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हमें तो हाउस टैक्स चाहिए चाहे परलोक से आकर भरो
tax house
Updated Thu, 10 Sep 2015 02:32 AM IST
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लापरवाहियों के लिए पहचाने जाने वाला नगर निगम हाउस टैक्स वसूली के लिए इस कद्र आमादा है कि मरे हुए लोगों के नाम भी बिल जारी किए जा रहे हैं।
एक-दो नहीं अभी तक इस तरह के एक हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। अब सवाल ये है कि क्या निगम अधिकारी टारगेट पूरा करने के लिए परलोक सिधार गए लोगों से भी बिल भरवाएंगे क्या? पेंच फंस गया है कि इन बिलों को ठीक करने के लिए डेथ सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है और सामान्य मौत होने पर अधिकतर लोगाें ने डेथ सर्टिफिकेट नहीं बनवाया है।
खास बात यह है कि निगम की टीम ने डोर टू डोर सर्वे करके मकान मालिकों की सूची बनाई थी, लेकिन इसके बाद भी मृतकों के नाम बिल भेज दिए गए।
निगम की ओर से भेजे जा रहे बिलों में खामियां उजागर होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। किसी का नाम गलत कर दिया गया तो किसी की रिहायशी प्रॉपर्टी को कामर्शियल दिखा दिया गया। इन सभी के कागजात निगम कार्यालय में दिखाने पर उनको ठीक कर दिया गया। अब मृतकों के नाम बिल जारी कर दिए गए। जिन परिजनों के पास डेथ सर्टिफिकेट है, उनके नाम तो बदल दिए जा रहे हैं। लेकिन सामान्य मौत में काफी लोगों ने डेथ सर्टिफिकेट नहीं बनवाया है। रूप नगर में सतीश के नाम का बिल भेज दिया गया, जबकि उनकी पहले ही मौत हो चुकी है। इस तरह मानसरोवर कॉलोनी में दिलीप सिंह का हाउस टैक्स बिल बनाया गया, जिनकी मौत हो चुकी है। अब उनकी पत्नी लक्ष्मी सिंह के नाम बिल बनना चाहिए था।
बिल लेकर नहीं मुकर सकेगा कोई
हाउस टैक्स का बिल लेकर भी काफी लोग मुकर रहे हैं कि उनके पास बिल नहीं पहुंचा है। अब बिल बांटने व जमा कराने का काम कर रही कंपनी ने नया तरीका अपनाया है। कंपनी कर्मचारी मकानों का फोटो लेने के अलावा बिल बांटने जाते वक्त मकान मालिक या अन्य सदस्य को बिल देते हुए उनके साथ फोटो भी खींच रहे हैं। घर में कोई नहीं मिलता है तो उसके गेट पर बिल चस्पा कर दिया जाता है और उसकी भी फोटोग्राफी की जाती है। इस तरह कोई यह नहीं कह सकेगा कि उसको बिल नहीं मिला है। सैनिकपुरा, मानसरोवर कालोनी, सभी सेक्टर में इस तरह से बिल बांटकर पिछले माह फोटोग्राफी की गई है और वहां सभी के घरों में जाकर बिल भी दिए गए हैं।
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वर्जन
बिल में किसी तरह की गलती रहती है तो उसे निगम कार्यालय में लेकर आने पर ठीक कर दिया जाता है। अगर किसी की मौत हो चुकी है और उसके नाम से बिल जारी हुआ है तो उसका डेथ सर्टिफिकेट लाने पर नाम बदल दिया जाता है।
जसवंत सिंह, जेडटीओ
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एक-दो नहीं अभी तक इस तरह के एक हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। अब सवाल ये है कि क्या निगम अधिकारी टारगेट पूरा करने के लिए परलोक सिधार गए लोगों से भी बिल भरवाएंगे क्या? पेंच फंस गया है कि इन बिलों को ठीक करने के लिए डेथ सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है और सामान्य मौत होने पर अधिकतर लोगाें ने डेथ सर्टिफिकेट नहीं बनवाया है।
खास बात यह है कि निगम की टीम ने डोर टू डोर सर्वे करके मकान मालिकों की सूची बनाई थी, लेकिन इसके बाद भी मृतकों के नाम बिल भेज दिए गए।
निगम की ओर से भेजे जा रहे बिलों में खामियां उजागर होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। किसी का नाम गलत कर दिया गया तो किसी की रिहायशी प्रॉपर्टी को कामर्शियल दिखा दिया गया। इन सभी के कागजात निगम कार्यालय में दिखाने पर उनको ठीक कर दिया गया। अब मृतकों के नाम बिल जारी कर दिए गए। जिन परिजनों के पास डेथ सर्टिफिकेट है, उनके नाम तो बदल दिए जा रहे हैं। लेकिन सामान्य मौत में काफी लोगों ने डेथ सर्टिफिकेट नहीं बनवाया है। रूप नगर में सतीश के नाम का बिल भेज दिया गया, जबकि उनकी पहले ही मौत हो चुकी है। इस तरह मानसरोवर कॉलोनी में दिलीप सिंह का हाउस टैक्स बिल बनाया गया, जिनकी मौत हो चुकी है। अब उनकी पत्नी लक्ष्मी सिंह के नाम बिल बनना चाहिए था।
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बिल लेकर नहीं मुकर सकेगा कोई
हाउस टैक्स का बिल लेकर भी काफी लोग मुकर रहे हैं कि उनके पास बिल नहीं पहुंचा है। अब बिल बांटने व जमा कराने का काम कर रही कंपनी ने नया तरीका अपनाया है। कंपनी कर्मचारी मकानों का फोटो लेने के अलावा बिल बांटने जाते वक्त मकान मालिक या अन्य सदस्य को बिल देते हुए उनके साथ फोटो भी खींच रहे हैं। घर में कोई नहीं मिलता है तो उसके गेट पर बिल चस्पा कर दिया जाता है और उसकी भी फोटोग्राफी की जाती है। इस तरह कोई यह नहीं कह सकेगा कि उसको बिल नहीं मिला है। सैनिकपुरा, मानसरोवर कालोनी, सभी सेक्टर में इस तरह से बिल बांटकर पिछले माह फोटोग्राफी की गई है और वहां सभी के घरों में जाकर बिल भी दिए गए हैं।
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बिल में किसी तरह की गलती रहती है तो उसे निगम कार्यालय में लेकर आने पर ठीक कर दिया जाता है। अगर किसी की मौत हो चुकी है और उसके नाम से बिल जारी हुआ है तो उसका डेथ सर्टिफिकेट लाने पर नाम बदल दिया जाता है।
जसवंत सिंह, जेडटीओ