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Rohtak News: विवि कमेटी चार दिन में देगी रिपोर्ट, दर्ज होगी एफआईआर
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34...एमडीयू के फैकल्टी हाउस में विद्यार्थियों व सफाई कर्मचारियों के साथ बैठक करने के बाद बाहर
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में महिला सफाई कर्मचारियों के अंत:वस्त्र जांच के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मंगलवार को सफाई कर्मचारी आयोग के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी है जो चार दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
इस बीच दो सुपरवाइजरों को निलंबित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है साथ ही आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
मंगलवार शाम 4 बजे सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन कृष्ण कुमार और मेयर रामअवतार वाल्मीकि विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने फैकल्टी हाउस में पीड़ित महिला सफाई कर्मचारियों से करीब एक घंटे तक बातचीत की। बैठक के बाद महिलाएं किसी भी प्रकार की टिप्पणी से बचती रहीं लेकिन आयोग के समक्ष अपने साथ हुई घटना का ब्योरा साझा किया।
पीड़ित महिलाओं ने बताया कि वे नियमित रूप से कार्य कर रही थीं। सुपरवाइजर ने तेजी से काम करने के लिए कहा, जिस पर एक महिला ने मासिक धर्म की समस्या बताई और थोड़ी राहत देने का आग्रह किया।
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आरोप है कि इसी पर सुपरवाइजर ने खेल परिसर में एक अन्य महिला कर्मचारी की मदद से उनके अंत:वस्त्र और पैड की जांच करवाई और उन पर खून लगा होने या नहीं होने की पुष्टि के लिए उसकी तस्वीरें तक खींचीं।
घटना की जानकारी अन्य सहयोगियों को मिलते ही विरोध शुरू हो गया। वहीं आयोग के चेयरमैन ने मीडिया से कोई बात नहीं की। सवाल पूछने पर हाथ जोड़कर चले गए।
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इस बीच दो सुपरवाइजरों को निलंबित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है साथ ही आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
मंगलवार शाम 4 बजे सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन कृष्ण कुमार और मेयर रामअवतार वाल्मीकि विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने फैकल्टी हाउस में पीड़ित महिला सफाई कर्मचारियों से करीब एक घंटे तक बातचीत की। बैठक के बाद महिलाएं किसी भी प्रकार की टिप्पणी से बचती रहीं लेकिन आयोग के समक्ष अपने साथ हुई घटना का ब्योरा साझा किया।
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पीड़ित महिलाओं ने बताया कि वे नियमित रूप से कार्य कर रही थीं। सुपरवाइजर ने तेजी से काम करने के लिए कहा, जिस पर एक महिला ने मासिक धर्म की समस्या बताई और थोड़ी राहत देने का आग्रह किया।
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आरोप है कि इसी पर सुपरवाइजर ने खेल परिसर में एक अन्य महिला कर्मचारी की मदद से उनके अंत:वस्त्र और पैड की जांच करवाई और उन पर खून लगा होने या नहीं होने की पुष्टि के लिए उसकी तस्वीरें तक खींचीं।
घटना की जानकारी अन्य सहयोगियों को मिलते ही विरोध शुरू हो गया। वहीं आयोग के चेयरमैन ने मीडिया से कोई बात नहीं की। सवाल पूछने पर हाथ जोड़कर चले गए।