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कॉलेज ने मौका देखकर बढ़ाई फीस
नारनौल/ब्यूरो।
Updated Wed, 27 Nov 2013 09:28 PM IST
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हरियाणा के नारनौल में यदुवंशी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के छात्र-छात्राओं ने बुधवार को कक्षाओं का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया।
छात्रों का कहना था कि कॉलेज प्रशासन के बिना बताए अचानक फीस में वृद्धि कर दी है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि 30 नवंबर तक बढ़ाई गई फीस वापस नहीं ली गई तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने बताया कि दिसंबर में उनकी परीक्षा होने वाली है। इस समय कॉलेज प्रशासन ने अचानक फीस बढ़ाकर उन्हें परेशानी में डाल दिया है।
उन्होंने बताया कि दाखिले के समय तो कॉलेज प्रशासन लोक लुभावनी बातें करता है और बाद में परीक्षा के समय फीस में अनावश्यक वृद्धि करके फीस जमा करवाने के लिए विद्यार्थियों पर दबाव बनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि दाखिले के समय तो उनके प्रवेश पत्र में निर्धारित फीस ली गई थी लेकिन अब अचानक कॉलेज प्रशासन ने प्रत्येक बच्चे की फीस पर दस-दस हजार रुपये की वृद्धि कर दी है।
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जो छात्रों के साथ अन्याय है। छात्रों का कहना था कि हम सभी छात्र सामान्य परिवार से हैं और इतने रुपये देने में असमर्थ हैं।
छात्रों का कहना था कि जब हमने अपनी मांग को लेकर कालेज अध्यापकों से बात करनी चाही तो उन्होंने भी हमारी बात सुनने के बजाय दुर्व्यवहार किया।
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छात्रों का कहना था कि कॉलेज प्रशासन के बिना बताए अचानक फीस में वृद्धि कर दी है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि 30 नवंबर तक बढ़ाई गई फीस वापस नहीं ली गई तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने बताया कि दिसंबर में उनकी परीक्षा होने वाली है। इस समय कॉलेज प्रशासन ने अचानक फीस बढ़ाकर उन्हें परेशानी में डाल दिया है।
उन्होंने बताया कि दाखिले के समय तो कॉलेज प्रशासन लोक लुभावनी बातें करता है और बाद में परीक्षा के समय फीस में अनावश्यक वृद्धि करके फीस जमा करवाने के लिए विद्यार्थियों पर दबाव बनाया जाता है।
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उन्होंने बताया कि दाखिले के समय तो उनके प्रवेश पत्र में निर्धारित फीस ली गई थी लेकिन अब अचानक कॉलेज प्रशासन ने प्रत्येक बच्चे की फीस पर दस-दस हजार रुपये की वृद्धि कर दी है।
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जो छात्रों के साथ अन्याय है। छात्रों का कहना था कि हम सभी छात्र सामान्य परिवार से हैं और इतने रुपये देने में असमर्थ हैं।
छात्रों का कहना था कि जब हमने अपनी मांग को लेकर कालेज अध्यापकों से बात करनी चाही तो उन्होंने भी हमारी बात सुनने के बजाय दुर्व्यवहार किया।