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Rohtak News: अदालत के आदेश पर एमडीयू में दो खिलाड़ियों को मिला प्रवेश

Thu, 12 Dec 2024 01:17 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 12 Dec 2024 01:17 PM IST
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Two players got admission in MDU on the orders of the court
सच व हक के लिए संघर्ष कर रहे एमपीएड विद्यार्थियों की बुधवार को जीत हुई। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय ने वरिष्ठ राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता रूपा व ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खिलाड़ी कपिल को प्रवेश दे दिया है।
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इस संबंध में न्यायिक अधिकारी प्रथम श्रेणी अमित श्योराण की अदालत ने बुधवार को यह फैसला दिया। इसके तहत एमडीयू को दोनों खिलाड़ियों को प्रवेश देने का निर्देश दिया। छात्र संगठन ने विद्यार्थियों के संघर्ष को सच की जीत बताया है।
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अधिवक्ता तरुण बुद्धिराजा व अधिवक्ता रवींद्र सिंह ने बताया कि अदालत ने एमपीएड कोर्स में प्रवेश काे लेकर दो खिलाड़ियों के केस में फैसला दिया है। फैसला खिलाड़ियों के हक में रहा। उन्हें प्रवेश से वंचित कर दिया गया है। उनकी जगह फर्जी प्रमाण पत्र देने वाले विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया था। इस मामले में विद्यार्थियों ने अपनी आवाज उठाई और अदालत ने पारदर्शी ढंग से न्याय किया। अदालत ने एमडीयू के अधिकारियों से भी जबाव तलब किया था। मंगलवार को विवि की ओर से अधिकारियों का जवाब आ गया था। इसके चलते बुधवार को फैसला सुनाया गया।
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स्वर्ण पदक विजेता रूपा नांदल व कपिल ने बताया कि पात्र होते हुए भी हमें एमडीयू के एमपीएड कोर्स में दाखिला नहीं मिला था। इस वजह से काफी परेशान हुई। अदालत से न्याय की आस थी। अदालत ने हमें दाखिला देकर राहत पहुंचाई है। एमपीएड की फीस जमा करा दी है। सीवाईएसएस (छात्र युवा संघर्ष समिति) के प्रदेश अध्यक्ष दीपक धनखड़ ने बताया कि सच की जीत हुई है। काबिल खिलाड़ियों काे दाखिला मिला है। एमडीयू के कुछ अधिकारी आखिर तक इनके विरुद्ध खड़े रहे। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ आवाज उठाने पर एमडीयू प्रशासन ने ग्रीवेंस कमेटी गठित की थी। इन दोनों खिलाड़ियों ने कमेटी के समक्ष अपना मुद्दा उठाया। कमेटी ने इन विद्यार्थियों के प्रवेश को गलत ठहराया। इसके बावजूद फर्जी प्रमाण पत्र से दाखिला लेने वाले खिलाड़ी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं, खिलाड़ी रूपा व कपिल को एमपीएड में दाखिला देने से मना कर दिया गया।

नतीजतन, खिलाड़ियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। जांच के फेर में फंसने से बचते हुए विवि प्रशासन ने फर्जी प्रमाण पत्र से एमपीएड में दिए गए प्रवेश रद्द कर दिए। केस की सुनवाई करते हुए अदालत ने खिलाड़ियों के पक्ष में फैसला दिया। एमडीयू अधिकारियों को इस मामले में जांच करनी चाहिए। इसमें दोषी मिलने वाले अधिकारी पर कार्रवाई करनी चाहिए।
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