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Jhajjar-Bahadurgarh News: जटेला धाम में स्वामी नित्यानंद महाराज का 224वां निर्वाण दिवस धूमधाम से मनाया गया

Sat, 16 Sep 2023 02:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 16 Sep 2023 02:46 AM IST
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Swami Nityanand Maharaj's 224th Nirvana Day was celebrated with pomp in Jatela Dham
कार्यक्रम के दौरान जटेला धाम पर सत्संग में बैठे हुए श्रद्धालु। संवाद
बेरी। गांव माजरा डी में स्थित तपोभूमि जटेला धाम में स्वामी नित्यानंद महाराज का 224वां निर्वाण दिवस मनाया गया। इस अवसर पर दूर-दराज से बड़े-बड़े संत महात्माओं ने तपोभूमि पहुंचकर महाराज श्री स्वामी नित्यानंद की गुरुवाणी पर प्रकाश डाला। संगत ने स्वामी नित्यानंद की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित कर पवित्र जाल वृक्ष के दर्शन किए।
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इस अवसर पर तपोभूमि जटेला धाम की पीठाधीश महाराज राजेंद्र दास ने बताया कि मध्यकाल में विदेशी हुक्मरानों ने देश की संस्कृति एवं विरासत पर हमले किए, परंतु साधु सन्यासियों ने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में कुशल पथ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि महान तपस्वी स्वामी नित्यानंद महाराज अकबर के महामंत्री बीरबल के वंशज थे तथा स्वयं भी वह भरतपुर की रियासत में तहसीलदार के पद पर थे। उन्हें एक घटना ने प्रभु चरणों का भक्त बना दिया। धन दौलत तथा राजसी ठाठ-बाट उनके वैराग्य पथ में बाधा बने हुए थे। परंतु पत्नी के देहावसान के बाद धन माल की हुई लूट ने उनके सांसारिक बंधन की बैड़ियों को काट दिया।
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उनका बचपन का नाम नंदलाल था। उनके जन्म के समय और शिक्षा दीक्षा के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है। नंदलाल पारिवारिक घटनाओं के कारण विचलित रहने लगे। उनकी भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति उदासीनता रहने लगी। इस प्रकार नंदलाल ने सांसारिक सुख सुविधाओं को मिथ्या समझकर नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और रेवाड़ी आकर अपने नाना सिताब राय के साथ रहने लगे। यहां उनकी भेंट वैष्णों संप्रदाय के बाल ब्रह्मचारी गुमानी राम से हुई। गुरु के चरणों में बैठकर उन्होंने अपने आपको आध्यात्मिक सांचे में ढालने के लिए तपस्या और साधना प्रारंभ कर दी। गुरु आज्ञानुसार तथा ईशभक्ति का पालन करते हुए उन्होंने माजरा-दुबलधन, सिवान-पिलाना तथा बिगोवा गांव के घने जंगलों में अपनी तपस्या की। जटेला जोहड़ के हीस बीड़ौ में बैठकर अपनी भक्ति साधना में लीन रहते। वह सात घरों से भिक्षा मांग कर अपनी क्षुधा को शांत करते थे। उनकी दृष्टि में प्रभु भक्ति का बड़ा महत्व था। महाराज ने संत सिद्धांत प्रकाश नामक साहित्य की रचना कर समाज को एक दिशा दृष्टि देने का काम किया, लेकिन 1799 ईस्वी में भादो सुदी एकम के दिन उन्होंने इस नश्वर संसार को छोड़कर सह शरीर प्रभु चरणों में अमरत्व प्राप्त कर लिया। इसलिए प्रत्येक वर्ष भादो सुदी एकम को तपोभूमि में महाराज का निर्वाण दिवस मनाया जाता है।
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