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Rohtak News: सड़कों पर लावारिस पशु, नागरिकों की सुरक्षा दांव पर, नगर परिषद मौन
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20जेएनडी09: अर्बन इस्टेट में घुमते बेसहारा गोवंश। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अर्बन इस्टेट समेत कई पॉश कॉलोनियों तक लावारिस पशुओं की भरमार है। नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा है लेकिन नगर परिषद पशु पकड़ने को लेकर गंभीर नहीं है। सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं की वजह से नगर परिषद की कार्यप्रणाली और उसकी लापरवाही उजागर हो रही है।
शहर के गोहाना रोड, सफीदों रोड, नया बस स्टैंड, सब्जी मंडी, रुपया चौक, पटियाला चौक, रोहतक रोड और भिवानी रोड जैसे व्यस्ततम इलाकों में दिनभर 20 से 30 लावारिस पशुओं के झुंड सड़कों पर बैठे या घूमते रहते हैं।
रात के समय पशु सड़कों पर बैठे रहते हैं। दुपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले राहगीर परेशान हैं। कई बार वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इस कारण हादसों का डर बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए तो यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।
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गोशालाओं में पहले से ही क्षमता अधिक होने के कारण नए पशुओं को वहां भेजना संभव नहीं था। इसी कारण पशु पकड़ने की कार्रवाई सीमित रखी गई ताकि जो पशु पहले से गोशालाओं में हैं उनकी देख भाल ठीक से की जा सके।
लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान बंद
नगर परिषद ने गोशालाओं में जगह नहीं होने के कारण और सर्दी के मौसम का बहाना बनाकर लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान बंद कर दिया था। सर्दी के दौरान शहर में लावारिस पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। नगर परिषद की इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्य योजना नजर नहीं आ रही। लावारिस पशुओं के कारण सब्जी मंडी और नया बस स्टैंड इलाकों में जाम की स्थिति बनी रहती है।
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लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। यदि गोशालाओं में जगह नहीं थी तो नगर परिषद को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। अस्थाई शेड या अन्य स्थानों पर पशुओं को रखने की योजना बनाई जा सकती थी लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। - राज कुमार गोयल, समाज सेवी
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अब सर्दी कम हो गई है। लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही मौसम अनुकूल होगा और गोशालाओं में स्थान की व्यवस्था होगी उसी समय अभियान तेज किया जाएगा। गोशालाओं में ज्यादा पशु एक साथ रखने पर वहां पर पहले से मौजूद पशुओं को भी परेशानी होती है।
-ऋषिकेश चौधरी, ईओ नगर परिषद जींद।
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जींद। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अर्बन इस्टेट समेत कई पॉश कॉलोनियों तक लावारिस पशुओं की भरमार है। नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा है लेकिन नगर परिषद पशु पकड़ने को लेकर गंभीर नहीं है। सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं की वजह से नगर परिषद की कार्यप्रणाली और उसकी लापरवाही उजागर हो रही है।
शहर के गोहाना रोड, सफीदों रोड, नया बस स्टैंड, सब्जी मंडी, रुपया चौक, पटियाला चौक, रोहतक रोड और भिवानी रोड जैसे व्यस्ततम इलाकों में दिनभर 20 से 30 लावारिस पशुओं के झुंड सड़कों पर बैठे या घूमते रहते हैं।
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रात के समय पशु सड़कों पर बैठे रहते हैं। दुपहिया वाहन चालक और पैदल चलने वाले राहगीर परेशान हैं। कई बार वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इस कारण हादसों का डर बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए तो यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।
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गोशालाओं में पहले से ही क्षमता अधिक होने के कारण नए पशुओं को वहां भेजना संभव नहीं था। इसी कारण पशु पकड़ने की कार्रवाई सीमित रखी गई ताकि जो पशु पहले से गोशालाओं में हैं उनकी देख भाल ठीक से की जा सके।
लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान बंद
नगर परिषद ने गोशालाओं में जगह नहीं होने के कारण और सर्दी के मौसम का बहाना बनाकर लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान बंद कर दिया था। सर्दी के दौरान शहर में लावारिस पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। नगर परिषद की इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्य योजना नजर नहीं आ रही। लावारिस पशुओं के कारण सब्जी मंडी और नया बस स्टैंड इलाकों में जाम की स्थिति बनी रहती है।
लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। यदि गोशालाओं में जगह नहीं थी तो नगर परिषद को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। अस्थाई शेड या अन्य स्थानों पर पशुओं को रखने की योजना बनाई जा सकती थी लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। - राज कुमार गोयल, समाज सेवी
अब सर्दी कम हो गई है। लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही मौसम अनुकूल होगा और गोशालाओं में स्थान की व्यवस्था होगी उसी समय अभियान तेज किया जाएगा। गोशालाओं में ज्यादा पशु एक साथ रखने पर वहां पर पहले से मौजूद पशुओं को भी परेशानी होती है।
-ऋषिकेश चौधरी, ईओ नगर परिषद जींद।