब बेटा पढ़े तो कहां और कैसे।
- दीपक कुमार, अभिभावक।
मेरा पोता दूसरी कक्षा में पढ़ता है। उसके माता-पिता बेरोजगार हैं। शहर के एक नामी स्कूल में उसका नाम आया है। सारे दस्तावेज पूरे हैं। फिर भी दाखिला नहीं दिया गया है।
- राजकुमारी दहिया, अभिभावक।
मजदूरी कर अपना पेट भरता हूं। मेरी तीन बेटियां हैं। एक ने नियम 134ए के तहत परीक्षा पास की है। सूची में उसे एक अच्छा स्कूल अलॉट हुआ है। स्कूल गए तो प्रबंधन ने धक्के मारकर बहार निकाल दिया। प्रवेश के नाम पर साफ कहा कि हम दाखिला नहीं करेंगे।
- मन्नू, अभिभावक।
बेटा हर्षित निजी स्कूल में पढ़ता है। उसे परीक्षा के बाद दूसरा स्कूल अलॉट हुआ है। इस कारण पुराने स्कूल से उसका एसएलसी भी निकलवा लिया है। स्कूल पहुंचे तो बच्चे को दाखिला देने से इनकार कर दिया। अब कहां जाएं, क्या करें, समझ नहीं आ रहा है।
- मीना रानी, अभिभावक।
17 को आया था परीक्षा का परिणाम
नियम 134ए के तहत पांच दिसंबर को 2278 विद्यार्थियों की परीक्षा ली गई थी। इसका परिणाम संशोधन के बाद 16 दिसंबर वीरवार देर रात पोर्टल पर जारी हुआ। परिणाम में जिले के 1797 विद्यार्थी पास हुए।
10 प्रतिशत सीटें किस आधार पर की अलॉट
रोहतक निजी स्कूल एसोसिएशन के सचिव ने कहा कि व्यवस्था को लेकर विवाद उभरा है। स्कूल संचालकों ने सरकार से पूछा है कि नियम 134ए के तहत 10 प्रतिशत सीटें किस आधार पर अलॉट की जा रही हैं। यह व्यवस्था स्पष्ट की जाए। सत्र आधा बीतने के बाद स्कूल अलॉटमेंट समझ नहीं आ रहा है। स्कूलों का शुल्क भी सरकार पर बकाया है। इसलिए स्कूल संचालकों ने प्रवेश नहीं देने का फैसला लिया है। हमारी समस्याओं का समाधान किया जाए।

वर्जन:
नियम 134ए के तहत कुछ बच्चों को प्रवेश न मिलने की शिकायतें मिली हैं। इनका समाधान किया जाएगा। कोई भी स्कूल दाखिले से इनकार नहीं कर सकता है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करने का निर्देश जारी कर दिया गया है। बीईओ कार्यालय से जिन स्कूलों के बकाया बिल मंजूर हुए हैं, उनका भुगतान कर दिया गया है।
- डॉ. विजय लक्ष्मी नांदल, जिला शिक्षा अधिकारी।
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