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हिसार रोड के दुकानदार दो धड़े में बंटे, एक धड़े को लोग बोले प्रधान की मांगे व्यक्तिगत
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हिसार रोड पर बाततचीत करते रामस्वरूप । संवाद
हिसार रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान की मांगों को लेकर हिसार रोड के दुकानदार दो धड़े में बट गए हैं। रविवार को एक धड़े ने आरोप लगाया कि जो मांगें उठाई हैं, वह प्रधान की व्यक्तिगत हैं। उन्होंने कभी भी कोई बैठक नहीं की है। चंद लोगों के साथ फैसला कर लेते हैं। जो दुकानें बन रही हैं, वह सही हैं। हम नहीं चाहते कि दुकानों के निर्माण में गतिरोध उत्पन्न हो।
जाम की समस्या से निजात के लिए मुख्यमंत्री ने 3 मई 2018 को हिसार रोड के चौड़ीकरण की घोषणा की थी। इसकी जद में आने वाली हिसार रोड की 73 व पुरानी सब्जी मंडी की 108 दुकानों को नगर निगम नजदीक में नई दुकानें बनवाकर शिफ्ट करेगा। वर्तमान में दुकानों को बनाने का काम चल रहा है। 11 मई को हिसार रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान श्यामलाल सचदेवा के साथ कई दुकानदारों ने मेयर मनमोहन गोयल और निगम अधिकारियों के सामने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी।
उन्होंने कहा कि अभी तक न तो सभी दुकानदारों की रजिस्ट्री हुई है और न प्रॉपर्टी आईडी बन सकी है। ठेकेदार दुकानदारों पर 15-15 दुकानें तोड़ने के लिए खाली करने का दबाव बना रहा है। स्पष्ट कहा कि दुकानदारों की मांगें हैं कि दुकान का लेंटर 12 फुट पर डाला जाए। दुकान के अंदर से छत पर जाने के लिए सीढ़ी बने। जिनकी दो अथवा तीन दुकानें हैं, उन्हें एक दुकान बनाकर एक शटर लगाया जाए। दुकान सड़क से ऊंचाई पर बने ताकि बारिश में जलभराव होेने पर पानी दुकानों के अंदर न जाए। 13 मई को इन मांगों को लेकर मेयर और संयुक्त निगम आयुक्त को पत्र सौंपा था। शनिवार को कई दुकानदारों के साथ बैठक करके फैसला लिया कि जब तक उनकी मांगों को नहीं मना जाता है, तब तक दुकानदार अपनी दुकान खाली नहीं करेंगे। वहीं, रविवार को पूरे मामले की जानकारी होने के बाद हिसार रोड के दुकानदार दो धड़े में बंट गए।
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एकजुट दुकानदारों ने कहा कि प्रधान श्यामलाल सचदेवा ने जिन मांगों को उठाया है, वह उनकी निजी हैं। दुकानदारों को उनकी मांगों से कोई लेनादेना नहीं है। प्रधान का फैसला सभी दुकानदारों को लेकर नहीं बल्कि कुछ दुकानदारों के लिए हैं, जिनसे उनका कोई सरोकार नहीं है। जिस तरह से दुकानों का निर्माण चल रहा है, वह सही है। कुछ लोग चाहते हैं कि किसी न किसी बात को लेकर दुकानों के निर्माण में अड़ंगा डाला जाए, जो गलत है।
ये कहना है दुकानदारों का
प्रधान अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ें, हमको कोई फर्क नहीं पड़ता। वजह, ये मांगें प्रधान की व्यक्तिगत हैं। अब कोई कहता है बेसमेंट बने तो कोई और मांग रख रहा हैं। गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए थे, जबकि काम सही है। -विनोद सिक्का, दुकानदार
हमारे पास तो एक दुकान है और हमको बेसमेंट आदि नहीं चाहिए। जिस तरह से दुकानों का निर्माण किया जा रहा है, वह बिल्कुल सही है। प्रधान की मांगें उनकी व्यक्तिगत हैं। -खुशीराम, दुकानदार।
-प्रधान ने जो मांगें उठाई हैं, वह उनकी अपनी व्यक्तिगत हैं। सरकार ने दुकानों का जो नक्शा पास किया है, उससे हर छोटा दुकानदार राजी है। जो काम चल रहा है, वह रुकना नहीं चाहिए। -रामस्वरूप कक्कड़।
-प्रधान ने किससे पूछकर मांगें उठाई हैं। ये उनकी व्यक्तिगत मांगें हैं। दो बंदे बैठकर फैसला लेते हैं। उनके साथ चार बंदे हैं, पांचवां कोई नहीं है। किसी को ड्राइंग तक नहीं दिखाई है। -हरीश सिक्का, दुकानदार।
मेरी तो कोई व्यक्तिगत मांग नहीं है। दुकानदारों ने मांग की थी। अब बेशक ये बदल रहे हों, मगर मेरे पास आवेदन भी हैं। निगम के अधिकारियों के सामने शर्त रखी थी, जिसमें कहा था कि कुछ मांगों पर हम झुकेंगे तो कुछ पर प्रशासन सहमत हो। बैठक होती है, जिसमें चर्चा की जाती है। जब चुनाव होते हैं, तो इनमें से किसी की फार्म भरने तक की हिम्मत नहीं होती है। ये लोग तो अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। मेरा तो चार-पांच लोग शुरू से विरोध करते हैं। अब ये काम सिरे चढ़ गया है, तो प्रधान बन रहे हैं। -श्यामलाल सचदेवा, प्रधान हिसार रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन।
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जाम की समस्या से निजात के लिए मुख्यमंत्री ने 3 मई 2018 को हिसार रोड के चौड़ीकरण की घोषणा की थी। इसकी जद में आने वाली हिसार रोड की 73 व पुरानी सब्जी मंडी की 108 दुकानों को नगर निगम नजदीक में नई दुकानें बनवाकर शिफ्ट करेगा। वर्तमान में दुकानों को बनाने का काम चल रहा है। 11 मई को हिसार रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान श्यामलाल सचदेवा के साथ कई दुकानदारों ने मेयर मनमोहन गोयल और निगम अधिकारियों के सामने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी।
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उन्होंने कहा कि अभी तक न तो सभी दुकानदारों की रजिस्ट्री हुई है और न प्रॉपर्टी आईडी बन सकी है। ठेकेदार दुकानदारों पर 15-15 दुकानें तोड़ने के लिए खाली करने का दबाव बना रहा है। स्पष्ट कहा कि दुकानदारों की मांगें हैं कि दुकान का लेंटर 12 फुट पर डाला जाए। दुकान के अंदर से छत पर जाने के लिए सीढ़ी बने। जिनकी दो अथवा तीन दुकानें हैं, उन्हें एक दुकान बनाकर एक शटर लगाया जाए। दुकान सड़क से ऊंचाई पर बने ताकि बारिश में जलभराव होेने पर पानी दुकानों के अंदर न जाए। 13 मई को इन मांगों को लेकर मेयर और संयुक्त निगम आयुक्त को पत्र सौंपा था। शनिवार को कई दुकानदारों के साथ बैठक करके फैसला लिया कि जब तक उनकी मांगों को नहीं मना जाता है, तब तक दुकानदार अपनी दुकान खाली नहीं करेंगे। वहीं, रविवार को पूरे मामले की जानकारी होने के बाद हिसार रोड के दुकानदार दो धड़े में बंट गए।
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एकजुट दुकानदारों ने कहा कि प्रधान श्यामलाल सचदेवा ने जिन मांगों को उठाया है, वह उनकी निजी हैं। दुकानदारों को उनकी मांगों से कोई लेनादेना नहीं है। प्रधान का फैसला सभी दुकानदारों को लेकर नहीं बल्कि कुछ दुकानदारों के लिए हैं, जिनसे उनका कोई सरोकार नहीं है। जिस तरह से दुकानों का निर्माण चल रहा है, वह सही है। कुछ लोग चाहते हैं कि किसी न किसी बात को लेकर दुकानों के निर्माण में अड़ंगा डाला जाए, जो गलत है।
ये कहना है दुकानदारों का
प्रधान अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ें, हमको कोई फर्क नहीं पड़ता। वजह, ये मांगें प्रधान की व्यक्तिगत हैं। अब कोई कहता है बेसमेंट बने तो कोई और मांग रख रहा हैं। गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए थे, जबकि काम सही है। -विनोद सिक्का, दुकानदार
हमारे पास तो एक दुकान है और हमको बेसमेंट आदि नहीं चाहिए। जिस तरह से दुकानों का निर्माण किया जा रहा है, वह बिल्कुल सही है। प्रधान की मांगें उनकी व्यक्तिगत हैं। -खुशीराम, दुकानदार।
-प्रधान ने जो मांगें उठाई हैं, वह उनकी अपनी व्यक्तिगत हैं। सरकार ने दुकानों का जो नक्शा पास किया है, उससे हर छोटा दुकानदार राजी है। जो काम चल रहा है, वह रुकना नहीं चाहिए। -रामस्वरूप कक्कड़।
-प्रधान ने किससे पूछकर मांगें उठाई हैं। ये उनकी व्यक्तिगत मांगें हैं। दो बंदे बैठकर फैसला लेते हैं। उनके साथ चार बंदे हैं, पांचवां कोई नहीं है। किसी को ड्राइंग तक नहीं दिखाई है। -हरीश सिक्का, दुकानदार।
मेरी तो कोई व्यक्तिगत मांग नहीं है। दुकानदारों ने मांग की थी। अब बेशक ये बदल रहे हों, मगर मेरे पास आवेदन भी हैं। निगम के अधिकारियों के सामने शर्त रखी थी, जिसमें कहा था कि कुछ मांगों पर हम झुकेंगे तो कुछ पर प्रशासन सहमत हो। बैठक होती है, जिसमें चर्चा की जाती है। जब चुनाव होते हैं, तो इनमें से किसी की फार्म भरने तक की हिम्मत नहीं होती है। ये लोग तो अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। मेरा तो चार-पांच लोग शुरू से विरोध करते हैं। अब ये काम सिरे चढ़ गया है, तो प्रधान बन रहे हैं। -श्यामलाल सचदेवा, प्रधान हिसार रोड ट्रेडर्स एसोसिएशन।