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अपनी राजनीतिक मंशा पाले हुए हैं टीवाईसी कंपनी (टिकैत, योगेंद्र व दर्शनपाल)

Thu, 19 Aug 2021 01:05 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 01:05 AM IST
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TYC Company is keeping its political intentions
रोहतक। अनुशासनहीनता में संयुक्त किसान मोर्चा से निष्कासितों ने कहा कि किसान आंदोलन देश की आत्मा का आंदोलन है। यह किसी के बाप की बपौती नहीं, इसलिए हम आंदोलन में थे, हैं और रहेंगे। टीवाईसी कंपनी (राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव और कामरेड दर्शनपाल) अपनी राजनीतिक मंशा पाले हुए हैं। मिशन पंजाब तो कभी मिशन उत्तर प्रदेश की बात करते हैं। किसान आंदोलन सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि किसानों की मांगों के लिए है। ये आरोप बुधवार को सेक्टर पांच में आयोजित प्रेसवार्ता में 13 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा से निष्कासित किसान नेताओं ने लगाए।
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अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार, जगवीर सिंह रसोला, प्रदीप धनखड़ व डॉ. शमशेर ने संयुक्त रूप से कहा कि 13 अगस्त को सिंघु बॉर्डर पर एकतरफा हुए फैसले की जानकारी प्रेस के माध्यम से हुई, जिसमें हम चारों को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित किया गया। न तो नोटिस देकर जवाब मांगा गया और न ही जनरल मीटिंग में मुद्दा रखा गया। क्या एमएसपी पर बयान देना गलत था? पांच जून 2020 को आए काले कानून का सबसे पहले हरियाणा में विरोध हुआ। बावजूद इसके हरियाणा के ही किसान नेताओं पर निष्कासित करने की कार्रवाई की जा रही है। पहले लक्खा सिधाना सिंधू, बीएन सिंह श्रीपाल अंबावत, गुरुनाम चढूनी को निष्कासित किया और अब हमें अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया है। आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी राजनीतिक मंशा पूरी करना चाहते हैं। यूपी और पंजाब के चुनाव उनका लक्ष्य हैं। राकेश टिकैत और रज्जेवाल ने उत्तर प्रदेश में कोई टोल बंद कराया, जवाब नहीं। किसी नेता का विरोध किया, जवाब नहीं। उत्तर प्रदेश में एक भी मुकदमा दर्ज हुआ, जवाब नहीं। वहीं, 25 हजार मुकदमे हरियाणा के किसानों पर दर्ज हुए हैं।
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किसान नेताओं ने कहा कि योगेंद्र यादव तो पूरी तरह से राजनीतिक आदमी हैं। उनकी भारतीय स्वराज पार्टी है। उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में किसान मोर्चा के नाम से चुनाव लड़ा। योगेंद्र यादव बताएं कि रेवाड़ी व महेंद्रगढ़ में एक भी विरोध प्रदर्शन हुआ है? कम्यूनिस्ट दर्शनपाल भी राजनीतिक मंशा पाले हैं। उनकी प्राथमिकता पंजाब में पार्टी का खोया जनाधार तलाशना है। अब ये किसान आंदोलन की आड़ में राजनीति में आ गए हैं। एक सवाल के जवाब में कहा कि किसान आंदोलन आठ माह से ज्यादा समय से चल रहा है। क्या समय के साथ हमारी मांगें नहीं जुड़ेंगी। हम किसी को हराने अथवा जिताने नहीं आए हैं। हमें तो पूरी ताकत से किसानों की मांगों को पूरा करना है। मगर टीवाईसी कंपनी मिशन पंजाब, उत्तराखंड तो कभी मिशन उत्तर प्रदेश के हिसाब से चल रही है। किसी भी पार्टी को हराने अथवा जिताने से किसानों का हित नहीं होगा। जब किसान आंदोलन शुरू हुआ था, तब इसे गैर राजनीतिक चलाने का फैसला हुआ था, फिर क्यों ये नेता सरकार बनाने की मंशा पाल रहे हैं। नरेश टिकैत अपनी पार्टी रजिस्टर्ड करवा रहे हैं। शुरू में सरकार से वार्ता के लिए 40 लोगों के नाम तय हुए थे, मगर अमित शाह व राजनाथ सिंह की तरफ से 41वें व्यक्ति के रूप में टिकैत का नाम शामिल कराया। ये नाम जमीन से नहीं आया, बल्कि नेताओं ने शामिल करवाया, जिससे भी उनकी मंशा स्पष्ट होती है।
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