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27 दिन में 10 बार कांपी रोहतक की धरती, तीव्रता रही 2.8

Thu, 25 Jun 2020 01:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2020 01:18 AM IST
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The land of Rohtak shivered 10 times in 27 days, the intensity was 2.8
रोहतक में बुधवार दोपहर 12:58:13 एक बार फिर भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई। भूकंप का केंद्र महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन के पास रोहतक शहर से 15 किलोमीटर दूर अटायल व गांधरा गांव के बीच रहा। हलचल जमीन मेें महज 5 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। प्रदेश में 28 दिन में यह 12वां व जिले में 27 दिन में यह दसवां भूकंप था। आपदा प्रबंधक के जिला समन्वयक सौरभ धीमान की रिपोर्ट के अनुसार यह 1969 से 24 जून तक 204 भूकंप आ चुके हैं। रोहतक से गूजर रही महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन के नजदीक लगातार आ रहे भूकंपों पर राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की सीधी नजर है। इन भूकंपों का बारीकी से निरीक्षण करने व इन पर गहन अध्ययन के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की तरफ से रोहतक में दो और भूकंप-सूचक यंत्र भी लगा दिए गए हैं। आपदा प्रबंधक के जिला समन्वयक सौरभ धीमान ने बताया कि मंगलवार को एक भूकंप सूचक यंत्र करौंथा गांव में और दूसरा लघु सचिवालय में लगाया गया। इससे पहले रोहतक के बैंसी गांव में एक यंत्र लगा हुआ है। भविष्य में इनकी संख्या और अधिक बढ़ाने की योजना है।
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पिछले 51 साल में 194, अब महज 27 दिन में दस भूकंप
आपदा प्रबंधक के जिला समन्वयक सौरभ धीमान ने बताया कि उन्होंने जिले में भूकंपों पर एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसके अनुसार रोहतक में 1969 से लेकर 28 मई तक 194 भूकंप आए थे। उसके बाद 29 मई से 24 जून तक 10 भूकंप आ चुके हैं। यानी पिछले 51 वर्षों में रोहतक केंद्रित 194 भूकंप और अब महज 27 दिन में 10 भूकंप आ चुके हैं। करीब 51 वर्ष में प्रदेश में आए भूकंपों में 204 बार रोहतक केंद्र रहा है। सौरभ धीमान ने बताया कि पहले कभी इतनी जल्दी जल्दी भूकंप नहीं आए। अब महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन एक्टिव है, वैज्ञानिकों की इस पर नजर है और डाटा के हिसाब से इस पर अध्ययन कर रहे हैं।
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3.0 और अधिक तीव्रता से आए 36 भूकंप
1969 के बाद आए 204 भूकंपों में 36 भूकंप ऐसे रहे हैं, जिनकी तीव्रता 3.0 या इससे अधिक रही है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक सबसे तेज भूकंप 2 जून 2017 को आया है, जिसकी तीव्रता 4.7 रही थी।
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जोन तीन और जोन चार में आता है रोहतक
भूकंप के खतरे के हिसाब से देश को चार जोन में बांटा गया है। जिसमें सबसे कम खतरनाक जोन 2, फिर उसके बाद जोन तीन व जोन चार और सबसे ज्यादा खतरनाक जोन 5 है। रोहतक जिले का आधा हिस्सा जोन तीन व आधा हिस्सा जोन चार में आता है।
बार-बार आ रहे भूकंपों से लोग चिंतित
बार-बार आ रहे भूकंप ने लोगों को बेचैन कर दिया है। बुधवार को अटायल व गांधरा के बीच आए हल्के भूकंप को कुछ लोगों ने महसूस भी किया। पिछले दिनों आए भूकंप का केंद्र भी अटायल था, हालांकि कम तीव्रता होने के कारण किसी को महसूस नहीं हुआ था। ग्रामीण अनिल कुमार, लीलू, राजेश, सरोज देवी, सुमन का कहना है कि बार-बार आ रहे भूकंप ने उन्हें चिंता में डाल दिया है।
भूकंप की तरंगें रिकॉर्ड करने में मदद करेगा भूकंप सूचक यंत्र : उपायुक्त
उपायुक्त आरएस वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र से विचार-विमर्श के बाद लघु सचिवालय के आपदा प्रबंधन उपकरण स्टोर और गांव करौंथा के ग्राम सचिवालय को भूकंप मापी यंत्र लगाने के लिए चुना गया है। यह उपकरण भूकंप की तरंगें रिकॉर्ड करने में मदद करेगा, जिससे भूकंप की तीव्रता का पता लगाया जा सकेगा।

माइक्रो भूकंप सर्वे के लिए तैयार यंत्र इस प्रकार करेगा कार्य
केंद्र द्वारा माइक्रो भूकंप सर्वे के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया यंत्र पोर्टेबल है। इसमें एक संक्षिप्त ट्रिलियम सेंसर, एक त्वरणमापी लगा है। भूकंप की तरंगों या कंपन को ट्रिलियम सेंसर व तेज गति के त्वरणमापी यंत्र से मापा जाता है। ये तरंगों को इलेक्ट्रिकल फॉर्म में बदल देते हैं। फिर इसे डाटा एक्विजिशन सिस्टम के नाम से जाने जाते डिजिटाइजर को भेज देते हैं। वह तरंगों की इलेक्ट्रिक फॉर्म को डिजिटल तरंगों में बदल देता है, जिसे इंटरनल मेमोरी कार्ड में स्टोर कर लेते हैं। यह डाटा मेमोरी कार्ड से दोबारा प्राप्त किया जा सकता है। उपायुक्त ने बताया कि इसमें एक मॉडम इंस्टाल किया गया है जो डिजिटाइजर से जुड़ा होता है। यह मॉडम भूकंप विज्ञान राष्ट्रीय केंद्र में स्थापित सेंट्रल रिसीविंग स्टेशन को डिजिटल वेव फॉर्म में इन तरंगों को स्थानांतरित करेगा। इसमें ऑटो लोकेशन सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है। सॉफ्टवेयर यह पता लगाएगा कि भूकंप आया कि नहीं। अगर भूकंप का पता चलता है तो राष्ट्रीय केंद्र में तैनात ड्यूटी अधिकारी उसका विश्लेषण कर संबंधित अथॉरिटी को भेजते हैं। ताकि आपदा से बचाव को आवश्यक कदम उठाए जा सकें। यह सारी प्रक्रिया चंद मिनटों में पूरी की जाती है। घटना के आंकड़ों को केंद्र की वेबसाइट, मोबाइल एप व सोशल नेटवर्किंग पेज पर प्रकाशित किया जाता है। रिसर्च के लिए भी इस डाटा का प्रयोग किया जाता है।
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