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दिमाग को तेज करने के लिए बार-बार करना चाहिए अभ्यास : प्रोफेसर करिशानु रॉय
Wed, 10 Apr 2024 04:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 10 Apr 2024 04:21 AM IST
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झज्जर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संवाद भवन में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य दिवस सप्ताह के अंतर्गत जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम एवं सेमिनार का आयोजन सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह की अध्यक्षता में किया गया। जागरूकता कार्यक्रम एवं सेमिनार में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रोफेसर करिशानु रॉय ने शिरकत की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर से साइंटिस्ट प्रोफेसर पंकज सेठ शामिल हुए।
नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रोफेसर करिशानु रॉय ने कहा कि दिमाग सुचारू रूप से चलने के लिए अहम किरदार निभाना चाहिए। हमें लगातार अभ्यास करने की आवश्यकता है। गुस्सा आने पर हमें तुरंत कोई कार्य नहीं करना चाहिए और निर्णय भी नहीं देना चाहिए। दिमाग में कई तरह के ऐसे कैमिकल निकलते हैं, इसे हमें खतरा हो सकता है। जिस तरह बच्चा पढ़ाई करता है और कई बार भूल जाने की आदत बन जाती है तो हमें एकाग्र रहने की आवश्यकता है। एकाग्रता बढ़ाने के लिए समय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। बच्चों का पालन पोषण मां के लिए हम रोल अदा करता है और मां अपने बच्चों के दिमाग को बढ़ाने के लिए सकारात्मक ऊर्जा देने का कार्य करती है। सेमिनार में साइंटिस्ट प्रोफेसर पंकज सेठ ने बताया कि ब्रेन की खोज करना बहुत ही आवश्यक है। दिमाग में कई तरीके के सेल होते हैं, जो ऑर्डर देने का कार्य करते हैं। वह सेल आगे कार्य करने के लिए दिए गए ऑर्डर की खोज करना शुरू कर देते हैं, इसलिए अपने दिमाग को हमेशा स्वस्थ एवं खुला रखना चाहिए एवं सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए। सिविल सर्जन डॉक्टर ब्रह्मदीप सिंह ने कहा कि व्यक्ति को आगे बढ़ाने के लिए दिमाग की आवश्यकता रहती है, परंतु आज के समय में भाग दौड़ की दुनिया में मोबाइल से पीछा छुड़वाना बहुत मुश्किल है। किशोर अवस्था में मोबाइल फोन का नशा छाने लगा है। मोबाइल गहरा प्रभाव डालने लगा है, ऐसे समय में मोबाइल का नशा सबसे बड़ा माना जाने लगा है। इसलिए हम अपने बच्चों को फोन से दूर रहने की लगातार कोशिश करनी चाहिए और शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल करनी चाहिए। कार्यक्रम में जिला स्तर पर टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनीता चौहान,उप सिविल सर्जन डॉ. मनोज कुमार सैनी, राष्ट्रीय तंबाकू निषेध कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संदीप गुरान, टीबी नोडल अधिकारी डॉ. कुनाल, एमओ टीसी डॉ. निशा डाबर, जिला योगाचार्य आचार्य बलदेव ने टीबी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, आयुष्मान भारत,तंबाकू निषेध कार्यक्रम जानकारी देते हुए जागरूक किया और कहा कि हमें नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए और लगातार योगाभ्यास करना चाहिए। उपस्थित शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्टाफ एवं रेड रिबन क्लब के स्वयंसेवकों द्वारा मुख्य वक्ताओं से सवाल जवाब किए गए मुख्य वक्ताओं से सवाल जवाब किए जाने पर लेक्चर नीतू जैन, विद्यार्थी चिरंजीव गौतम को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओर से नगद पुरस्कार एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अन्य प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सवाल-जवाब के लिए सांत्वना स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला स्तर पर टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनीता चौहान, उप सिविल सर्जन डॉ. मनोज कुमार सैनी, राष्ट्रीय तंबाकू निषेध कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संदीप गुरान, टीबी नोडल अधिकारी डॉ. कुनाल, एमओ टीसी डॉ. निशा डाबर, जिला योगाचार्य आचार्य बलदेव, जिला अर्श काउंसलर संदीप कुमार, जिला क्वालिटी मैनेजर डॉ. विकास यादव, डीआईईसी मैनेजर अंजू, आयुष्मान भारत जिला मैनेजर विकास कुमार, टीबी कार्यक्रम डीपीसी शमशेर,पीपीएम मीनाक्षी, एड्स काउंसलर अंजू, मीनाक्षी, देव, सुभाष, अखिल गोयल, राजीव मौजूद रहे।
नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर के निदेशक प्रोफेसर करिशानु रॉय ने कहा कि दिमाग सुचारू रूप से चलने के लिए अहम किरदार निभाना चाहिए। हमें लगातार अभ्यास करने की आवश्यकता है। गुस्सा आने पर हमें तुरंत कोई कार्य नहीं करना चाहिए और निर्णय भी नहीं देना चाहिए। दिमाग में कई तरह के ऐसे कैमिकल निकलते हैं, इसे हमें खतरा हो सकता है। जिस तरह बच्चा पढ़ाई करता है और कई बार भूल जाने की आदत बन जाती है तो हमें एकाग्र रहने की आवश्यकता है। एकाग्रता बढ़ाने के लिए समय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। बच्चों का पालन पोषण मां के लिए हम रोल अदा करता है और मां अपने बच्चों के दिमाग को बढ़ाने के लिए सकारात्मक ऊर्जा देने का कार्य करती है। सेमिनार में साइंटिस्ट प्रोफेसर पंकज सेठ ने बताया कि ब्रेन की खोज करना बहुत ही आवश्यक है। दिमाग में कई तरीके के सेल होते हैं, जो ऑर्डर देने का कार्य करते हैं। वह सेल आगे कार्य करने के लिए दिए गए ऑर्डर की खोज करना शुरू कर देते हैं, इसलिए अपने दिमाग को हमेशा स्वस्थ एवं खुला रखना चाहिए एवं सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए। सिविल सर्जन डॉक्टर ब्रह्मदीप सिंह ने कहा कि व्यक्ति को आगे बढ़ाने के लिए दिमाग की आवश्यकता रहती है, परंतु आज के समय में भाग दौड़ की दुनिया में मोबाइल से पीछा छुड़वाना बहुत मुश्किल है। किशोर अवस्था में मोबाइल फोन का नशा छाने लगा है। मोबाइल गहरा प्रभाव डालने लगा है, ऐसे समय में मोबाइल का नशा सबसे बड़ा माना जाने लगा है। इसलिए हम अपने बच्चों को फोन से दूर रहने की लगातार कोशिश करनी चाहिए और शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल करनी चाहिए। कार्यक्रम में जिला स्तर पर टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनीता चौहान,उप सिविल सर्जन डॉ. मनोज कुमार सैनी, राष्ट्रीय तंबाकू निषेध कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संदीप गुरान, टीबी नोडल अधिकारी डॉ. कुनाल, एमओ टीसी डॉ. निशा डाबर, जिला योगाचार्य आचार्य बलदेव ने टीबी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, आयुष्मान भारत,तंबाकू निषेध कार्यक्रम जानकारी देते हुए जागरूक किया और कहा कि हमें नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए और लगातार योगाभ्यास करना चाहिए। उपस्थित शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्टाफ एवं रेड रिबन क्लब के स्वयंसेवकों द्वारा मुख्य वक्ताओं से सवाल जवाब किए गए मुख्य वक्ताओं से सवाल जवाब किए जाने पर लेक्चर नीतू जैन, विद्यार्थी चिरंजीव गौतम को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओर से नगद पुरस्कार एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अन्य प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सवाल-जवाब के लिए सांत्वना स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला स्तर पर टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनीता चौहान, उप सिविल सर्जन डॉ. मनोज कुमार सैनी, राष्ट्रीय तंबाकू निषेध कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. संदीप गुरान, टीबी नोडल अधिकारी डॉ. कुनाल, एमओ टीसी डॉ. निशा डाबर, जिला योगाचार्य आचार्य बलदेव, जिला अर्श काउंसलर संदीप कुमार, जिला क्वालिटी मैनेजर डॉ. विकास यादव, डीआईईसी मैनेजर अंजू, आयुष्मान भारत जिला मैनेजर विकास कुमार, टीबी कार्यक्रम डीपीसी शमशेर,पीपीएम मीनाक्षी, एड्स काउंसलर अंजू, मीनाक्षी, देव, सुभाष, अखिल गोयल, राजीव मौजूद रहे।
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