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Rohtak News: एमबीबीएस परीक्षा में नकल के खेल में 14 विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सुनवाई करेगा विवि

Tue, 24 Mar 2026 12:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:54 AM IST
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The university will conduct personal hearings of 14 students accused of cheating in the MBBS exam.

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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। एमबीबीएस परीक्षा में नकल के खेल में स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय आरोपी 14 विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सुनवाई करेगा। बगैर उनका पक्ष जाने कार्रवाई करने की दलील पर अदालत से मिली राहत के बाद अब ये विद्यार्थी विवि पहुंच रहे हैं। यही नहीं, इनकी लिखावट की मिलान के लिए इन्हें उत्तर पुस्तिका की प्रति भी दी जाएगी। फिलहाल, अदालत में विचाराधीन मामले की गोपनीय जांच जारी है।
स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएस) में एमबीबीएस परीक्षा में पास होने के खेल में आरोपियों को अभी राहत नहीं मिली है। इनमें झज्जर जिले के एक निजी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें से अधिकतर 2020 बैच के छात्र हैं।
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कोर्ट में विचाराधीन इस मामले में संलिप्त आरोपी अदालत से राहत लेकर आए विवि पहुंच रहे हैं। पिछले 15 दिनों में औसतन हर दूसरे दिन दो विद्यार्थी अदालती कागज लेकर आ रहे हैं। विवि प्रशासन ने इन विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सुनवाई करेगा। इसके बाद ही विवि प्रशासन अगला कदम उठाएगा।
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विवि निष्कासित कर चुका 23 विद्यार्थी
एमबीबीएस परीक्षा में नकल के मामले में संलिप्तता के चलते 23 विद्यार्थियों को विवि प्रशासन फरवरी 2026
में निष्कासित कर चुका है। अब ये विद्यार्थी अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएंगे। परीक्षा रिकॉर्ड में भी इनका ब्योरा शून्य दर्ज होगा। इन्हें इस विवि या संबद्ध मेडिकल कॉलेज में भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस बारे में भी निर्देश जारी हो चुके हैं। विवि प्रशासन आरोपी विद्यार्थियों का रिकॉर्ड खंगाल रहा था। इसमें इनकी लिखावट की जांच अहम रही। फॉरेंसिक व हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से विद्यार्थियों की लिखावट के नमूने बारीकी से जांचे गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर विद्यार्थियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

41 लोगों के खिलाफ हुई थी एफआईआर दर्ज
स्वास्थ्य विज्ञान विवि में एमबीबीएस के एक विद्यार्थी ने शिकायत दी थी। इसकी जांच में जनवरी 2025 में नकल के खेल का खुलासा हुआ था। इसके बाद पुलिस में शिकायत देकर 41 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें 24 विद्यार्थी व विवि के 17 कर्मचारी आरोपी हैं। पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है जिन्हें जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने अदालत में 978 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह मामला अदालत में विचाराधीन है।

ऐसे चलता था नकल का खेल
नकल के खेल का खुलासा जनवरी 2025 में हुआ था। परीक्षा के दौरान विवि की सीक्रेसी ब्रांच से उत्तर पुस्तिकाएं बाहर भेजी जाती थीं। इन कॉपियों को बाहर दोबारा लिखवाया जाता था या उनमें छेड़छाड़ कर उन्हें वापस जमा कर दिया जाता था ताकि छात्र पास हो सकें। परिणाम घोषित होने से ठीक पहले अवॉर्ड लिस्ट में अंकों को बदला जाता था। इसके लिए प्रति विषय 3 से 5 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।


वर्जन
एमबीबीएस परीक्षा के नकल के मामले में अदालत से 14 विद्यार्थी अब तक आ चुके हैं। विवि प्रशासन इनकी व्यक्तिगत सुनवाई करेगा। इसके बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। विवि प्रशासन ने पूरे नियमों के साथ निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से मामले की जांच की है। रिपोर्ट के आधार पर ही 23 विद्यार्थियों को निष्कासित किया गया था। आगे भी निष्पक्षता व पारदर्शिता के साथ कदम उठाया जाएगा।
- डॉ. एचके अग्रवाल, कुलपति, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय
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