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Rohtak News: हार्ट अटैक को आयोग ने माना गंभीर बीमारी, अब 17 लाख रुपये ऋण ब्याज सहित देगी बीमा कंपनी
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रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इन्फार्क्शन) एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है। ऐसे में बीमा कंपनी याचिकाकर्ता कमला नगर निवासी अनीता को 17 लाख रुपये ब्याज सहित दे। इसी राशि में से उनके पति गब्बर सिंह के नाम से लिया गया ऋण भी जमा कराया जाए। बची राशि शिकायतकर्ता को दी जाए।
एक माह में आयोग ने आदेशों का पालन करने का समय दिया है। साथ ही बीमा कंपनी पर सेवाओं में कमी पर पांच हजार रुपये हर्जाना व पांच हजार रुपये कानूनी खर्च देने के लिए कहा है।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक कमला नगर निवासी अनीता ने 2021 में अर्जी दायर की थी कि उसके पति गब्बर सिंह ने 2018 में टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के माध्यम से 11.50 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से 16 लाख रुपये का लोन लिया था।
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लोन की अवधि 240 माह स्वीकार की गई। साथ ही बताया गया कि लोन लेने पर बीमा पॉलिसी दी गई है। पॉलिसी के तहत यदि ऋण की अवधि के दौरान शिकायतकर्ता या उसके पति में से किसी की मृत्यु हो जाती है तो बीमित ऋण राशि की किस्तें आगे नहीं चुकानी होंगी और ऋण माफ कर दिया जाएगा।
पॉलिसी के लिए एक लाख रुपये की राशि ली गई जो ऋण की राशि में से ही ली गई। मई 2020 में गब्बर सिंह की पीजीआई में बीमारी के चलते मौत हो गई। याचिकाकर्ता ने बीमा कंपनी से ऋण माफ करने का अनुरोध किया लेकिन ऋण माफ नहीं किया गया। आयोग के नोटिस पर ऋण देने वाली कंपनी ने कहा कि शिकायत गलत है। केवल दबाव बनाने के लिए दायर की गई है।
कंपनी ने केवल ऋण दिया है। कोई बीमा पॉलिसी जारी नहीं की है। वहीं सुनवाई के दौरान बताया गया कि गब्बर सिंह की मौत का कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट था। कंपनी ग्रुप क्रेडिट सिक्योर पॉलिसी केवल 15 नामित गंभीर बीमारियों के लिए कवरेज देती है। गब्बर सिंह किसी नामित गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं थे।
ऐसे में शिकायत में प्रतिवादी नंबर 2 के खिलाफ लगाए गए अन्य सभी आरोप गलत हैं। आयोग ने तथ्यों के आधार पर अब निर्णय दिया है कि हार्ट अटैक गंभीर बीमारी है। ऐसे में पॉलिसी देने वाली बीमा कंपनी याचिकाकर्ता को 17 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित राशि का भुगतान करे। साथ ही सेवा में कमी के चलते पांच हजार रुपये हर्जाना व कानूनी खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये याचिकाकर्ता को दे।
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एक माह में आयोग ने आदेशों का पालन करने का समय दिया है। साथ ही बीमा कंपनी पर सेवाओं में कमी पर पांच हजार रुपये हर्जाना व पांच हजार रुपये कानूनी खर्च देने के लिए कहा है।
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आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक कमला नगर निवासी अनीता ने 2021 में अर्जी दायर की थी कि उसके पति गब्बर सिंह ने 2018 में टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के माध्यम से 11.50 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से 16 लाख रुपये का लोन लिया था।
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लोन की अवधि 240 माह स्वीकार की गई। साथ ही बताया गया कि लोन लेने पर बीमा पॉलिसी दी गई है। पॉलिसी के तहत यदि ऋण की अवधि के दौरान शिकायतकर्ता या उसके पति में से किसी की मृत्यु हो जाती है तो बीमित ऋण राशि की किस्तें आगे नहीं चुकानी होंगी और ऋण माफ कर दिया जाएगा।
पॉलिसी के लिए एक लाख रुपये की राशि ली गई जो ऋण की राशि में से ही ली गई। मई 2020 में गब्बर सिंह की पीजीआई में बीमारी के चलते मौत हो गई। याचिकाकर्ता ने बीमा कंपनी से ऋण माफ करने का अनुरोध किया लेकिन ऋण माफ नहीं किया गया। आयोग के नोटिस पर ऋण देने वाली कंपनी ने कहा कि शिकायत गलत है। केवल दबाव बनाने के लिए दायर की गई है।
कंपनी ने केवल ऋण दिया है। कोई बीमा पॉलिसी जारी नहीं की है। वहीं सुनवाई के दौरान बताया गया कि गब्बर सिंह की मौत का कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट था। कंपनी ग्रुप क्रेडिट सिक्योर पॉलिसी केवल 15 नामित गंभीर बीमारियों के लिए कवरेज देती है। गब्बर सिंह किसी नामित गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं थे।
ऐसे में शिकायत में प्रतिवादी नंबर 2 के खिलाफ लगाए गए अन्य सभी आरोप गलत हैं। आयोग ने तथ्यों के आधार पर अब निर्णय दिया है कि हार्ट अटैक गंभीर बीमारी है। ऐसे में पॉलिसी देने वाली बीमा कंपनी याचिकाकर्ता को 17 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित राशि का भुगतान करे। साथ ही सेवा में कमी के चलते पांच हजार रुपये हर्जाना व कानूनी खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये याचिकाकर्ता को दे।