{"_id":"5fda4c758ebc3e3b623ad478","slug":"the-film-before-i-die-was-nominated-at-the-international-film-festival-rohtakcity-news-rtk5866749172","type":"story","status":"publish","title_hn":"कूड़ा हटाकर लगाते हैं फूल, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखेगी हरियाणा के फ्लावरमैन की कहानी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कूड़ा हटाकर लगाते हैं फूल, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखेगी हरियाणा के फ्लावरमैन की कहानी
Wed, 16 Dec 2020 11:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 16 Dec 2020 11:35 PM IST
विज्ञापन
डॉक्यूमेंट्री बनाते निर्देशक नकुल देव।
- फोटो : अमर उजाला
गोवा में 16 से 24 जनवरी को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में हरियाणा के निर्माता निर्देशक नकुल देव की डॉक्यूमेंट्री 'बिफोर आई डाई' नामित हुई है। यह हरियाणा की पहली ऐसी डॉक्यूमेंट्री है, जिसे रोहतक के रहने वाले निर्माता नकुल देव ने यहीं की पृष्ठभूमि पर फिल्माया है।
यह डॉक्यूमेंट्री पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगी। डॉक्यूमेंट्री में दर्शाया गया है कि यदि व्यक्ति चाहे तो वह विपरीत परिस्थितियों में वीराने में भी गुल खिला सकता है। इसकी कहानी गंदगी वाले क्षेत्रों में फूल खिला कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। ‘बिफोर आई डाई’ सिरसा के फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के जीवन पर आधारित है। उन्होंने गांवों में गंदगी/कूड़े को हटा वहां फूल लगाए और कई जगहों को महकाया। उन्हें कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। यह डॉक्यूमेंट्री अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सिलेक्ट हो चुकी है, फिल्म महोत्सव में इसकी स्क्रीनिंग भी होगी।
फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के संघर्षों पर आधारित है डॉक्यूमेंट्री
निर्माता नकुल देव के अनुसार इस डॉक्यूमेंट्री में फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के संघर्षों को देखकर आमजन इससे प्रेरणा पा सकेगा। उनके अनुसार 13 साल पहले फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के गांव के सरकारी स्कूल के आस-पास फैली गंदगी को हटाने की सोची। तब स्कूल से मुश्किल से 20 फीट दूर लगे गंदगी के ढेर के कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे।
विज्ञापन
डॉ. रामजी लाल ने अपने दोस्तों के साथ समाज सुधार का बीड़ा उठाया और वहां से कूड़े को हटाया। इसके बाद उन्होंने पास से गुजरती सड़क के आस-पास फूलों के पौधे लगाकर वातावरण को सुगंध से भर दिया। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। उनकी यह शुरुआत आज एक बड़े मिशन में तबदील हो चुकी है।
24 मिनट की डॉक्यूमेंट्री बनाने में लगे तीन साल
महज 24 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘बिफोर आई डाई’ को बनाने में तीन वर्ष का समय लगा। रोहतक के रहने वाले नकुल देव पिछले 17 साल से फिल्म निर्माण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वर्तमान में सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन के बैनर तले बनने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म सीरीज पर भी काम कर रहे हैं।
नकुल देव सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाते हैं। इससे पहले नकुल देव नक्सलवादियों पर नक्सलाइट ऑफ छत्तीसगढ़, कश्मीरी युवती के जीवन पर आधारित फिल्म आशमा, आतंकवाद पर आधारित अखनुर सहित विभिन्न मुद्दों पर फिल्में बना चुके हैं। उनकी फिल्म ब्लू माउंटेन को तो वर्ष 2017 का एशिया की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब गोल्डन एलीफेंट मिल चुका है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है।
हर वर्ष 12 करोड़ पौधे बांटते हैं फ्लवारमैन
सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन की ओर से हरियाणा गौरव अवार्डी फ्लावरमैन डॉ. रामजी लाल प्रत्येक वर्ष 12 करोड़ से अधिक पौधे निशुल्क वितरित करते हैं। वे स्वयं अपने स्तर पर फूल के पौधे तैयार कर सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों का कायाकल्प करते हैं। शुरुआत में 20 हजार पौधों से अभियान चलाया। अब ये सालाना 12 करोड़ पौधे वितरित करते हैं। पंजाब के जलालाबाद, फाजिल्का, हरियाणा के जींद और करनाल के अलावा अपने गांव में फूल के पौधे तैयार करने के लिए प्लांट लगाए हैं। यह पौधे निशुल्क बांटे जाते हैं, जो स्कूलों, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों, शमशान घाटों में रोपित करवाए जाते हैं।
विज्ञापन
यह डॉक्यूमेंट्री पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगी। डॉक्यूमेंट्री में दर्शाया गया है कि यदि व्यक्ति चाहे तो वह विपरीत परिस्थितियों में वीराने में भी गुल खिला सकता है। इसकी कहानी गंदगी वाले क्षेत्रों में फूल खिला कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। ‘बिफोर आई डाई’ सिरसा के फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के जीवन पर आधारित है। उन्होंने गांवों में गंदगी/कूड़े को हटा वहां फूल लगाए और कई जगहों को महकाया। उन्हें कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। यह डॉक्यूमेंट्री अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सिलेक्ट हो चुकी है, फिल्म महोत्सव में इसकी स्क्रीनिंग भी होगी।
विज्ञापन
फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के संघर्षों पर आधारित है डॉक्यूमेंट्री
निर्माता नकुल देव के अनुसार इस डॉक्यूमेंट्री में फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के संघर्षों को देखकर आमजन इससे प्रेरणा पा सकेगा। उनके अनुसार 13 साल पहले फ्लावरमैन डॉ. रामजी जयमल के गांव के सरकारी स्कूल के आस-पास फैली गंदगी को हटाने की सोची। तब स्कूल से मुश्किल से 20 फीट दूर लगे गंदगी के ढेर के कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे।
विज्ञापन
डॉ. रामजी लाल ने अपने दोस्तों के साथ समाज सुधार का बीड़ा उठाया और वहां से कूड़े को हटाया। इसके बाद उन्होंने पास से गुजरती सड़क के आस-पास फूलों के पौधे लगाकर वातावरण को सुगंध से भर दिया। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। उनकी यह शुरुआत आज एक बड़े मिशन में तबदील हो चुकी है।
24 मिनट की डॉक्यूमेंट्री बनाने में लगे तीन साल
महज 24 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘बिफोर आई डाई’ को बनाने में तीन वर्ष का समय लगा। रोहतक के रहने वाले नकुल देव पिछले 17 साल से फिल्म निर्माण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वर्तमान में सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन के बैनर तले बनने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म सीरीज पर भी काम कर रहे हैं।
नकुल देव सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाते हैं। इससे पहले नकुल देव नक्सलवादियों पर नक्सलाइट ऑफ छत्तीसगढ़, कश्मीरी युवती के जीवन पर आधारित फिल्म आशमा, आतंकवाद पर आधारित अखनुर सहित विभिन्न मुद्दों पर फिल्में बना चुके हैं। उनकी फिल्म ब्लू माउंटेन को तो वर्ष 2017 का एशिया की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब गोल्डन एलीफेंट मिल चुका है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है।
हर वर्ष 12 करोड़ पौधे बांटते हैं फ्लवारमैन
सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन की ओर से हरियाणा गौरव अवार्डी फ्लावरमैन डॉ. रामजी लाल प्रत्येक वर्ष 12 करोड़ से अधिक पौधे निशुल्क वितरित करते हैं। वे स्वयं अपने स्तर पर फूल के पौधे तैयार कर सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों का कायाकल्प करते हैं। शुरुआत में 20 हजार पौधों से अभियान चलाया। अब ये सालाना 12 करोड़ पौधे वितरित करते हैं। पंजाब के जलालाबाद, फाजिल्का, हरियाणा के जींद और करनाल के अलावा अपने गांव में फूल के पौधे तैयार करने के लिए प्लांट लगाए हैं। यह पौधे निशुल्क बांटे जाते हैं, जो स्कूलों, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों, शमशान घाटों में रोपित करवाए जाते हैं।