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Rohtak News: 'टाइगर' के काटे का मुश्किल हुआ इलाज, प्लेटलेट्स के लिए रक्तदाताओं की तलाश
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रोहतक। टाइगर (डेंगू फैलाने वाला मच्छर) के काटे का इलाज मुश्किल होने लगा है। डेंगू के बढ़ते केस और प्लेटलेट्स की घटती उपलब्धता इसकी वजह बताए जा रहे हैं। जिले में रोजाना मिल रहे से डेंगू के पांच से सात केसों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है।
हालात ये हैं कि बुखार पीड़ितों से अटे पड़े अस्पतालों में मरीजों को प्लेटलेट्स नहीं मिल पा रही हैं। ये मरीज रक्तदाता या प्लेटलेट्स दानियों के भरोसे हैं। पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक का स्टॉक भी सीमित है। यहां ए-पॉजीटिव समेत कुछ खास ब्लड ग्रुप की कमी बनी हुई है। ऐसे में प्लेटलेट्स की कमी होना स्वाभाविक है। इधर, पीजीआईएमएस प्रशासन ने सोमवार से लगने वाले रक्तदान शिविरों से व्यवस्था दुरुस्त बनने का दावा किया है।
डेंगू के बढ़ते प्रकोप ने प्लेटलेट्स किल्लत की समस्या खड़ी कर दी है। पिछले दो दिन से रक्तदान शिविरों का आयोजन नहीं होने से पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक में विभिन्न ब्लड ग्रुप सीमित मात्रा में रह गए हैं। यहां शनिवार को ए-पॉजीटिव ग्रुप की कमी रही। कुछ अन्य खास ब्लड ग्रुप भी बॉर्डर लाइन पर हैं। रक्तदान शिविर नहीं लगने पर ब्लड ग्रुपों की उपलब्धता सिमटने से समस्या और गहरा सकती है। यही वजह है कि मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए रक्तदाताओं के रक्तदान करने का इंतजार करना पड़ रहा है। वीरवार रात शहर में एक नवजात के साथ यही हुआ। इसे एक पुलिस कर्मचारी ने रक्तदान कर नया जीवन दिया।
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पीजीआईएमएस में मरीजों के लिए रोजाना 240 से ज्यादा ब्लड यूनिट की जरूरत पड़ती है। एक प्लेटलेट्स दाता (एसडीपी) की भी रोजाना 30 से ज्यादा यूनिट की मरीजों को दरकार रहती है। इस जरूरत की पूर्ति केवल रक्तदान करने वाले रक्दाताओं पर निर्भर है। संस्थान मरीजों को एसडीपी निशुल्क मुहैया कराता है। यहीं से नागरिक अस्पताल के मरीजों के लिए एसडीपी और ब्लड यूनिट सप्लाई की जाती है। ऐसे में संस्थान के ब्लड बैंक में ब्लड की कमी बड़ी परेशानी बन सकती है।
रक्तदान शिविर से आज सुधार का दावा
पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक में पर्याप्त ब्लड उपलब्ध है। रक्षाबंधन पर्व पर अवकाश के कारण पिछले दो दिन रक्तदान शिविर नहीं लग पाए। इस कारण और ब्लड नहीं आया। प्लेटलेट्स जरूरत पड़ने पर मरीज के लिए तुरंत तैयार किए जा रहे हैं। संस्थान की ओर से सोमवार से पूरे महीने रक्तदान शिविर लगाए जाने हैं। इससे किसी तरह की किल्लत नहीं रहेगी और व्यवस्था दुरुस्त बनेगी।
- डॉ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।
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हालात ये हैं कि बुखार पीड़ितों से अटे पड़े अस्पतालों में मरीजों को प्लेटलेट्स नहीं मिल पा रही हैं। ये मरीज रक्तदाता या प्लेटलेट्स दानियों के भरोसे हैं। पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक का स्टॉक भी सीमित है। यहां ए-पॉजीटिव समेत कुछ खास ब्लड ग्रुप की कमी बनी हुई है। ऐसे में प्लेटलेट्स की कमी होना स्वाभाविक है। इधर, पीजीआईएमएस प्रशासन ने सोमवार से लगने वाले रक्तदान शिविरों से व्यवस्था दुरुस्त बनने का दावा किया है।
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डेंगू के बढ़ते प्रकोप ने प्लेटलेट्स किल्लत की समस्या खड़ी कर दी है। पिछले दो दिन से रक्तदान शिविरों का आयोजन नहीं होने से पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक में विभिन्न ब्लड ग्रुप सीमित मात्रा में रह गए हैं। यहां शनिवार को ए-पॉजीटिव ग्रुप की कमी रही। कुछ अन्य खास ब्लड ग्रुप भी बॉर्डर लाइन पर हैं। रक्तदान शिविर नहीं लगने पर ब्लड ग्रुपों की उपलब्धता सिमटने से समस्या और गहरा सकती है। यही वजह है कि मरीजों को प्लेटलेट्स के लिए रक्तदाताओं के रक्तदान करने का इंतजार करना पड़ रहा है। वीरवार रात शहर में एक नवजात के साथ यही हुआ। इसे एक पुलिस कर्मचारी ने रक्तदान कर नया जीवन दिया।
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पीजीआईएमएस में मरीजों के लिए रोजाना 240 से ज्यादा ब्लड यूनिट की जरूरत पड़ती है। एक प्लेटलेट्स दाता (एसडीपी) की भी रोजाना 30 से ज्यादा यूनिट की मरीजों को दरकार रहती है। इस जरूरत की पूर्ति केवल रक्तदान करने वाले रक्दाताओं पर निर्भर है। संस्थान मरीजों को एसडीपी निशुल्क मुहैया कराता है। यहीं से नागरिक अस्पताल के मरीजों के लिए एसडीपी और ब्लड यूनिट सप्लाई की जाती है। ऐसे में संस्थान के ब्लड बैंक में ब्लड की कमी बड़ी परेशानी बन सकती है।
रक्तदान शिविर से आज सुधार का दावा
पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक में पर्याप्त ब्लड उपलब्ध है। रक्षाबंधन पर्व पर अवकाश के कारण पिछले दो दिन रक्तदान शिविर नहीं लग पाए। इस कारण और ब्लड नहीं आया। प्लेटलेट्स जरूरत पड़ने पर मरीज के लिए तुरंत तैयार किए जा रहे हैं। संस्थान की ओर से सोमवार से पूरे महीने रक्तदान शिविर लगाए जाने हैं। इससे किसी तरह की किल्लत नहीं रहेगी और व्यवस्था दुरुस्त बनेगी।
- डॉ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।