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संगीत की धुन पर थिरकीं फुहारें, रंग-बिरंगी लाइटों ने किया कमाल

Thu, 21 Jan 2021 01:17 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2021 01:17 AM IST
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The music blew to the beat, colorful lights did wonders
मल्टीमीडिया लेजर शो में गौतम बुद्ध का संदेश भी दिखाया गया। - फोटो : RohtakCity
रोहतक। तिलियार झील पर पहला ही साउंड एंड लाइट मल्टीमीडिया लेजर शो 30 मिनट देरी से शुरू हुआ। तिलियार पर्यटन केंद्र की ओर से शुरू किए जा रहे शो की चर्चाएं गर्माने के चलते यहां घूमने आए लोग बगैर टिकट लिए ही सीटों पर बैठ गए। बाद में विभाग के कर्मचारियों को सीट पर ही लोगों के टिकट बनाने पड़े। इसके बाद शाम करीब साढ़े छह बजे शो शुरू हुआ। म्यूजिक पर थिरकते फव्वारे के रंगीन पानी पर सृष्टि के उत्थान की कहानी ने दर्शकों को खासा रोमांचित किया।
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बुधवार शाम छह बजे पहला लेजर शो शुरू करने को लेकर पर्यटन विभाग पूरी तैयारी में था। इस शो के चर्चे पहले से लोगों तक पहुंच चुके थे। ऐसे में यहां मौजूद हर व्यक्ति पहले ही दिन पहला शो देखने को लेकर उत्सुक नजर आया। हालात यूं बने कि शो शुरू होने से पहले ही सीटें फुल हो गईं। वह भी बगैर टिकट। लोग 30 रुपये का निर्धारित टिकट लेने के बजाय सीधे सीटों पर जा बैठे। यह देख एक बार तो अधिकारी भी सकपका गए। बाद में विभाग के कर्मचारी टिकट बनाने के लिए रसीद बुक लेकर उनके बीच पहुंचे। यहीं सभी के टिकट बनाए। इसके बाद शो शुरू हो पाया। इस कार्रवाई में शाम के साढ़े छह बज गए। इस कारण 40 मिनट का यह शो 7 बजकर 10 मिनट पर समाप्त हुआ। लोगों ने सेंटोसा की तर्ज पर शुरू हुए मनोरंजन के इस नए साधन को खूब सराहा।
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मैं मनु हूं! उस समय मै हरियाणा में ही था...
मैं मनु हूं। सृष्टि को आरंभ से देख रहा हूं। मैने प्रलय देखी है। उस समय भी हरियाणा में ही था। लाइनों के साथ शुरू हुआ लेजर शो प्रदेश में वेदों व सबसे पहले सभ्यता विकसित होने की जानकारी के साथ आगे बढ़ा। यहां सम्राट हर्षवर्धन की राजधानी के साक्ष्य होने कृष्ण व बुद्ध के आने की जानकारी के साथ रोहतक व कैथल में मिले बुद्ध के प्रमाण दर्शाए गए। यहीं सम्राट अशोक के अभिलेखों व सरस्वती नदी की खोज भी जारी है बताया गया। दिल्ली से रोहतक होकर पेशावर जाने वाले रास्ते के साथ महाभारत काल तक को दिखाया गया। पानीपत की तीन लड़ाई के बारे में जानकारी दी गई। इसमें वर्ष 1526 में बाबर व इब्राहिम लोदी, वर्ष 1556 में अकबर व महाराणा प्रताप और वर्ष 1761 में पानीपत का तीसरा युद्ध अहमदशाह अब्दाली व मराठों के बीच होना दिखाया गया। इसके बाद अंबाला से मई 1857 में शुरू हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, इसके दस दिन बाद मेरठ से मंगल पांडे के आंदोलन की झलक, स्वाधीनता आंदोलन व देश की आजादी दिखाई गई। इसमें खापों का योगदान भी दर्शाया गया।
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दो फीसदी आबादी फिर भी केंद्रीय खाद्यान्न भंडारण में दूसरा स्थान
एक नवंबर 1966 में हरियाणा बनने, हिंदोस्तान की दो प्रतिशत आबादी वाले प्रदेश का केंद्रीय खाद्यान्न भंडारण में दूसरे नंबर का योगदान गौरांवित करने वाला रहा। इसके अलावा पर है। देश की सेना में प्रदेश का हर दसवां व्यक्ति होने, खेलों में कपिल देव से साक्षी मलिक तक खिलाड़ी, कल्पना चावला का भी नाम लिया गया। प्रदेश की लोक कला व लोक नृत्य के अलावा आईआईएम व सुपवा की स्थापना हुई। यहीं चार पहिया वाहन भी बनाए जाने के लिए हरियाणा को विकास के पथ पर अग्रसर बताते हुए शो का समापन किया गया।
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