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Rohtak News: शिक्षिका नहीं भर सकी फीस, मानहानि का केस खारिज
Wed, 20 Aug 2025 02:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 20 Aug 2025 02:52 AM IST
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रोहतक। शिक्षिका ने स्कूल में मानसिक उत्पीड़न करने व मानहानि के लिए अदालत में याचिका दायर कर प्राचार्य सहित दो लोगों से एक करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा। मगर वह अदालत की ओर से तय नियमों के तहत केस की सुनवाई के लिए 2.18 लाख रुपये कोर्ट फीस जमा नहीं कर पाई। इसकी वजह से सिविल जज जूनियर डिवीजन रवलीन कौर की अदालत ने केस को खारिज कर दिया।
बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि शिक्षिका ने वर्ष 2019 में याचिका दायर की थी कि स्कूल में उसका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। प्राचार्य उन्हें पढ़ाने के साथ कई अतिरिक्त कार्य दे रहे हैं।मामले में एक अन्य व्यक्ति को भी पार्टी बनाया गया था।
याचिका दायर कर मानसिक उत्पीड़न करने व मानहानि के लिए एक करोड़ रुपये मांगे गए थे। बचाव पक्ष ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक करोड़ का दावा किया है इसलिए नियम के अनुसार केस चालू होने से पहले उसे 2.18 लाख रुपये अदालत में फीस जमा करनी होगी।
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निचली अदालत ने कहा कि अभी राशि तय नहीं इसलिए फीस जमा करने का औचित्य नहीं है। इस पर बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की। हाईकोर्ट ने कहा कि एक करोड़ की मानहानि के लिए 2.18 लाख रुपये जमा करना उचित है।
याचिकाकर्ता अगर चार सप्ताह में राशि जमा कर देती है तो केस की कार्रवाई आगे चलेगी नहीं तो उसे खारिज माना जाएगा। राशि जमा करने के लिए 30 जून तक का समय दिया गया। राशि जमा नहीं होने पर सिविल जज जूनियर डिवीजन रवलीन कौर ने केस को खारिज कर दिया है।
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बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि शिक्षिका ने वर्ष 2019 में याचिका दायर की थी कि स्कूल में उसका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। प्राचार्य उन्हें पढ़ाने के साथ कई अतिरिक्त कार्य दे रहे हैं।मामले में एक अन्य व्यक्ति को भी पार्टी बनाया गया था।
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याचिका दायर कर मानसिक उत्पीड़न करने व मानहानि के लिए एक करोड़ रुपये मांगे गए थे। बचाव पक्ष ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक करोड़ का दावा किया है इसलिए नियम के अनुसार केस चालू होने से पहले उसे 2.18 लाख रुपये अदालत में फीस जमा करनी होगी।
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निचली अदालत ने कहा कि अभी राशि तय नहीं इसलिए फीस जमा करने का औचित्य नहीं है। इस पर बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की। हाईकोर्ट ने कहा कि एक करोड़ की मानहानि के लिए 2.18 लाख रुपये जमा करना उचित है।
याचिकाकर्ता अगर चार सप्ताह में राशि जमा कर देती है तो केस की कार्रवाई आगे चलेगी नहीं तो उसे खारिज माना जाएगा। राशि जमा करने के लिए 30 जून तक का समय दिया गया। राशि जमा नहीं होने पर सिविल जज जूनियर डिवीजन रवलीन कौर ने केस को खारिज कर दिया है।