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विद्यार्थी बोले- अनुबंध छलावा, शिक्षा का निजीकरण बंद हो
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धरना दे रहे एमबीबीएस स्टूडेंट्स को समझाते एसडीएम राकेश कुमार। अमर उजाला
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रोहतक। पीजीआई के निदेशक कार्यालय के बाहर एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए बॉन्ड पॉलिसी की अनिवार्यता को लेकर चौथे दिन भी धरना-प्रदर्शन जारी रहा। यहां विद्यार्थियों ने स्पष्ट शब्दों में शासन व प्रशासन को बॉन्ड पॉलिसी पूरी तरह वापस लेने की बात कही। इसके लिए शुक्रवार दोपहर करीब 40 फीट लंबा बैनर भी लगाया और धरने पर डटे रहे। बॉन्ड कम लोन अनुबंध को छलावा बताते हुए शिक्षा का निजीकरण बंद करने की भी अपील की गई है।
शनिवार को स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मुख्यमंत्री मनोहर लाल मुख्य व गृहमंत्री अनिल विज शहर में होंगे। इसे देखते हुए शुक्रवार दोपहर एसडीएम राकेश कुमार व डीएसपी महेश कुमार प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को समझाने पहुंचे। बाद में उनके दस सदस्यीय दल की सीएम से मुलाकात कराने के आश्वासन के साथ माइक सिस्टम बंद रखने व हल्ला गुल्ला न करने की अपील कर लौट गए।
शुक्रवार को बॉन्ड पॉलिसी के विरुद्ध चौथे दिन भी विद्यार्थियों का धरना जारी रहा। पीजीआई के निदेशक कार्यालय के बाहर विद्यार्थी नारेबाजी के जरिये अपना गुस्सा जाहिर करते रहे। यहां उन्होंने सरकार के बॉन्ड राशि नहीं लिए जाने के बयान को छलावा बताते हुए कहा कि सरकार ने बॉन्ड पॉलिसी वापस नहीं ली है। विद्यार्थियों को सिर्फ बॉन्ड राशि पहले के बजाय बाद में जमा कराने का आश्वासन दिया है। बॉन्ड तो देना ही होगा। बॉन्ड कम लोन 40 लाख रुपये का है। इसका ब्याज डिग्री करने तक बढ़कर करीब 76 लाख रुपये हो जाएगा। इस पर भी नौकरी की गारंटी नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी के लिए इतनी बड़ी राशि का कर्ज उतारना नामुमकिन होगा। नौकरी मिलने पर भी उम्र का एक हिस्सा पढ़ाई में बिताने वाले डॉक्टर दूसरा बड़ा हिस्सा कर्ज उतारने में गुजार देंगे। इसलिए इस पॉलिसी को पूरी तरह वापस लिया जाए।
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आम आदमी पार्टी ने दिया समर्थन
शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता अनुराग ढांडा, संगठन मंत्री प्रवीण प्रभाकर गौड़, यूथ विंग राज्य अध्यक्ष अरुण हुड्डा, छात्र युवा सुरक्षा समिति के राज्य अध्यक्ष दीपक धनखड़ धरना स्थल पर पहुंचे। यहां विद्यार्थियों के धरने को हर संभव सहायता देते हुए कि बॉन्ड पॉलिसी को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी इसका डटकर विरोध करेगी। पार्टी की सरकार बनने पर अरविंद केजरीवाल इस पॉलिसी को रद्द करेंगे।
एसडीएम ने सीएम से मिलवाने का किया वादा
स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल बतौर मुख्य अतिथि पहुंचेंगे। उनके आगमन की तैयारी में जुटे प्रशासन की पीजीआई के प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने नींद उड़ाकर रख दी है। प्रशासन को प्रदर्शनकारियों द्वारा शोर शराबा किए जाने की आशंका है। इसके चलते शुक्रवार को एसडीएम व डीएसपी उन्हें समझाने वहां पहुंचे। यहां विद्यार्थियों के दस सदस्यीय दल से निदेशक कार्यालय में बातचीत की। विद्यार्थियों की समस्या सुनने के बाद अधिकारी ने शनिवार को सीएम से मिलवाने व समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही शनिवार को उनकी ओर से माइक प्रयोग न करने व शोरा शराबा नहीं करने की भी अपील की है।
एक्सपर्ट बोले- सरकार ने किया आई वॉश
बॉन्ड पॉलिसी में सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया है। पॉलिसी की बात अब छात्र, बैंक और कॉलेज पर डाल दी है। मेडिकल कॉलेजों से हर साल पास होने वाले विद्यार्थियों के लिए सरकार के पास नौकरी नहीं है। ऐसे में डिग्री करने के बाद विद्यार्थियों को ही बॉन्ड की राशि का भुगतान करना होगा। इसलिए बॉन्ड पॉलिसी खत्म करना जरूरी है। बैंक भी बगैर किसी गारंटी के लोन नहीं देगा। बड़ी संख्या में अभिभावकों के पास बैंक सिक्योरिटी देने तक की क्षमता नहीं है।
- डॉ. आरएस दहिया, पूर्व परीक्षा नियंत्रक।
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शनिवार को स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मुख्यमंत्री मनोहर लाल मुख्य व गृहमंत्री अनिल विज शहर में होंगे। इसे देखते हुए शुक्रवार दोपहर एसडीएम राकेश कुमार व डीएसपी महेश कुमार प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को समझाने पहुंचे। बाद में उनके दस सदस्यीय दल की सीएम से मुलाकात कराने के आश्वासन के साथ माइक सिस्टम बंद रखने व हल्ला गुल्ला न करने की अपील कर लौट गए।
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शुक्रवार को बॉन्ड पॉलिसी के विरुद्ध चौथे दिन भी विद्यार्थियों का धरना जारी रहा। पीजीआई के निदेशक कार्यालय के बाहर विद्यार्थी नारेबाजी के जरिये अपना गुस्सा जाहिर करते रहे। यहां उन्होंने सरकार के बॉन्ड राशि नहीं लिए जाने के बयान को छलावा बताते हुए कहा कि सरकार ने बॉन्ड पॉलिसी वापस नहीं ली है। विद्यार्थियों को सिर्फ बॉन्ड राशि पहले के बजाय बाद में जमा कराने का आश्वासन दिया है। बॉन्ड तो देना ही होगा। बॉन्ड कम लोन 40 लाख रुपये का है। इसका ब्याज डिग्री करने तक बढ़कर करीब 76 लाख रुपये हो जाएगा। इस पर भी नौकरी की गारंटी नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी के लिए इतनी बड़ी राशि का कर्ज उतारना नामुमकिन होगा। नौकरी मिलने पर भी उम्र का एक हिस्सा पढ़ाई में बिताने वाले डॉक्टर दूसरा बड़ा हिस्सा कर्ज उतारने में गुजार देंगे। इसलिए इस पॉलिसी को पूरी तरह वापस लिया जाए।
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आम आदमी पार्टी ने दिया समर्थन
शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता अनुराग ढांडा, संगठन मंत्री प्रवीण प्रभाकर गौड़, यूथ विंग राज्य अध्यक्ष अरुण हुड्डा, छात्र युवा सुरक्षा समिति के राज्य अध्यक्ष दीपक धनखड़ धरना स्थल पर पहुंचे। यहां विद्यार्थियों के धरने को हर संभव सहायता देते हुए कि बॉन्ड पॉलिसी को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी इसका डटकर विरोध करेगी। पार्टी की सरकार बनने पर अरविंद केजरीवाल इस पॉलिसी को रद्द करेंगे।
एसडीएम ने सीएम से मिलवाने का किया वादा
स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल बतौर मुख्य अतिथि पहुंचेंगे। उनके आगमन की तैयारी में जुटे प्रशासन की पीजीआई के प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने नींद उड़ाकर रख दी है। प्रशासन को प्रदर्शनकारियों द्वारा शोर शराबा किए जाने की आशंका है। इसके चलते शुक्रवार को एसडीएम व डीएसपी उन्हें समझाने वहां पहुंचे। यहां विद्यार्थियों के दस सदस्यीय दल से निदेशक कार्यालय में बातचीत की। विद्यार्थियों की समस्या सुनने के बाद अधिकारी ने शनिवार को सीएम से मिलवाने व समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही शनिवार को उनकी ओर से माइक प्रयोग न करने व शोरा शराबा नहीं करने की भी अपील की है।
एक्सपर्ट बोले- सरकार ने किया आई वॉश
बॉन्ड पॉलिसी में सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया है। पॉलिसी की बात अब छात्र, बैंक और कॉलेज पर डाल दी है। मेडिकल कॉलेजों से हर साल पास होने वाले विद्यार्थियों के लिए सरकार के पास नौकरी नहीं है। ऐसे में डिग्री करने के बाद विद्यार्थियों को ही बॉन्ड की राशि का भुगतान करना होगा। इसलिए बॉन्ड पॉलिसी खत्म करना जरूरी है। बैंक भी बगैर किसी गारंटी के लोन नहीं देगा। बड़ी संख्या में अभिभावकों के पास बैंक सिक्योरिटी देने तक की क्षमता नहीं है।
- डॉ. आरएस दहिया, पूर्व परीक्षा नियंत्रक।