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Rohtak News: भाई-पापा और दादा जो नहीं कर सके वो बेटी ने कर दिखाया
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17सीटीके20...रूबीन धनखड़ खिलाड़ी।
रोहतक। विदेशी धरती पर स्वर्ण पदक जीतकर हुमायूंपुर की रूबीन धनखड़ ने देश का नाम रोशन करने के साथ-साथ अपने दादा फौजी सतबीर का सपना भी साकार कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना उनके दादा का सपना था। थाईलैंड के पटाया में हुई एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के अंडर-15 वर्ग की 62 किलो भारवर्ग की कुश्ती में पहलवान सुनील धनखड़ की बेटी ने स्वर्ण पदक जीता है। देश का मान बढ़ाने वाली परिवार की पहली पहलवान बेटी की जीत से पूरे परिवार में खुशी की लहर है। रूबीन ने बुधवार को जापान की पहलवान को 2-1 से हराकर इतिहास रचा। इस जीत के बाद अमर उजाला ने रूबीन के पिता से बात की तो उन्होंने अपनी खुशी साझा की।
हुमायूंपुर निवासी सुनील धनखड़ ने बताया कि रूबीन परिवार की सबसे बड़ी बेटी होने के साथ पहली पहलवान बेटी भी है। मेरे अलावा घर में पिता व बेटा पहलवानी कर चुके हैं। किसी न किसी कारण से कोई भी कुश्ती में खास पहचान नहीं बना पाए। बेटी ने यह कमी पूरी कर दिखाई। यही नहीं, बाप-दादा का नाम पूरे देश व दुनिया में रोशन कर दिया। हमें इस पर नाज है। हम जो नहीं कर पाए, छोटी सी उम्र में बेटी ने वो कर दिखाया। रूबीन के दादा सतबीर के फौज में भर्ती होने से पहलवानी का शौक अधूरा रह गया। खुद मैं, घर की जिम्मेदारी व खेतीबाड़ी के चलते कुश्ती से दूर हो गया। बेटे ने कुश्ती शुरू की तो उसके घुटने में चोट आ गई। इस कारण वह भी कुश्ती से दूर है। गोल्ड जीतने के बाद बेटी, बेटे से बढ़कर साबित हुई।
चार साल पहले शुरू की थी कुश्ती
इससे पहले रूबीन स्कूली नेशनल में रजत पदक व नोएडा में हुई नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। रूबीन के लगातार अच्छे प्रदर्शन से आस-पड़ोस की छह-सात बेटियों ने प्रेरित होकर कुश्ती खेलना शुरू कर दिया है। रूबीन का लक्ष्य ओलंपिक 2028 में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। रविवार को घर लौटने पर उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा। कक्षा 10वीं की छात्रा ने चार साल पहले गांव के बुच्चा उस्ताद के पास कुश्ती का अभ्यास शुरू किया था। अब पिछले डेढ़ साल से युद्धवीर अखाड़े में कोच कुलबीर राणा व सीमा राणा के पास अभ्यास कर रही है।
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छोटूराम स्टेडियम की दो पहलवानों ने भी जीते पदक
थाईलैंड के पटाया में आयोजित एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में छोटूराम स्टेडियम अखाड़े की दो बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर कोच व प्रदेश का नाम रोशन किया। कोच मंदीप ने बताया कि अंडर-15 वर्ग में रिठाल की विनाक्षी ने 36 किलोग्राम भारवर्ग में रजत और कोसली की मेघा ने 42 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों ही पहलवान अखाड़े में अभ्यास करती हैं। इनकी जीत से अखाड़े के पहलवान खुशी से झूम उठे।
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हुमायूंपुर निवासी सुनील धनखड़ ने बताया कि रूबीन परिवार की सबसे बड़ी बेटी होने के साथ पहली पहलवान बेटी भी है। मेरे अलावा घर में पिता व बेटा पहलवानी कर चुके हैं। किसी न किसी कारण से कोई भी कुश्ती में खास पहचान नहीं बना पाए। बेटी ने यह कमी पूरी कर दिखाई। यही नहीं, बाप-दादा का नाम पूरे देश व दुनिया में रोशन कर दिया। हमें इस पर नाज है। हम जो नहीं कर पाए, छोटी सी उम्र में बेटी ने वो कर दिखाया। रूबीन के दादा सतबीर के फौज में भर्ती होने से पहलवानी का शौक अधूरा रह गया। खुद मैं, घर की जिम्मेदारी व खेतीबाड़ी के चलते कुश्ती से दूर हो गया। बेटे ने कुश्ती शुरू की तो उसके घुटने में चोट आ गई। इस कारण वह भी कुश्ती से दूर है। गोल्ड जीतने के बाद बेटी, बेटे से बढ़कर साबित हुई।
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चार साल पहले शुरू की थी कुश्ती
इससे पहले रूबीन स्कूली नेशनल में रजत पदक व नोएडा में हुई नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। रूबीन के लगातार अच्छे प्रदर्शन से आस-पड़ोस की छह-सात बेटियों ने प्रेरित होकर कुश्ती खेलना शुरू कर दिया है। रूबीन का लक्ष्य ओलंपिक 2028 में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। रविवार को घर लौटने पर उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा। कक्षा 10वीं की छात्रा ने चार साल पहले गांव के बुच्चा उस्ताद के पास कुश्ती का अभ्यास शुरू किया था। अब पिछले डेढ़ साल से युद्धवीर अखाड़े में कोच कुलबीर राणा व सीमा राणा के पास अभ्यास कर रही है।
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छोटूराम स्टेडियम की दो पहलवानों ने भी जीते पदक
थाईलैंड के पटाया में आयोजित एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में छोटूराम स्टेडियम अखाड़े की दो बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर कोच व प्रदेश का नाम रोशन किया। कोच मंदीप ने बताया कि अंडर-15 वर्ग में रिठाल की विनाक्षी ने 36 किलोग्राम भारवर्ग में रजत और कोसली की मेघा ने 42 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों ही पहलवान अखाड़े में अभ्यास करती हैं। इनकी जीत से अखाड़े के पहलवान खुशी से झूम उठे।

17सीटीके20...रूबीन धनखड़ खिलाड़ी।

17सीटीके20...रूबीन धनखड़ खिलाड़ी।