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Rohtak News: मेहनत से आयरन लेडी ने लिखी सफलता की इबारत
Wed, 03 Dec 2025 02:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 03 Dec 2025 02:43 AM IST
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18...डॉ. प्रियंका चोपड़ा, उप अधीक्षक, पीजीआई
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रोहतक। कुछ करने की ललक हो और मन में दृढ़ विश्वास तो कुछ भी असंभव नहीं है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है पीजीआई की डीएमएस डाॅ. प्रियंका चोपड़ा ने। कड़ी मेहनत व संघर्ष से दिव्यांगता को मात देकर दूसरों के लिए भी मिसाल कायम की है।
मूलरूप से फरमाणा की बेटी ने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा उन्हें पिता से मिली और चिकित्सक बनकर जरूरतमंदों की सहायता का प्रयास कर रही हैं। इसी कड़ी में एनजीओ की मदद से महिलाओं व जरूरतमंद बच्चों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जा रहे हैं।
वह पांच साल से दिवाली पर दोस्तों, स्टाफ व मरीजों के साथ मिठाइयां बांटने के साथ दीये जलाती हैं। इससे मरीजोें केे चेहरे पर मुस्कान देखकर त्योहार मनाना सफल हो जाता है।
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चिकित्सक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के समय वर्ष 2005 में गांवों में ड्यूटी होती थी। यहां पहुंचना काफी मुश्किल हाेता था। इन सबके बावजूद संघर्ष जारी रखा। यही वजह रही कि उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2017 में सरकार ने आयरन लेडी अवाॅर्ड से सम्मानित किया। पीजीआईएमएस से 2010 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल की।
यहीं पर सेवाएं देते हुए वर्ष 2011 में सीएमओ बनीं। अब पीजीआई के आपातकालीन विभाग में डीएमएस हैं। पिता कपूर सिंह चोपड़ा सिंचाई विभाग में कार्यकारी अभियंता पद से वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब अपने माता-पिता के साथ रहकर उनकी देखभाल कर रही हूं।
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जरूरतमंद बेटियों की बनीं मददगार, तीन बेटियों की जिम्मेदारी उठा चुकीं
डॉ. प्रियंका सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका भी निभा रही हैं। वर्ष 2012 से 2015 तक तीन बेटियों की जिम्मेदारी भी उठा चुकी हैं। उन्हें कॉलेज तक पढ़ाई करा कर अपने पैरों पर खड़ा होने लायक बनाया। उनके ऐसे कार्यों के चलते कई अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया। इनमें वर्ष 2022 में मिला इंटरनेशनल वुमैन अचीवर अवाॅर्ड भी शामिल है। ग्लोबल इंटेलेक्चुअल फोरम ने समाज के प्रति सजगता से कर्तव्य का पालन करने के लिए यह सम्मान दिया। कोविड के दौरान वर्ष 2021 में उनकी भाभी का निधन हो गया था। इसके बाद से उनके बच्चों की एक मां की तरह जिम्मेदारी निभा रही हैं।
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रोहतक। कुछ करने की ललक हो और मन में दृढ़ विश्वास तो कुछ भी असंभव नहीं है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है पीजीआई की डीएमएस डाॅ. प्रियंका चोपड़ा ने। कड़ी मेहनत व संघर्ष से दिव्यांगता को मात देकर दूसरों के लिए भी मिसाल कायम की है।
मूलरूप से फरमाणा की बेटी ने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा उन्हें पिता से मिली और चिकित्सक बनकर जरूरतमंदों की सहायता का प्रयास कर रही हैं। इसी कड़ी में एनजीओ की मदद से महिलाओं व जरूरतमंद बच्चों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जा रहे हैं।
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वह पांच साल से दिवाली पर दोस्तों, स्टाफ व मरीजों के साथ मिठाइयां बांटने के साथ दीये जलाती हैं। इससे मरीजोें केे चेहरे पर मुस्कान देखकर त्योहार मनाना सफल हो जाता है।
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चिकित्सक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के समय वर्ष 2005 में गांवों में ड्यूटी होती थी। यहां पहुंचना काफी मुश्किल हाेता था। इन सबके बावजूद संघर्ष जारी रखा। यही वजह रही कि उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2017 में सरकार ने आयरन लेडी अवाॅर्ड से सम्मानित किया। पीजीआईएमएस से 2010 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल की।
यहीं पर सेवाएं देते हुए वर्ष 2011 में सीएमओ बनीं। अब पीजीआई के आपातकालीन विभाग में डीएमएस हैं। पिता कपूर सिंह चोपड़ा सिंचाई विभाग में कार्यकारी अभियंता पद से वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब अपने माता-पिता के साथ रहकर उनकी देखभाल कर रही हूं।
जरूरतमंद बेटियों की बनीं मददगार, तीन बेटियों की जिम्मेदारी उठा चुकीं
डॉ. प्रियंका सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका भी निभा रही हैं। वर्ष 2012 से 2015 तक तीन बेटियों की जिम्मेदारी भी उठा चुकी हैं। उन्हें कॉलेज तक पढ़ाई करा कर अपने पैरों पर खड़ा होने लायक बनाया। उनके ऐसे कार्यों के चलते कई अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया। इनमें वर्ष 2022 में मिला इंटरनेशनल वुमैन अचीवर अवाॅर्ड भी शामिल है। ग्लोबल इंटेलेक्चुअल फोरम ने समाज के प्रति सजगता से कर्तव्य का पालन करने के लिए यह सम्मान दिया। कोविड के दौरान वर्ष 2021 में उनकी भाभी का निधन हो गया था। इसके बाद से उनके बच्चों की एक मां की तरह जिम्मेदारी निभा रही हैं।