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Rohtak News: सिविल अस्पताल में बगैर रेडियोलॉजिस्ट हो रहे अल्ट्रासाउंड
Wed, 31 Jul 2024 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 31 Jul 2024 12:30 AM IST
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सिविल अस्पताल में अपनी बारी के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
रोहतक। नागरिक अस्पताल में कार्यरत एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट का भिवानी तबादला हो गया है। इनके जाने के बाद अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं है। मरीज पीजी डॉक्टर के भरोसे हैं। यह भी केवल अपने अनुभव व सीखने के लिए ही अल्ट्रासाउंड करते हैं।
अस्पताल में छह माह या इससे बाद की गर्भवती का अल्ट्रासाउंड होता ही नहीं है। इस लेवल टू के अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर जाना पड़ता है। फिलहाल बगैर किसी रेडियोलॉजिस्ट के अस्पताल में अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं, जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए विशेषज्ञों की सख्त जरूरत है।
चार माह की गर्भवती का हो रहा अल्ट्रासाउंड
नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट होने पर महज चार माह की गर्भवती का ही अल्ट्रासाउंड किया जाता रहा है। इसके ऊपर के मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों में जाना पड़ता है। लेवल-1 (1 से 4 माह) के गर्भधारण पर अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्र 600 रुपये वसूलते हैं। वहीं, लेवल-2 (4 माह से ऊपर) गर्भधारण पर 1500 से 2500 तक रुपये वसूलते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर भारी बोझ पड़ रहा है।
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एक अल्ट्रासाउंड में ही 30 मिनट से ज्यादा समय लगा रहे पीजी डॉक्टर
नागरिक अस्पताल में रोजाना 100 के करीब अल्ट्रसाउंड के लिए मरीज आते हैं। इसमें योग्य रेडियोलॉजिस्ट के न रहने पर पीजी डॉक्टर 30 मिनट से ज्यादा का समय लगा दे रहे हैं। इससे एक दिन में बड़ी मुश्किल से 24 भी अल्ट्रसाउंड हो रहे हैं।
वर्जन
रोहतक अस्पताल से मेरा तबादला भिवानी हो चुका है। यहां के बारे में कुछ नहीं कह सकती हूं। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने की जानकारी नहीं है। वहां लंबे समय से एक ही मशीन पर अब तक अल्ट्रसाउंड किया जाता रहा है।
- रीता गोयल, तत्कालीन रेडियोलॉजिस्ट, सिविल अस्पताल
वर्जन
रेडियोलॉजिस्ट के लिए डिमांड रखी गई है। जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट मिल जाएंगे। फिलहाल मरीजों को कोई समस्या नहीं आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने पीजी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को सीखने के उद्देश्य से अल्ट्रासाउंड की अनुमति दी हुई है।
-डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक
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अस्पताल में छह माह या इससे बाद की गर्भवती का अल्ट्रासाउंड होता ही नहीं है। इस लेवल टू के अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर जाना पड़ता है। फिलहाल बगैर किसी रेडियोलॉजिस्ट के अस्पताल में अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं, जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए विशेषज्ञों की सख्त जरूरत है।
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चार माह की गर्भवती का हो रहा अल्ट्रासाउंड
नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट होने पर महज चार माह की गर्भवती का ही अल्ट्रासाउंड किया जाता रहा है। इसके ऊपर के मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों में जाना पड़ता है। लेवल-1 (1 से 4 माह) के गर्भधारण पर अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्र 600 रुपये वसूलते हैं। वहीं, लेवल-2 (4 माह से ऊपर) गर्भधारण पर 1500 से 2500 तक रुपये वसूलते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर भारी बोझ पड़ रहा है।
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एक अल्ट्रासाउंड में ही 30 मिनट से ज्यादा समय लगा रहे पीजी डॉक्टर
नागरिक अस्पताल में रोजाना 100 के करीब अल्ट्रसाउंड के लिए मरीज आते हैं। इसमें योग्य रेडियोलॉजिस्ट के न रहने पर पीजी डॉक्टर 30 मिनट से ज्यादा का समय लगा दे रहे हैं। इससे एक दिन में बड़ी मुश्किल से 24 भी अल्ट्रसाउंड हो रहे हैं।
वर्जन
रोहतक अस्पताल से मेरा तबादला भिवानी हो चुका है। यहां के बारे में कुछ नहीं कह सकती हूं। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने की जानकारी नहीं है। वहां लंबे समय से एक ही मशीन पर अब तक अल्ट्रसाउंड किया जाता रहा है।
- रीता गोयल, तत्कालीन रेडियोलॉजिस्ट, सिविल अस्पताल
वर्जन
रेडियोलॉजिस्ट के लिए डिमांड रखी गई है। जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट मिल जाएंगे। फिलहाल मरीजों को कोई समस्या नहीं आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने पीजी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को सीखने के उद्देश्य से अल्ट्रासाउंड की अनुमति दी हुई है।
-डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक