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Rohtak News: सोमवती अमावस्या आज, दान और तर्पण से ग्रह और पितृ दोष से पाएं मुक्ति
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29सीटीके13..दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्र। स्रोत : मंदिर
रोहतक। सोमवती अमावस्या इस बार पौष माह में सोमवार 30 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस अमावस्या पर पूर्वजों की मृत्यु की तिथि पता न हो तब भी पितरों का पिंडदान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म और तर्पण करने से व्यक्ति को पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही पवित्र नदी में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। इससे पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। अमावस्या पूर्वजों का पिंडदान करने का सबसे सही दिन माना जाता है। कुंडली से पितृ दोष समाप्त होता है।
दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्रा ने बताया कि हर महीने में अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और पितरों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष पौष माह में सोमवती अमावस्या पड़ रही है, तो ऐसे में श्रीहरि के संग महादेव की उपासना की जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। साथ ही जीवन खुशहाल होता है।
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अमावस्या का समय सुबह 04 बजकर 01 मिनट से होगा प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 30 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 01 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 31 दिसंबर को सुबह 03 बजकर 56 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में 30 दिसंबर को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी।
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-- -- विधिपूर्वक करना चाहिए पूजा-पाठ
सोमवती अमावस्या के दिन पूजा-पाठ विधिपूर्वक करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही ग्रह और पितृ दोष की समस्या से व्यक्ति को छुटकारा मिलता है। महादेव के आशीर्वाद से वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहता है। पूर्वज प्रसन्न होते हैं। व्यक्ति सभी दुखों से मुक्त होता है।
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दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्रा ने बताया कि हर महीने में अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और पितरों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष पौष माह में सोमवती अमावस्या पड़ रही है, तो ऐसे में श्रीहरि के संग महादेव की उपासना की जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। साथ ही जीवन खुशहाल होता है।
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अमावस्या का समय सुबह 04 बजकर 01 मिनट से होगा प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 30 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 01 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 31 दिसंबर को सुबह 03 बजकर 56 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में 30 दिसंबर को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी।
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सोमवती अमावस्या के दिन पूजा-पाठ विधिपूर्वक करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही ग्रह और पितृ दोष की समस्या से व्यक्ति को छुटकारा मिलता है। महादेव के आशीर्वाद से वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहता है। पूर्वज प्रसन्न होते हैं। व्यक्ति सभी दुखों से मुक्त होता है।