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Rohtak News: सर्दी का सितम... दिन और रात के तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस का अंतर
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16सीटीके12..नागरिक अस्पताल के बच्चों की ओपीडी के बाहर लगी कतार। स्रोत : अमर उजाला
रोहतक। सर्दी का सितम जारी है। दिन और रात के तापमान में करीब तीन डिग्री सेल्सियस का अंतर रह गया है। कड़ाके की इस ठंड में बच्चे ही नहीं बड़ों की भी सांसें फूलने लगी हैं। बीपी ( ब्लड प्रेशर) भी 180 पार हो चला है। ऐसे में अस्पताल की ओपीडी भी वायरल पीड़ित बच्चों के अलावा सांस व बीपी के मरीजों से अटी पड़ी है।
जिले में वीरवार को अधिकतम तापमान 13.8 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा। पिछले 24 घंटे में जिले में करीब दो एमएम बारिश हुई। इस बीच लगातार 2 से 3 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ठंडी हवा चली। शीतलहर के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। लोग घरों में दुबकने को विवश हैं। अलाव ताप कर खुद को गर्मी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इधर, मौसम विभाग ने अगले 19 जनवरी तक बारिश की संभावना जताई है। इससे न्यूनतम तापमान में कमी आना संभावित है। यानी ठंड का कहर अभी जारी रहेगा।
वायरल, डायरिया व ब्रोंकाइटिस के आ रहे मरीज
चिकित्सा विशेषज्ञ मौसम में हो रहे परिवर्तन व ठंड को देखते हुए एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। बच्चों को पर्याप्त ऊनी कपड़े पहनाने व सिर पर टोपी और पैरों में जुराबें पहनने की सलाह दे रहे हैं। नागरिक अस्पताल में वायरल डायरिया के साथ बच्चों में एलर्जी और ब्रोंकाइटिस (फेंफड़ों में सूजन) के केस ज्यादा आ रहे हैं। सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस लेने में तकलीफ, नाक बंद होने से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। वीरवार को बच्चों की ओपीडी में करीब 200 बच्चे पहुंचे। इनमें ज्यादातर बच्चे सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस में तकलीफ के रहे।
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-- बड़ों में बढ़ रहा बीपी
पीजीआईएमए की उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रियंका ने बताया कि इस मौसम बीपी बढ़ने के मामले आ रहे हैं। यह बड़ों में हर उम्र के हैं। बीपी बढ़ने का कारण यह हो सकता है कि ठिठुरन बढ़ी ठंड में शरीर में खून की नसें सिकुड़ने लगती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। वीरवार को आपातकालीन विभाग की ओपीडी में भी जांच कराने के लिए पहुंचे कई मरीजों का ब्लड प्रेशर की ऊपरी सीमा 180 से ऊपर पाई गई, जबकि बीपी की ऊपरी सीमा 140 तक ही सामान्य मानी जाती है। वहीं बीपी बढ़े मरीजों को भर्ती कर उपचार किया गया।
-- बीपी के मरीज यह जरूर करें
- नमक और चिकनाई भरी चीजें कम खाएं।
- हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीज कोहरे में घर से न निकलें।
- बीपी की दवा नियमित रूप से लें।
- बाहर पार्क जाने की बजाए घर में ही हल्का फुल्का व्यायाम करें।
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ठंड में ऐसे रखें बच्चों का खास ख्याल
- बच्चों को तीन लेयर कपड़े पहनाएं।
- जैकेट, टोपी, दस्ताने और जुराबें पहनाकर रखें।
- ठंड में भी खाने से पहले साबुन से हाथ धोना सिखाएं अभिभावक।
- 5 से 13 साल के बच्चों को 9 से 11 घंटे की नींद लेना जरूरी।
- मौसमी फल और घर का बना भोजन खिलाएं।
-- वर्जन
इस मौसम में सर्दी जुकाम, वायरल डायरिया आदि के मरीज बढ़ जाते हैं। ठंड में अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। सावधानी बरत कर बच्चों को बीमार होने से बचा सकते हैं। बच्चों व सांस के मरीजों का खास ध्यान रखें। गीला कपड़ा न पहनाएं। गर्म पानी ही पीएं या पिलाएं। मौसम में जब तक ठिठुरन है, घर में ही खेलकूद करना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर है।
-डॉ. रोहित कपूर, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
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-- कड़ाके की सर्दी में ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे बच्चे
वीरवार को बच्चों को कड़ाके की ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ा। शीतकालीन अवकाश समाप्त होने के चलते स्कूल खुलने पर सुबह आठ बजे ही बच्चे सड़कों पर नजर आने लगे। कोई अभिभावकों के साथ तो कोई स्कूल वाहन से पढ़ने निकला।
-- पिछले 24 घंटे कहां-कितनी बारिश हुई (एमएम में)
स्थान बारिश
रोहतक 02
महम 02
सांपला 03
कलानौर 02
लाखनमाजरा 01
-- 16 जनवरी का पिछले नौ साल का तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2024 14.8 4.8
2023 14.8 5.2
2022 15.0 7.0
2021 14.8 7.8
2020 17.1 6.2
2019 16.5 6.6
2018 23.0 7.0
2017 20.0 10
2016 21.0 8.0
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जिले में वीरवार को अधिकतम तापमान 13.8 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा। पिछले 24 घंटे में जिले में करीब दो एमएम बारिश हुई। इस बीच लगातार 2 से 3 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ठंडी हवा चली। शीतलहर के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। लोग घरों में दुबकने को विवश हैं। अलाव ताप कर खुद को गर्मी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इधर, मौसम विभाग ने अगले 19 जनवरी तक बारिश की संभावना जताई है। इससे न्यूनतम तापमान में कमी आना संभावित है। यानी ठंड का कहर अभी जारी रहेगा।
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वायरल, डायरिया व ब्रोंकाइटिस के आ रहे मरीज
चिकित्सा विशेषज्ञ मौसम में हो रहे परिवर्तन व ठंड को देखते हुए एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। बच्चों को पर्याप्त ऊनी कपड़े पहनाने व सिर पर टोपी और पैरों में जुराबें पहनने की सलाह दे रहे हैं। नागरिक अस्पताल में वायरल डायरिया के साथ बच्चों में एलर्जी और ब्रोंकाइटिस (फेंफड़ों में सूजन) के केस ज्यादा आ रहे हैं। सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस लेने में तकलीफ, नाक बंद होने से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ गई है। वीरवार को बच्चों की ओपीडी में करीब 200 बच्चे पहुंचे। इनमें ज्यादातर बच्चे सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस में तकलीफ के रहे।
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पीजीआईएमए की उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रियंका ने बताया कि इस मौसम बीपी बढ़ने के मामले आ रहे हैं। यह बड़ों में हर उम्र के हैं। बीपी बढ़ने का कारण यह हो सकता है कि ठिठुरन बढ़ी ठंड में शरीर में खून की नसें सिकुड़ने लगती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। वीरवार को आपातकालीन विभाग की ओपीडी में भी जांच कराने के लिए पहुंचे कई मरीजों का ब्लड प्रेशर की ऊपरी सीमा 180 से ऊपर पाई गई, जबकि बीपी की ऊपरी सीमा 140 तक ही सामान्य मानी जाती है। वहीं बीपी बढ़े मरीजों को भर्ती कर उपचार किया गया।
- नमक और चिकनाई भरी चीजें कम खाएं।
- हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीज कोहरे में घर से न निकलें।
- बीपी की दवा नियमित रूप से लें।
- बाहर पार्क जाने की बजाए घर में ही हल्का फुल्का व्यायाम करें।
बॉक्स
ठंड में ऐसे रखें बच्चों का खास ख्याल
- बच्चों को तीन लेयर कपड़े पहनाएं।
- जैकेट, टोपी, दस्ताने और जुराबें पहनाकर रखें।
- ठंड में भी खाने से पहले साबुन से हाथ धोना सिखाएं अभिभावक।
- 5 से 13 साल के बच्चों को 9 से 11 घंटे की नींद लेना जरूरी।
- मौसमी फल और घर का बना भोजन खिलाएं।
इस मौसम में सर्दी जुकाम, वायरल डायरिया आदि के मरीज बढ़ जाते हैं। ठंड में अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। सावधानी बरत कर बच्चों को बीमार होने से बचा सकते हैं। बच्चों व सांस के मरीजों का खास ध्यान रखें। गीला कपड़ा न पहनाएं। गर्म पानी ही पीएं या पिलाएं। मौसम में जब तक ठिठुरन है, घर में ही खेलकूद करना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर है।
-डॉ. रोहित कपूर, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
बॉक्स
वीरवार को बच्चों को कड़ाके की ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ा। शीतकालीन अवकाश समाप्त होने के चलते स्कूल खुलने पर सुबह आठ बजे ही बच्चे सड़कों पर नजर आने लगे। कोई अभिभावकों के साथ तो कोई स्कूल वाहन से पढ़ने निकला।
स्थान बारिश
रोहतक 02
महम 02
सांपला 03
कलानौर 02
लाखनमाजरा 01
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2024 14.8 4.8
2023 14.8 5.2
2022 15.0 7.0
2021 14.8 7.8
2020 17.1 6.2
2019 16.5 6.6
2018 23.0 7.0
2017 20.0 10
2016 21.0 8.0