{"_id":"9f5c3a3473c54463ee182e576b7a0838","slug":"ultrasound-center-helth-demand-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य विभाग की सख्ती ने छुड़ाया निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों का पसीना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वास्थ्य विभाग की सख्ती ने छुड़ाया निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों का पसीना
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 15 Jul 2015 02:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई सख्ती ने निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का पसीना छुड़ा रखा है।
पिछले दो साल के आंकड़ों की बात करें तो अधिकारियों की सख्ती देखते हुए जिले के करीब 13 निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों ने स्वयं की जांच मशीन अधिकारियों के हवाले कर दी।
उनका स्पष्ट कहना था कि वे कानूनी पचड़ों में नहीं फंसना चाहता, इसके चलते उनके अन्य कार्य भी प्रभावित होते हैं। इस पर अधिकारियों ने इस मशीनों को सील कर दिया।
कुछ जांच केंद्रों ने तो अपनी मशीन ही सेल कर दी। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देश हैं कि प्रदेश में एक भी बेटी गर्भ में नहीं मरनी चाहिए।
विज्ञापन
इसके लिए हर जांच केंद्र पर नजर रखी हुई है। जिले भर में 46 अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र हैं और 34 एमटीपी सेंटर हैं। इनकी समय-समय पर जांच की जाती है।
पिछले दो माह की बात करें तो एक बार सभी पर छापामारी की जा चुकी है और आठ जांच केंद्रों पर शक के आधार पर छापामारी की गई।
यहां जांच के दौरान लिपिकीय खामी मिली, इस पर उन्हें चेतावनी दी गई है। इसके अलावा एक विशेष अभियान चलाया गया है कि इसमें अल्ट्रासाउंड संचालक महिलाओं व उनके परिजनों की विडियो रिकार्डिंग करेंगे। इसमें यदि वे लिंग के बारे में पूछते पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई होना निश्चित है।
विज्ञापन
पिछले दो साल के आंकड़ों की बात करें तो अधिकारियों की सख्ती देखते हुए जिले के करीब 13 निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों ने स्वयं की जांच मशीन अधिकारियों के हवाले कर दी।
उनका स्पष्ट कहना था कि वे कानूनी पचड़ों में नहीं फंसना चाहता, इसके चलते उनके अन्य कार्य भी प्रभावित होते हैं। इस पर अधिकारियों ने इस मशीनों को सील कर दिया।
विज्ञापन
कुछ जांच केंद्रों ने तो अपनी मशीन ही सेल कर दी। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देश हैं कि प्रदेश में एक भी बेटी गर्भ में नहीं मरनी चाहिए।
विज्ञापन
इसके लिए हर जांच केंद्र पर नजर रखी हुई है। जिले भर में 46 अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र हैं और 34 एमटीपी सेंटर हैं। इनकी समय-समय पर जांच की जाती है।
पिछले दो माह की बात करें तो एक बार सभी पर छापामारी की जा चुकी है और आठ जांच केंद्रों पर शक के आधार पर छापामारी की गई।
यहां जांच के दौरान लिपिकीय खामी मिली, इस पर उन्हें चेतावनी दी गई है। इसके अलावा एक विशेष अभियान चलाया गया है कि इसमें अल्ट्रासाउंड संचालक महिलाओं व उनके परिजनों की विडियो रिकार्डिंग करेंगे। इसमें यदि वे लिंग के बारे में पूछते पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई होना निश्चित है।