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Rohtak News: जम्मू-कश्मीर में पत्थरों पर सीखा चलना, अब रोहतक में लगाएंगे दौड़
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29-कामेल ।
रोहतक। पत्थरों पर चलना सीखा, माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी प्रेक्टिस की। विपरीत हालातों को हराने का जज्बा लिए जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी बुधवार को रोहतक में दौड़ लगाएंगे।
एमडीयू में स्पेशल ओलंपिक भारत राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दमखम दिखाने के लिए जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों में जोश साफ तौर पर देखा जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर टीम के कोच फिरदौस का कहना है कि लंबे समय तक अशांत रहे कश्मीर में अब हालात ठीक हैं और खिलाड़ियों को अधिक अवसर मिल रहे हैं। खिलाड़ी जीत के लिए बुधवार को मैदान पर उतरेंगे और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। इस चैंपियनशिप में 26 राज्यों से 500 से अधिक खिलाड़ी, उनके कोच और सहयोगी भाग ले रहे हैं।
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मानइस 10 डिग्री में खेल सर्वापरि रहा
जम्मू कश्मीर के बारामुला जिला के हेनारा पट्टन गांव के पैरा खिलाड़ी कामेल मानसिक और शरीर के रूप से दिव्यांग हैं। 20 वर्षीय कामेल बताते हैं कि वे 200 मीटर दौड़ के खिलाड़ी हैं। उनके गांव में पत्थर बहुत हैं और बचपन में उन पत्थरों पर ही अभिभावकों ने चलना सिखाया। गांव में खेल मैदान में पत्थर होने से वह चोटिल हो चुके हैं लेकिन जज्बा कम नहीं हुआ। सर्दियों में बारामूला का तापमान मानइस 10 डिग्री तक पहुंच जाता है। फिर भी वे दौड़ लगाते हैं और खेल उनके लिए सर्वापरि रहता है। कोच ने बताया कि कामेल के पिता परवेज अहमद स्कूल टीचर हैं और मां जमनरूदा ग्रहिणी हैं। कामेल अपने परिवार में इकलौते बेटे हैं और जुनून के पक्के हैं।
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर है फैजान का गांव
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिला के त्रिगांव निवासी 15 वर्षीय फैजान अहमद बताते हैं कि उनका छोटा सा गांव भारत-पाकिस्तान सीमा से करीब 60 किलोमीटर दूर है। कई बार धमाके की आवाजे सुनते हैं। बचपन में डर लगता था लेकिन अब उनके लिए इस तरह की आवाजें सामान्य हो गई। रोहतक में 1500 मीटर दौड़ में प्रतिभा दिखाने को तैयार हैं। उनके पिता रियाज अहमद मलिक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और मां तबस्सुम ग्रहिणी हैं। फैजान मानसिक रूप से कमजोर हैं और घर से 200 किलोमीटर दूर श्रीनगर में 10वीं की पढ़ाई कर रहे हैं।
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एमडीयू में स्पेशल ओलंपिक भारत राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दमखम दिखाने के लिए जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों में जोश साफ तौर पर देखा जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर टीम के कोच फिरदौस का कहना है कि लंबे समय तक अशांत रहे कश्मीर में अब हालात ठीक हैं और खिलाड़ियों को अधिक अवसर मिल रहे हैं। खिलाड़ी जीत के लिए बुधवार को मैदान पर उतरेंगे और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। इस चैंपियनशिप में 26 राज्यों से 500 से अधिक खिलाड़ी, उनके कोच और सहयोगी भाग ले रहे हैं।
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मानइस 10 डिग्री में खेल सर्वापरि रहा
जम्मू कश्मीर के बारामुला जिला के हेनारा पट्टन गांव के पैरा खिलाड़ी कामेल मानसिक और शरीर के रूप से दिव्यांग हैं। 20 वर्षीय कामेल बताते हैं कि वे 200 मीटर दौड़ के खिलाड़ी हैं। उनके गांव में पत्थर बहुत हैं और बचपन में उन पत्थरों पर ही अभिभावकों ने चलना सिखाया। गांव में खेल मैदान में पत्थर होने से वह चोटिल हो चुके हैं लेकिन जज्बा कम नहीं हुआ। सर्दियों में बारामूला का तापमान मानइस 10 डिग्री तक पहुंच जाता है। फिर भी वे दौड़ लगाते हैं और खेल उनके लिए सर्वापरि रहता है। कोच ने बताया कि कामेल के पिता परवेज अहमद स्कूल टीचर हैं और मां जमनरूदा ग्रहिणी हैं। कामेल अपने परिवार में इकलौते बेटे हैं और जुनून के पक्के हैं।
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर है फैजान का गांव
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिला के त्रिगांव निवासी 15 वर्षीय फैजान अहमद बताते हैं कि उनका छोटा सा गांव भारत-पाकिस्तान सीमा से करीब 60 किलोमीटर दूर है। कई बार धमाके की आवाजे सुनते हैं। बचपन में डर लगता था लेकिन अब उनके लिए इस तरह की आवाजें सामान्य हो गई। रोहतक में 1500 मीटर दौड़ में प्रतिभा दिखाने को तैयार हैं। उनके पिता रियाज अहमद मलिक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और मां तबस्सुम ग्रहिणी हैं। फैजान मानसिक रूप से कमजोर हैं और घर से 200 किलोमीटर दूर श्रीनगर में 10वीं की पढ़ाई कर रहे हैं।

29-कामेल ।