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Rohtak News: दवा कंपनी किसान को दे स्प्रे से खराब फसल का 55 हजार रुपये मुआवजा
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रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग ने दवा कंपनी को चिड़ी गांव के किसान अशोक को 55 हजार रुपये मुआवजा व पांच हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर देने का आदेश दिया है। पांच साल पहले स्प्रे के असर से एक एकड़ में टमाटर की 80 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई थी।
अशोक ने अगस्त 2021 में अर्जी दायर की थी कि उसने एक एकड़ में टमाटर की फसल उगाई थी। पौधे लगाने, बीज, मजदूरी, पानी, जुताई आदि में करीब 50,000 रुपये से ज्यादा का खर्च आया था। दवा में स्प्रे करने के लिए हिसार रोड स्थित पुराने बस स्टैंड के नजदीक सिंगला बीज भंडार से 100 ग्राम खरपतवार नाशक दवा खरीदी।
मुंबई स्थित मेसर्स रैलिस इंडिया लिमिटेड दवा की निर्माता कंपनी है। नियमों के तहत उसने पानी में दवा मिलाकर स्प्रे किया। दो दिन बाद देखा तो टमाटर की फसल नष्ट हो गई। उसने कृषि विभाग को शिकायत दी। विभाग ने जांच कर रिपोर्ट में बताया कि 80 प्रतिशत फसल नष्ट हुई है।
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इसके बावजूद दवा कंपनी ने मुआवजा नहीं दिया। किसान ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के नोटिस पर दवा विक्रेता ने कहा कि उसका कार्य केवल दवा बेचना है जबकि दवा निर्माता कंपनी ने कहा कि किसान ने नियमों के तहत सही मात्रा का स्प्रे नहीं किया।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आयोग के चेयरमैन नागेंद्र सिंह ने निर्णय दिया है कि दवा कंपनी किसान को 55 हजार रुपये मुआवजा दे। साथ में पांच हजार कानूनी तौर के तौर पर एक माह में दिए जाएं।
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अशोक ने अगस्त 2021 में अर्जी दायर की थी कि उसने एक एकड़ में टमाटर की फसल उगाई थी। पौधे लगाने, बीज, मजदूरी, पानी, जुताई आदि में करीब 50,000 रुपये से ज्यादा का खर्च आया था। दवा में स्प्रे करने के लिए हिसार रोड स्थित पुराने बस स्टैंड के नजदीक सिंगला बीज भंडार से 100 ग्राम खरपतवार नाशक दवा खरीदी।
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मुंबई स्थित मेसर्स रैलिस इंडिया लिमिटेड दवा की निर्माता कंपनी है। नियमों के तहत उसने पानी में दवा मिलाकर स्प्रे किया। दो दिन बाद देखा तो टमाटर की फसल नष्ट हो गई। उसने कृषि विभाग को शिकायत दी। विभाग ने जांच कर रिपोर्ट में बताया कि 80 प्रतिशत फसल नष्ट हुई है।
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इसके बावजूद दवा कंपनी ने मुआवजा नहीं दिया। किसान ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के नोटिस पर दवा विक्रेता ने कहा कि उसका कार्य केवल दवा बेचना है जबकि दवा निर्माता कंपनी ने कहा कि किसान ने नियमों के तहत सही मात्रा का स्प्रे नहीं किया।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आयोग के चेयरमैन नागेंद्र सिंह ने निर्णय दिया है कि दवा कंपनी किसान को 55 हजार रुपये मुआवजा दे। साथ में पांच हजार कानूनी तौर के तौर पर एक माह में दिए जाएं।